देश का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष 2011-12 में सितंबर तक के छह महीनों में ही पूरे साल के बजट अनुमान का लगभग 71 फीसदी हो चुका है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2010-11 की पहली छमाही में यह बजट अनुमान का 34.9 फीसदी ही था। वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार राजकोषीय घाटा अप्रैल-सितंबर 2011 के बीच 1.92 लाख करोड़ रुपए रहा है, जबकि पूरे वित्त वर्ष का बजट लक्ष्य 4.13 लाख करोड़ रुपए रखा गयाऔरऔर भी

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुद्रास्‍फीति को काबू में रखकर ऊंची विकास दर को बराबर बनाए रखना है। यह मानना है कि हमारे अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का। उन्होंने रविवार को राजधानी दिल्ली में राज्यपालों के सम्मेलन में कहा कि हाल के महीनों में खाद्य वस्‍तुओं की कीमतों का बढ़ना चिंता का मसला है। उन्‍होंने कहा कि‍ सरकार और रि‍जर्व बैंक मुद्रास्‍फीति‍ को कम करने के लि‍ए वि‍त्‍तीय और मौद्रि‍क उपाय जारी रखेंगे। रिजर्व बैंक मार्चऔरऔर भी

संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) की बैठक में सोमवार को 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर तीखे मतभेद उठ खड़े हुए और विपक्षी दलों ने पूर्व महानिदेशक (ऑडिट) आर पी सिंह को बुलाने और उनसे यह पूछने की मांग की कि उन्होंने इस मामले में हुए नुकसान का आंकड़ा कैग (सीएजी या नियंत्रणक एवं महालेखापरीक्षक) के आंकड़े से अलग क्यों बताया। कांग्रेस सदस्यों ने इस मांग का विरोध किया। मतभेद जारी रहने के कारण लोक लेखा समितिऔरऔर भी

वॉल स्ट्रीट के नाम से मशहूर न्यूटॉक स्टॉक एक्सचेंज को हिला देने वाले अमेरिका के सबसे बड़े इनसाइडर ट्रेडिंग मामले में भारतीय मूल के दो लोग आमने सामने हैं। एक अपराधी के कठघरे में तो दूसरा सरकारी वकील के रूप में। न्यूयॉर्क के शीर्ष संघीय वकील प्रीत भरारा द्वारा अमेरिका में कॉरपोरेट जगत की चर्चित शख्सियत रजत गुप्ता और अन्य पर आरोप साबित करने के लिए हर कानूनी दांवपेच अपनाए जाने की संभावना है। भरारा न्यूयॉर्क केऔरऔर भी

अब निवेश के लिए मर चुका है लांग टर्म। लद चुका है लांग टर्म निवेश का ज़माना। आज का दौर खटाखट नोट बनाने का है। रुझान पकड़कर समझदारी से ट्रेडिंग करने का। बाजार चाहे गिरे, या बढ़े। बनाइए नोट खटाखट। दोनों ही हाल में कमाई। दोनों हाथों में लड्डू और सिर कढ़ाई में। जी हां, ऑनलाइन ट्रेडिंग एकेडमी का यही दावा है। उसका कहना है कि वह आपको हफ्ते भर में ऐसी ट्रेनिंग दे देगी कि आपऔरऔर भी

जिसके पास पैसा है, उसके पास पूंजी हो, जरूरी नहीं। जिसके पास पूंजी है, वह अमीर हो, जरूरी नहीं। पैसा उद्यम में लगता है तो पूंजी बनता है। दृष्टि सुसंगत बन जाए, तभी पूंजी किसी को अमीर बनाती है।और भीऔर भी

आज का जमाना ही सपने देखने-दिखाने और उन्हें पूरा करने का जमाना है। अगर आप अपने सपने के लिए काम नहीं करते तो दूसरों के सपनों के लिए काम करते हैं। अपने या दूसरों के लिए? फैसला आपका है।और भीऔर भी

विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) तो भारत में धंधा करने के लिए आए हैं। काम खत्म, पैसा हजम। कमाई हो गई, निकल लिए। उनके मूल देश में कुछ गड़बड़ हुई तो अपना आधार बचाने निकल पड़े। यूरोप-अमेरिका के मामूली से घटनाक्रम पर भी वे बावले हो जाते हैं। इसलिए जो निवेशक एफआईआई का अनुसरण करते हैं, वे यकीनन समझदार होने के बावजूद परले दर्जे की मूर्खता करते हैं। लेकिन माना जाता है कि एलआईसी या यूटीआई म्यूचुअल फंडऔरऔर भी

हर कोई चाहता है कि वह पीछे ऐसा कुछ छोड़कर जाए कि दुनिया उसे याद करें। लेकिन गिने-चुने लोग ही ऐसा कर पाते हैं क्योंकि एक तो सभी में वैसी प्रतिभा नहीं होती, दूसरे हर कोई वैसा जोखिम नहीं उठाता।और भीऔर भी

भारतीय शेयर बाजार का पूंजीकरण दुनिया के शेयर बाजार का करीब 3% है। हमारे सबसे बड़े बैंक एसबीआई का लाभ चीन के सबसे बड़े बैंक का महज 10% है। निजी क्षेत्र में हमारी तेल व गैस की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज इसी क्षेत्र की फ्रांसीसी कंपनी टोटल के एक तिहाई आकार की है। ऊपर से हमारी 100 सबसे बड़ी कंपनियों के लाभ में 41% हिस्सा सरकारी कंपनियों, 41% हिस्सा परिवार नियंत्रित कंपनियों और बाकी 18% हिस्साऔरऔर भी