औरों पर बीस पड़ने के लिए आपके पास ऐसी अंतर्दृष्टि होनी चाहिए जो सब के पास नहीं है। जटिल हालात में आपकी प्रतिक्रिया अलग होनी चाहिए। अति-उत्साह या अफरातफरी की हालत में आपका बर्ताव औरों से एकदम भिन्न होना चाहिए। सच है कि सफलता के लिए आपका सही होना ज़रूरी है। पर, सही होना ही अपने आप में पर्याप्त नहीं। आपको बाज़ार से कमाने के लिए दूसरों से ज्यादा सही होना पड़ेगा। अब चलाएं बुध की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग में उतरे हैं तो जाहिरा तौर पर मकसद औसत नहीं, बल्कि उससे ज्यादा रिटर्न कमाना होगा। इसके लिए आपको औसत से बेहतर ट्रेडर होना पड़ेगा, जिसके लिए आपकी सोच उन सभी से बेहतर होनी चाहिए। आज तो हर ट्रेडर के पास कंप्यूटर है, इंटरनेट से मिल सकनेवाली सारी सूचनाएं हैं। बहुतों के पास संभव है कि आपसे बेहतर सॉफ्टवेयर हो। फिर कौन-सी चीज़ है जिसमें आप उन पर भारी पड़ सकते हैं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है और यह कोई नई बात नहीं क्योंकि लालच व डर की दो अतियों के बीच झूलना उसका मूल स्वभाव है। लेकिन इसके साथ ही हर ट्रेडर के अंदर अलग किस्म का भावनात्मक संघर्ष चलता रहता है। अगर वो उसमें विजय नहीं हासिल कर पाता तो तुक्का भले लग जाए, लेकिन बराबर सफल नहीं हो सकता। इसलिए बाज़ार में जीतने से पहले उसे खुद को जीतना पड़ता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार इस साल मार्च के बाद से लगभग 15% गिर चुका है तो बिजनेस चैनलों व अखबारों में विश्लेषक बताने लगे हैं कि अब ब्लूचिप कंपनियों को खरीद लेना चाहिए। लेकिन कौन-सी ब्लूचिप? हो सकता है कि गिरी हुई ब्लूचिप सड़ी हुई निकली। जैसे, किसी ज़माने की ब्लूचिप रिलायंस कैपिटल 2008 में 79% गिरने के बाद 36% और गिर चुकी है। तब 92% गिरा यूनिटेक 85% और गिर चुका है। आज पेश है एक सॉलिड ब्लूचिप…औरऔर भी

शेयरों के भाव का चार्ट बीएसई या एनएसई की साइट पर मुफ्त उपलब्ध हैं। दैनिक भावों के चार्ट पर आखिरी बिंदु से पीछे वहां तक जाएं, जहां से भाव ठीक पिछली बार उठने लगे थे। वहां आखिरी कैंडल का दायरा देखें। उससे संस्थाओं की मांग का ज़ोन पता लगेगा। इसी तरह ठीक जहां से भाव गिरे थे, वहां की कैंडल उनकी बिकवाली का ज़ोन बताती है। इस मोटे सूत्र में बहुतेरी बारीकियां हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के पैटर्न को पकड़ने से साफ हो जाता है कि भावों का कौन-सा दायरा है जहां वे खरीद सकते हैं या किन भावों पर वे बिकवाली कर सकते हैं। वे कभी घबराहट में सौदे नहीं करते। एक तरह की लयताल उनकी खरीद-फरोख्त में रहती है। वे जहां प्रवेश/निकास करते हैं, वहां से भाव दिशा बदलते हैं तो उनकी दिशा पकड़ने से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। अब चलाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

निवेशक तो कंपनी के बिजनेस व संभावनाओं के आकलन से लंबे सौदे पकड़ सकते हैं मगर ट्रेडरों को टेक्निकल एनालिसिस का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन जो हो चुका है, उससे आगे जो होगा, इसका सटीक अनुमान कैसे लगाया जा सकता है? यह मुश्किल तब आसान होने लगती है जब हम बाज़ार में सक्रिय बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के पैटर्न को समझना सीख जाते हैं। चार्ट पर देखें तो यह दिखने लगता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

ओस चाटने से प्यास नहीं बुझती। इसी तरह शायद इंट्रा-डे ट्रेडरों की बरक्कत नहीं होती। बेचारे सुबह से शाम तक मेहनत करते हैं। लेकिन बमुश्किल इतनी दिहाड़ी कमा पाते हैं कि किसी तरह चाय-पानी और आने-जाने का खर्चा निकल जाए। शेयर बाज़ार में कमाते हैं वही जो कई दिनों, महीनों या सालों के सौदे करते हैं। इसमें भी वे जो भावी आकलन में ज्यादा माहिर होते हैं। इस महारत का क्या है सूत्र? फिलहाल सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अभी दुनिया की जो आर्थिक हालत है, चीन तक की स्थिति डांवाडोल है, उसे देखते हुए क्या भारत में अब भी दीर्घकालिक निवेशकों के लिए कोई संभावना बची है? यह विषय निबंध के लिए अच्छा है। लेकिन हम जैसे आम निवेशकों के लिए इसका कोई मायने-मतलब नहीं। इसे संस्थाओं की मगजमारी के लिए छोड़ देना चाहिए। हमें तो अच्छी कंपनी को सही भाव पर पकड़ने की कोशिश में लगे रहना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व ने अंततः ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की, जबकि दुनिया भर में माना जा रहा था कि वो इसे शून्य से 0.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.25 से 0.50 प्रतिशत कर सकता है। फेडरल रिजर्व की चेयरमैन जानेट येलेन ने भारतीय समय से गुरुवार-शुक्रवार की आधी रात के बाद यह घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा है जिसने वस्तुतः अमेरिकी केंद्रीय बैंक के हाथ बांध दिएऔरऔर भी