निफ्टी-50 सूचकांक 20,000 पर पहुंचते-पहुंचते रह गया। हफ्ते-दो हफ्तें में वहां पहुंच सकता है। फिर दो-चार साल में 30,000 तक भी चला जाएगा। हमारी अर्थव्यवस्था अभी 3.32 लाख करोड़ या ट्रिलियन डॉलर की है। कुछ साल में 5 ट्रिलियन और फिर 10 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी। भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। कुछ साल में जर्मनी, जापान से आगे निकल तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। यह विकास की सहज स्वाभाविक गति है। उसीऔरऔर भी

आप शेयर बाज़ार में निवेश करने जाएं तो साफ गिन लें कि कितना धन डुबाने का जोखिम ले रहे हैं। मुमकिन है कि किसी कंपनी में आपने जितना धन लगाया, वह सारा का सारा डूब जाए। जब जेब और मन इसके लिए तैयार हो, तभी निवेश करें। नहीं तो बेहतर होगा कि सरकार के बॉन्ड, बैंकों की एफडी या पीपीएफ वगैरह में अपना धन पार्क कर दें, जहां कम से कम मूलधन तो सुरक्षित बना हुआ दिखेगा।औरऔर भी

शेयर बाज़ार समझदारों का खेल नहीं है। यह तो लालच और डर की भावनाओं में खिंचते व भागते धनवानों का खेल है। यह दरअसल नीलामी का बाज़ार का है जिसमें भविष्य की सोच कर दांव लगा दिया जाता है जो गलत भी पड़ सकता है और सौदा आगे जाकर गले की हड्डी बन सकता है। वहीं, रीयल एस्टेट बाज़ार समझदार व बुद्धिमान ग्राहक समझदार व बुद्धिमान ग्राहक के साथ सौदा करता है। इसलिए रीयल एस्टेट बाज़ार मेंऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में ओवर-ट्रेडिंग करना धन ही नहीं, तन व मन के लिए भी घातक है। साफ समझ लें कि ट्रेडिंग पूरी तरह मनोविज्ञान व सहज मानव-प्रवृत्तियों पर चलनेवाला खेल है। जितना ज्यादा आवेश में रहेंगे, उतना ही ज्यादा दूसरों के शिकार बन सकते हैं। इसलिए ट्रेडिंग में नियमित रूप से ब्रेक लेते रहना ज़रूरी है। अच्छा ट्रेड कर लिया, बड़ा मुनाफा कमा लिया, तब भी कुछ दिन शांत रहना चाहिए क्योंकि तब आपको लगने लगता हैऔरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग एक तरह का बिजनेस है, टैक्स के लिहाज़ से भी और धंधे व समय के लिहाज़ से भी। इसलिए इसमें व्यापारी की तरह सारे खर्च घटाकर ही अपना शुद्ध लाभ गिनना चाहिए। स्टॉप-लॉस तो इस बिजनेस का अनिवार्य व अपरिहार्य खर्च है ही, जिसके कोई ट्रेडर बच नहीं सकता। साथ ही उसे यह भी साफ-साफ पता होना चाहिए कि वह ब्रोकरेज़, एसटीटी (सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स), जीएसटी, एक्सचेंज ट्रांजैक्शन चार्ज, इम्पैक्ट कॉस्ट व सेबीऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में तेज़ी के मौजूदा दौर में जब कचरा स्टॉक्स तक उड़े जा रहे हों, तब तक रिटेल ट्रेडर के लिए पहला नियम यह होना चाहिए कि वो हमेशा मूलभूत रूप से मजबूत कंपनियों के स्टॉक्स ही चुने। इनमें भी तभी एंट्री ली जाए, जब वे तात्कालिक मुनाफावूली के चलते थोड़ा नीचे आ गए हों। अगर हल्की कंपनी के स्टॉक्स ले लिए तो वे उड़ते-उड़ते कभी भी धड़ाम हो सकते हैं। वहीं, मजबूत कंपनी के शेयरऔरऔर भी

शेयर बाज़ार साफ तौर पर तेज़ी के दौर या अंग्रेज़ी में कहें बुल फेज़ में है। जो भी कंपनियां मूलभूत रूप से या फंडामेंटली मजबूत हैं, उनमें से ज्यादातर के शेयर ऐतिहासिक शिखर तक जा पहुंचे हैं। जिनके शेयर ठंडे पड़े हैं, उनमें निवेश तो किया जा सकता है, लेकिन ट्रेडिंग नहीं। ऐसे में आज आम ट्रेडर के दिमाग में सबसे बड़ा सवाल है कि वह किन स्टॉक्स में ट्रेड करे। इंट्रा-डे ट्रेडर के लिए कोई समस्याऔरऔर भी

शेयर बाज़ार ऐतिहासिक शिखर पर। हर दिन नए से नए शिखर की ओर। यह आम निवेशकों और रिटेल ट्रेडरों के लिए बड़ा खतरनाक दौर है। ज़रा-सा भी अच्छी कंपनी है तो उसके शेयर 52 हफ्ते के शिखर के एकदम करीब हैं या नया शिखर पकड़ते जा रहे हैं। पहले ट्रेडर ऐसी कंपनियों में स्विंग या मोमेंटम ट्रेड से कुछ दिनों में 8-10% कमा सकता था। लेकिन अब उनकी कमाई 2-4% तक सिमट गई है। वो भी अनिश्चित,औरऔर भी

शेयर बाज़ार बहुत-बहुत धनवालों और बैंकों, म्यूचुअल फंडों, बीमा कंपनियों व एफपीआई जैसे बड़े-बड़े संस्थागत निवेशकों का खेल है। इसमें आम लोगों को म्यूचुअल फंड के ज़रिए ही एंट्री लेनी चाहिए क्योंकि तब वे भी बड़ी निवेशक संस्था का हिस्सा बन जाते हैं। दुनिया भर का यही रिवाज़ है क्योंकि इसी में आम निवेशकों की सुरक्षा है। रिटेल ट्रेडर तो शुरू से ही महारथियों से पंगा लेता है। इसलिए आम या रिटेल ट्रेडर को बहुत हुआ तोऔरऔर भी

अभी भारतीय मध्यवर्ग की आबादी कितनी होगी, इसका कोई पक्का अनुमान या आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। इसे हम 20 करोड़ मान लें तो इसका 67.85% हिस्सा फिलहाल शेयर बाज़ार से जुड़ चुका है। देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज बीएसई की वेबसाइट के मुताबिक, 12 जुलाई 2023 तक अपने यहां रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या 13,56,95,100 पर पहुंच चुकी है। इसमें साल भर में 23.86% की शानदार वृद्धि हुई है। सबसे ज्यादा 2,67,47,397 पंजीकृत निवेशक महाराष्ट्र में हैं।औरऔर भी