ज्यादा ट्रेड करना होता है घाटे का सौदा

शेयर बाज़ार में तेज़ी के मौजूदा दौर में जब कचरा स्टॉक्स तक उड़े जा रहे हों, तब तक रिटेल ट्रेडर के लिए पहला नियम यह होना चाहिए कि वो हमेशा मूलभूत रूप से मजबूत कंपनियों के स्टॉक्स ही चुने। इनमें भी तभी एंट्री ली जाए, जब वे तात्कालिक मुनाफावूली के चलते थोड़ा नीचे आ गए हों। अगर हल्की कंपनी के स्टॉक्स ले लिए तो वे उड़ते-उड़ते कभी भी धड़ाम हो सकते हैं। वहीं, मजबूत कंपनी के शेयर गिर भी गए तो निवेशकों व बड़े ट्रेडरों की बढ़ी हुए लालच उन्हें देर-सबेर खींचकर ऊपर ही ले जाएगी। दूसरा नियम यह है कि आज के दौर में बहुत ज्यादा ट्रेड करने या ओवर-ट्रेडिंग से बचें। होता यह है कि लोगबाग कम ब्रोकरेज़ के चक्कर में ज्यादा ट्रेड करने लगते हैं। लेकिन एसटीटी, एक्सचेंज़ ट्रांजैक्शन चार्ज, स्टैंप ड्यूटी, इम्पैक्ट कॉस्ट और सेबी का शुल्क वगैरह जोड़ लें तो ज्यादा ट्रेड करना अंततः घाटे का सौदा साबित होता है। अच्छी बात यह है कि सेबी के कहने से ब्रोकर अब ऑर्डर के समय ही सारा शुल्क दिखाने लगे हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…

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