सम्राट अकबर के दरबार में नौ ही रत्न थे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दरबारी मंत्रियों के रूप में 69 रत्न भर रखे हैं। सभी नायाब, एक से बढ़कर एक। इन्हीं रत्नों या कहें तो महारत्नों में से एक हैं उनकी सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। मई 2019 से देश की वित्त मंत्री हैं और अब तक लगातार नौ बजट पेश कर चुकी हैं। वे अपने ‘संजीदा’ बयानों से हर देशवासी की बोलती बंद करती रही हैं। 2019 में प्याज की बढ़ती कीमतों पर लोकसभा में कहा था, “मैं ज्यादा प्याज़ और लहसुन नहीं खाती तो चिंता न करें।” 2023 के बजट में उन्होंने पोल्यूटिंग वेहिकल्स को पॉलिटिकल वेहिकल्स कह दिया। इससे पहले 2022 में आईएमएफ-विश्व बैंक की वॉशिंग्टन बैठक के बाद उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि रुपया गिर नहीं रहा, बल्कि डॉलर मजबूत हो रहा है। अभी दस दिन पहले आईएमएफ-विश्व बैंक की बैंकाक में आयोजित बैठक के बाद उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि शेयर बाज़ार में “आसान लिक्विडिटी, आसान उपलब्धता के कारण लोग आसानी से निकल जा रहे हैं।” उन्होंने लगातार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के पलायन पर यह जबाव दिया। उनका आशय था कि भारत में रिटेल निवेशक खरीदने को आतुर हैं तो एफपीआई आसानी से बेच ले रहे हैं। हमारी अर्थव्यवस्था कहीं से कमज़ोर नहीं, एकदम दुरुस्त है। अब सोमवार का व्योम…
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