अमर रेमेडीज इमामी, निरमा व घडी डिटरजेंट जैसी देशी कंपनी है जो फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) के बाजार में हिंदुस्तान यूनिलीवर व कॉलगेट जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को टक्कर देने की कोशिश में लगी है। इसकी शुरुआत 1984 में स्वामी औषधालय प्रा. लिमिटेड के रूप में हुई जिसने आयुर्वेदिक मेडिसिनल रिसर्च व डेवलपमेंट का बीड़ा उठाया। यहीं से उसका मौजूदा नाम निकला जो उसने 1995 से अपना रखा है। कंपनी के बारे में और जानने से पहलेऔरऔर भी

हो सकता है कि कोई रेत को मसल कर तेल निकाल ले, मरीचिका से भी अपनी प्यास बुझा ले, गधे तक के सिर पर सींग देख ले, लेकिन एक दम्भी मूर्ख को प्रसन्न कर पाना किसी के लिए भी असंभव है।और भीऔर भी

कुछ ही दिनों पहले स्पीक एशिया की तरफ से अपने सभी पैनलिस्ट को बताया गया है कि, “12 मई तक की सभी कैश रिक्वेस्ट उनके बैंक खाते में क्रेडिट की जा चुकी होंगी और बाकी 21 मई तक की कैश रिक्वेस्ट हमारे बैंक ने प्रोसेस कर ली है और अगले हफ्ते किसी वक्त वह आपके खाते में क्रेडिट हो जाएगी।” लेकिन स्पीक एशिया का यह दावा बहुत मुमकिन है कि पूरा ही न हो क्योंकि कई बैंकोंऔरऔर भी

देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी इनफोसिस टेक्नोलॉजीज का शेयर 15 अप्रैल को सालाना नतीजों की घोषणा के बाद से लगातार गिरते-गिरते 2850 रुपए पर आ चुका है। लेकिन बाजार के रुझान और मूड को देखें तो अब इसमें ज्यादा गिरने की गुंजाइश नहीं है। यह इसे खरीदने का अच्छा मौका है। इस बीच कंपनी ने बताया है कि वह चीन के शांघाई शहर में 12.5 से 15 करोड़ डॉलर के निवेश से एक नयाऔरऔर भी

हर काम हर पल दुनिया में कहीं न कहीं होता रहता है। जीना-मरना, हंसना-रोना, मिलना-बिछुड़ना। अंतहीन छोरों से बंधी डोर उठती है, गिरती है। झूले या सांप नहीं, सागर की लहरों की तरह दौड़ती है जिंदगी।और भीऔर भी

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) हारून लोर्गट का मानना है कि भारतीय उप महाद्वीप में सट्टेबाजी को वैध कर देना चाहिए। इससे सट्टेबाजों पर निगाह रखने में मदद मिलेगी और ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना भी आसान हो जाएगा।’ लोर्गट ने कहा, ‘‘यदि इस कारोबार को वैध बना दिया जाता है तो फिर आप वास्तव में उनके साथ मिलकर काम करोगे। ऐसे में उन पर बेहतर तरीके से निगरानी रखी जा सकती है। यदिऔरऔर भी

हमारे अवध के गांवों में एक कहावत चला करती थी। मालूम नहीं, अब खेल-खलिहान व चरागाहों के उजड़ जाने के बाद क्या हाल है? वो कहावत यूं थी कि पढ़ब-लिखब की ऐसी-तैसी, छोलब घास चराउब भैंसी। मतलब आप समझ ही गए होंगे। लेकिन शेयर बाजार को समझना और निवेश का कौशल सीखना है तो पढ़ाई-लिखाई की ऐसी उपेक्षा नहीं की जा सकती है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि यहां इतने कारक काम कर रहे होते हैं कि कुछऔरऔर भी

अंधेरे, सुनसान, बियावान सफर के दौरान पीछे से पुकारने वाली आवाजें भुतहा ही नहीं होतीं। कभी-कभी अतीत आपके कंधे पर हाथ रखकर पूछना चाहता है – भाई! कैसे हो, सफर में कोई तकलीफ तो नहीं।और भीऔर भी

देश के मुख्य सांख्यिकीविद् टी सी ए अनंत के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें देश की आर्थिक विकास दर को प्रभावित कर सकती हैं और चालू वित्त वर्ष में यह 8.5 फीसदी रह सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मानसून सामान्य रहने की स्थिति में अगस्त-सितंबर तक सकल मुद्रास्फीति की दर आठ फीसदी के आंकड़े से नीचे आ जाएगी। प्रमुख उद्योग संगठन फिक्की के एक समारोह के दौरान अनंत ने कहा, ‘‘तेल कीऔरऔर भी

सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में पेट्रोलियम पदार्थों की सब्सिडी भरपाई में तेल और गैस के उत्खनन व उत्पादन कार्य में लगी कंपनियों का योगदान बढ़ाकर 38.8 फीसदी तक कर दिया है। इन्हें अपस्ट्रीम कंपनियां कहा जाता है और इनमें ओएनजीसी, ऑयल इंडिया और गैल इंडिया शामिल हैं। सरकार के इस कदम से खासतौर से ओएनजीसी को झटका लग सकता है और उसके प्रस्तावित एफपीओ (फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर) पर भी नकारात्क असर पड़ सकता है। बता देंऔरऔर भी