दौर ही तो है!
मेहनत का मोल नहीं, प्रतिभा का भाव नहीं। ठगों की बस्ती है। ठगी का दौर है। कोई सीधे-सीधे ठग रहा है तो कोई घुमाकर। सारा कुछ डर और लालच के हमारे शाश्वत भाव का फायदा उठाकर किया जा रहा है। लेकिन यह भी तो एक दौर है। बीत जाएगा।और भीऔर भी
सोचना देश के लिए
देश के लिए सोचना आसान है, करना कठिन। सोचने के लिए बस भावना चाहिए, जबकि करने के लिए सही हालात का सच्चा ज्ञान जरूरी है। भावना में सच्चे, ज्ञान में कच्चे रहे तो सत्ता के लिए लार टपकाता कोई समूह हमारा इस्तेमाल कर लेता है।और भीऔर भी
ज्ञान काम का
उन विचारों का क्या काम, जो हमारी अपनी गुत्थियों को न सुलझा सकें। फालतू हैं वे विचार हैं जो हमें पस्त हालत से निकाल न सकें। वो ज्ञान किस काम का जो महज दूसरों को प्रवचन देने के लिए है, लेकिन खुद हमें नया धरातल, संबल न दे सके।और भीऔर भी
सीमित अपने तक
भगवान पर ध्यान लगा हम अपने अंदर की शक्तियों और बाहर की ताकतों को साधते हैं। भगवान यहीं तक सीमित रहे तो बड़ा कल्याणकारी है। लेकिन, कोई जब दूसरों को खींचने के लिए भगवान का इस्तेमाल करने लगता है तो वह बड़ा विनाशकारी हो जाता है।और भीऔर भी






