जयराम रमेश को पर्यावरण मंत्रालय से हटाकर ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दे दी गई। लेकिन रमेश के इस तरह चले जाने पर पर्यावरणविदों की भावनाएं काफी आहत हुई हैं। इसे जताते हुए प्रोजेक्ट टाइगर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे कहा, ‘‘सर, बाघों को आपकी कमी खलेगी।’’ मंगलवार को कैबिनेट मंत्री के तौर पर पदोन्नत किए गए रमेश ने इस पर प्रतिक्रिया दी, ‘‘मस्त रहो, मैं मंगल पर नहीं जा रहा।’’ बाघों के हितैषी मंत्री समझेऔरऔर भी

मंगलवार को गिरते बाजार में भी हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (एचसीसी) के शेयर तब 4.54 फीसदी उछल गए जब पता चला कि जयराम रमेश को पर्यावरण मंत्रालय से हटा दिया गया है। साथ ही दस रुपए अंकित मूल्य से भी नीचे जा चुके बीएजी फिल्म्स के शेयर भी 10 फीसदी उछल गए जब पता चला कि उसके कर्ता-धर्ता राजीव शुक्ला को मनमोहन सिंह ने अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया है। जयराम रमेश पर्यावरण के मसले पर किसीऔरऔर भी

गोकलदास एक्सपोर्ट्स का शेयर लंबे अरसे से 90-95 कर रहा है। बीच-बीच में कुछ हल्ला मचाकर इसे उठाया जाता है। फिर यह ठंडा पड़ जाता है। चार महीने पहले 10 मार्च को अचानक हल्ला उठा कि ब्लैकस्टोन ग्रुप कंपनी का प्रबंधन अपने हाथ में लेने जा रहा है। शेयर खटाक से उसी दिन 20 फीसदी ऊपरी सर्किट तक बढ़कर 94.95 रुपए से 113.90 रुपए पर पहुंच गया। अगले दिन 11 मार्च को 129.40 रुपए पर जाने केऔरऔर भी

आदतों के बिना ज़िंदगी नहीं चलती। एकदम रसहीन बन जाती है। इसलिए आदतें तो डालनी ही पड़ती हैं। अब यह आप पर है कि आप खुद को अच्छी आदतों का गुलाम बनाते हैं या बुरी आदतों का।और भीऔर भी

एक तरफ भारतीय दवा कंपनियां कह रही हैं कि उन्हें विदेशी अधिग्रहण से बचाया जाए। अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) तक ने सिफारिश की है कि दवा उद्यमों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 100 फीसदी से घटाकर 49 फीसदी कर दी जाए। दूसरी तरफ योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने कहा है कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और दवा उद्योग में 100 फीसदी एफडीआई को कहीं से कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। आहलूवालियाऔरऔर भी

लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) फर्म स्टॉक एक्सचेंजों की सदस्य बन सकती है और स्टॉक एक्सचेंज उसे स्टॉक ब्रोकर के रूप में पंजीकृत कर सकते हैं। यह साफ किया गया है पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने आज सोमवार को सभी स्टॉक एक्सचेंजों को भेजे सर्कुलर में। सेबी ने कहा है कि सिक्यूरिटीज कांट्रैक्ट रेगुलेशन नियम, 1956 (एससीआरआर) में अलग से एलएलपी का जिक्र नहीं है क्योंकि लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप एक्ट तो उसके बाद साल 2008 में बनाऔरऔर भी

कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने देश की 1,55,392 कंपनियों को ब्लैक-लिस्ट कर दिया है। इसकी वजह यह है कि इन कंपनियों ने 2006-07 से लेकर अब तक किसी साल की बैलेंस शीट दाखिल नहीं की है। सरकार के इस कदम के बाद ये कंपनियां न तो बैंकों या वित्तीय संस्थाओं के कोई ऋण ले पाएंगी और न ही किसी के साथ कोई नया अनुबंध कर पाएंगी। यह जानकारी खुद कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के सचिव डी के मित्तल नेऔरऔर भी

इस समय देश में आयकर विभाग के कुल 53,000 पदों में से लगभग 22 फीसदी खाली पड़े हैं। यह संख्या 11,500 के आसपास बनती है। ऐसा तब हो रहा है जब काले धन का शोर उठा हुआ है और सरकार कर-चोरी को रोकने के दावे कर रही है। सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक 2010-11 में अटके हुए टैक्स की रकम 2.63 लाख करोड़ रुपए रही है। आयकर विभाग खाली पदों को भरने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष करऔरऔर भी

कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं जिनमें लंबे समय के निवेश को लेकर ज्यादा कुछ आगा-पीछा सोचने की जरूरत नहीं होती। बस यही देखना पड़ता है कि उन्हें सस्ते में पकड़ने का वक्त है कि नहीं। एचडीएफसी ऐसी ही कंपनी है। हाउसिंग फाइनेंस की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी कंपनी। हमारे यहां 30-32 साल के नए-नए नौकरी करनेवाले लोग भी जो लोन लेकर खटाक से घर के मालिक बन जा रहे हैं, वो पूरी सहूलियत और इस धंधेऔरऔर भी

हम काम हर कोई नहीं कर सकता। इसलिए हमें काम वही करना चाहिए जो हम सबसे अच्छा कर सकते हैं। बाकी औरों के लिए छोड़ दें। लेकिन आज ये छूट कहां! आज तो हम पैसे के लिए ही काम करते हैं।और भीऔर भी