फटाफट बढ़ा तो करेक्शन, अन्यथा नहीं
अगर अपना शेयर बाज़ार फटाफट चढ़े और निफ्टी-50 थोड़े समय में ही 20,000 अंक पर पहुंच जाए तो यकीनन ट्रेडरों को अपनी पोजिशन काटकर मुनाफा बटोर लेना चाहिए। असल में कम अवधि में निफ्टी के बढ़ने से कंपनियों की लाभप्रदता तो वही रहेगी और बाज़ार ज्यादा महंगा हो जाएगा। तब उसमें करेक्शन लाज़िमी हो जाएगा। लेकिन अगर बाज़ार लम्बे समय तक सीमित दायरे में चलता हुआ धीरे-धीरे बढ़ता है और तब निफ्टी 20,000 अंक तक पहुंचता है,औरऔर भी
बाहर निराशा, अंदर है आशा का स्रोत!
अपने बाज़ार के आशावाद का ठोस आधार है। अभी अर्थव्यवस्था में छिपी अपार संभावनाओं का बाहर आना बाकी है। आम व खास निवेशकों को भी इस बात का विश्वास है। यह म्यूचुअल फंडों के लगातार बढ़ते निवेश से पुष्ट होता है। इधर कई हफ्तों से विदेशी संस्थागत या पोर्टफोलियो निवेशक भी भारतीय बाज़ार में बेचने से ज्यादा खरीद रहे हैं। कुल मिलाकर अपने शेयर बाज़ार का सेंटीमेंट अभी सकारात्मक है। इसलिए लगभग तय है कि निफ्टी-50 बहुतऔरऔर भी
आर्थिक मंदी की आशंका नहीं निराधार!
अगर हमारे ही नहीं, दुनिया भर के वित्तीय बाज़ारों में वैश्विक आर्थिक मंदी का डर फैला हुआ है तो यह कतई निराधार नहीं है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगले साल 2023 में वैश्विक मंदी आ सकती है। इसकी आशंका इसलिए भी बढ़ जाती है कि अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें बढ़ाने का सिलसिला जा रखा है और आगे भी बढ़ाते रहने की बात कही है ताकि मुद्रास्फीति पर काबू पाया जा सके।औरऔर भी
चर्चा-उम्मीद तेज़ी की, मगर डर मंदी का
निफ्टी अगर 20,000 तक पहुंच गया तो उसके बाद वह नई-नई ऊंचाई बनाता रहेगा या उसमें करेक्शन आ सकता है? अभी अपने यहां जो माहौल है तो वो तेज़ी का है। लेकिन उसकी सतह पर सावधानी और डर का भाव भी कहीं न कहीं तैर रहा है। अमेरिका से लेकर ब्रिटेन, यूरोप व जापान तक अर्थव्यवस्था में मंदी छाने की आहट है। सितंबर तिमाही में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जापान अपनी मुद्रा येन की कमज़ोरीऔरऔर भी










