मंदी की जकड़ में ट्रेडर घबराए रिस्क से
निफ्टी फ्यूचर्स का साथ इधर समस्या यह चल रही है कि निफ्टी के स्पॉट भाव से वह बेहद मामूली प्रीमियम पर रहता है और बहुत बार तो डिस्काउंट या नीचे चला जाता है। इस डिस्काउंट का सीधा-सा मतलब यह हुआ कि ट्रेडर निफ्टी के बढ़ने की गुंजाइश नहीं देख रहे तो उसके फ्यूचर्स कम भाव पर बेचने को तैयार हैं। यह बाज़ार के लिए बेहद दुखद और अफसोसनाक है। मंदी की धारणा ने उनको ऐसा जकड़ लियाऔरऔर भी
ऑप्शंस के साथ फ्यूचर्स ट्रेडर भी बेचैन!
शेयर बाज़ार के आम ट्रेडर परेशान हैं, ऑप्शंस ट्रेडर हैरान हैं तो फ्यूचर्स ट्रेडर भी कोई कम हैरान-परेशान नहीं। वे तो बेहद जटिल, अनोखी व गंभीर चुनौती झेल रहे है। ऐसी पहेली जिससे हम अक्सर रू-ब-रू नहीं होते। जब सरकारी बॉन्डों की यील्ड यानी रिस्क-फ्री ब्याज दर बढ़ रही हो, तब ऑप्शंस के साथ ही फ्यूचर्स का प्रीमियम बढ़ जाना चाहिए क्योंकि तब सौदे को कैरी करने की लागत बढ़ जाती है। प्रीमियम का सीधा रिश्ता उसऔरऔर भी
दूसरे के उद्यम से होती है हमारी कमाई!
एक बात हमें बहुत साफ समझ लेनी चाहिए कि वित्तीय बाज़ार में हम अपनी बचत लगाकर जो भी कमाते हैं वह किसी दूसरे के उद्यम का नतीजा होता है। बैंक हमें एफडी पर इसलिए ज्यादा ब्याज देता है क्योंकि वह हमारे धन को उधार पर चढ़ाकर उससे ज्यादा कमा लेता है। सरकार हमें बॉन्ड पर इसलिए ज्यादा ब्याज देती है क्योंकि हमारा धन उसकी ज़रूरतें पूरी करता है और उसके पास उधार चुकाने के लिए ज्यादा उधारऔरऔर भी
ऑप्शंस में चली उल्टी रीत, ट्रेडर भौचक
इन दिनों इंट्रा-डे ट्रेडर खुश हैं क्योंकि वे लहरों की उछलकूद से अच्छा कमा सकते हैं। निफ्टी-50 अक्सर दिन भर में 50-100 नहीं, बल्कि 150-200 अंक से ज्यादा के दायरे में नीचे-ऊपर होता है। लेकिन कम पूंजी लेकर निफ्टी ऑप्शंस पर दांव लगानेवाले बड़े व्यथित हैं। मालूम हो कि ऑप्शंस साधारण बीमा की तरह हैं जिनकी मीयाद के दौरान आपने इस्तेमाल कर लिया तो ठीक, नहीं तो मीयाद खत्म होने पर उनका कोई मूल्य नहीं रह जाता।औरऔर भी







