उद्योग दमदार, कंपनी हो पाक-साफ!
अच्छा निवेश वो है जिसमें मूलधन सुरक्षित रहे और इतना संतोषजनक रिटर्न मिले जो महंगाई को बेअसर कर सके। निवेश के गुरु बेन ग्राहम ने निवेश की एक और परिभाषा दी है। निवेश वो है जिसे मात्रा और गुणवत्ता, दोनों पैमानों पर खरा पाया जाए। कंपनी में निवेश संबंधी मात्रात्मक पहलुओं में उसके धंधे व लाभ की वृद्धि दर, ऋण-इक्विटी अनुपात, इक्विटी व नियोजित पूंजी पर रिटर्न, लाभ मार्जिन और लाभांश रिकॉर्ड वगैरह आते हैं। इन परऔरऔर भी
गिराना, चढ़ाना व कमाना इनकी फितरत
विदेशी पोर्टफोलियो या संस्थागत निवेशक आज भारतीय शेयर बाज़ार में हर्षद मेहता जैसे बड़े ऑपरेटर की हैसियत हासिल कर चुके हैं। जब चाहते हैं किसी कंपनी या क्षेत्र के शेयरों को उठा या पीट देते हैं। उन्हें धीरे-धीरे बटोरने के बाद चढ़ाने लगते हैं और जमकर मुनाफा कमाते हैं। उन्होंने हाल में आईटी क्षेत्र के साथ यही किया। ऐसा बेचा कि इन्फोसिस, विप्रो, टीसीएस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा व ओरैकल फाइनेंशियल सर्विसेज़ जैसी कंपनियों के शेयर 52औरऔर भी
परिंदे प्रवासी आएंगे नहीं तो जाएंगे कहां!
क्या एफआईआई फिर लौटकर पहले जैसे जोशोखरोश के साथ भारत आएंगे? यकीनन, उनको आना ही है, बशर्ते भारतीय बाज़ार में उन्हें अमेरिका या अन्य विकसित देशों से ज्यादा रिटर्न मिलता है। अर्थशास्त्रियों से लेकर तमाम बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था का कितना भी कुप्रबंधन कर लिया जाए, लेकिन उसकी आंतरिक सामर्थ्य इतनी ज्यादा है कि उसे निखरने से कोई रोक नहीं सकता। वैसे, अब भी हम गौर करें तो सेंसेक्स का प्रदर्शन डाउ जोन्सऔरऔर भी
बाज़ार हमारा, रुख तय करे विदेशी धन!
आज विदेशी संस्थागत या पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) हमारे शेयर बाज़ार के दिशा-निर्धारक बन गए है। पूरे बाजार ही नहीं, तमाम अच्छे-खासे मजबूत स्टॉक्स की नियति उनकी मुठ्ठी में है। वे ही इनका रुख तय करते हैं। कोई फंडामेंटल नहीं, केवल विदेशी धन या निवेश का प्रवाह भावों को तय करने लगा है। मौजूदा साल 2022 में जुलाई से अब तक भारतीय शेयर बाज़ार में 57,579 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीद के बावजूद उन्होंने कुल मिलाकर 1,59,779 करोड़औरऔर भी









