बाजार में मिथ है कि एफआईआई जिस शेयर को खरीदते हैं, उसके भाव अपने-आप बढ़ जाते हैं। लेकिन सिर्फ यही कारक किसी शेयर को नहीं बढ़ा सकता। जैसे, मार्च 2011 के अंत तक अल्सटॉम प्रोजेक्ट्स इंडिया में एफआईआई की इक्विटी हिस्सेदारी 2.56 फीसदी थी, जबकि जून 2011 के अंत तक यह बढ़कर 4.10 फीसदी हो गई। जाहिर है कि एफआईआई की यह सारी खरीद 1 अप्रैल से 30 जून 2011 के बीच हुई होगी। लेकिन 1 अप्रैलऔरऔर भी

देश की सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जून 2011 की तिमाही में अब तक की किसी भी तिमाही से ज्यादा शुद्ध लाभ कमाया है। लेकिन बाजार व विश्लेषकों के अनुमान से यह जरा-सा पीछे रह गया। बाजार को अपेक्षा 5720 करोड़ रुपए के शुद्ध लाभ की थी, जबकि कंपनी ने चालू वित्त वर्ष 2011-12 की पहली तिमाही में 5661 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। यह साल भर पहले की इसी अवधि के 4851औरऔर भी

ग्लोडाइन टेक्नोसर्व आईटी सेवाओं में सक्रिय मुंबई की कंपनी है। आनंद सरनायक इसके संस्थापक प्रवर्तक और सीएमडी हैं। सरनायक 1997 में यह कंपनी बनाने से पहले एचसीएल-एचपी में काम करते थे। कंपनी की दो खास सेवाएं हैं टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट सर्विसेज (आईएमएस) और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर सर्विसेज। आप कहेंगे कि इससे हमको क्या लेना-देना। तो बात यह है कि ठीकठाक धंधा कर रही इस कंपनी का शेयर कल 18 जुलाई 2011 को अपने न्यूनतम स्तर 298 रुपए तकऔरऔर भी

निराशा का कोई अंत नहीं। मंदड़ियों को कभी यकीन ही नहीं आएगा कि तेजी का आगाज हो चुका है और अब निफ्टी के 6300 तक पहुंचने की भड़क खुल चुकी है। निफ्टी आज 5596.60 तक जाने के बाद मामली गिरावट के साथ 5567.05 पर बंद हुआ है। सेंसेक्स भी 0.30 फीसदी गिरकर 18,507.04 पर बंद हुआ है। ट्रेडरों को हमेशा पढ़ाया क्या, चढ़ाया जाता है कि वे बाजार चलानेवाले उस्तादों और एफआईआई से भी बेहतर पारखी हैं।औरऔर भी

सिंडीकेट बैंक का शेयर साल भर पहले आज ही के दिन 7 जुलाई 2010 को 91.65 रुपए की तलहटी पर था। इसके बाद 16 नवंबर 2010 को 164.20 रुपए के शिखर पर पहुंच गया। पिछले एक महीने में 118.60 रुपए से घटकर 115.40 रुपए पर आ गया है। लेकिन ब्रोकरेज फर्म आईसीआईसीआई सिक्यूरिटीज का कहना है कि अगले दस महीनों में यह 137 रुपए तक जा सकता है। यानी, इसमें 19 फीसदी से ज्यादा रिटर्न मिल सकताऔरऔर भी

एवीटी नेचुरल प्रोडक्ट्स का शेयर लगातार कुलांचे मार रहा है। 28 सितंबर 2010 से 28 जून 2011 के बीच के नौ महीनों में वह 88.40 रुपए के न्यूनतम स्तर से 287.90 रुपए के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। साल भर से भी कम वक्त में 225 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न! बीते जून माह में ही यह दोगुना हो गया है। एक जून को नीचे में 140.15 रुपए पर था और 28 जून को ऊपर में 287.90औरऔर भी

आंध्रा शुगर्स सिर्फ चीनी नहीं बनाती। वह इसके अलावा एल्कोहल व उससे संबंधित रसायन, एस्पिरिन, क्लोरो एल्कली – सल्फ्यूरिक एसिड, सुपर फॉस्फेट व कॉस्टिक सोडा और बिजली तक बनाती है। इन सभी रसायनों से उसे फायदा हो रहा है, जबकि चीनी उसके गले का कंटक बन गई है। वित्त वर्ष 2010-11 के नतीजों के अनुसार चीनी से हुई उसका बिक्री साल भर पहले के 211.42 करोड़ रुपए से 51.75 फीसदी घटकर 102.01 करोड़ रुपए रह गई औरऔरऔर भी

एक 15 दिसंबर 2010 का दिन था जब सरकारी कंपनी मॉयल (पूरा पुराना नाम मैंगनीज ओर इंडिया लिमिटेड) की लिस्टिंग हुई थी और 375 रुपए पर जारी किया गया उसका शेयर पहले ही दिन 591.05 के शिखर पर जा बैठा था। उस दिन उन तमाम पंटरों के कपड़े उतर गए थे जो लिस्टिंग के पहले अनधिकृत बाजार में इन शेयरों को 200-250 रुपए में बेच रहे थे। और, एक कल 23 जून 2011 का दिन रहा, जबऔरऔर भी

लोग कहे जा रहे हैं, कहे जा रहे हैं, लेकिन नुस्ली वाडिया की ऐतिहासिक कंपनी बॉम्बे डाईंग का शेयर मरा जा रहा है तो मरा ही जा रहा है। हमारे चक्री महाशय तो बॉम्बे डाईंग को लेकर लंबे समय से बुलिश हैं। 21 दिसंबर 2010 को उन्होंने लिखा था कि यह नए साल का ब्लॉक बस्टर साबित होगा और दिसंबर 2011 तक चार अंकों में पहुंच जाएगा। यूं तो वे 31 मार्च 2010 से ही इसे तबऔरऔर भी

एडीएफ फूड्स छोटी-सी कंपनी है। 20.38 करोड़ रुपए की पूंजी है जो दस रुपए अंकित मूल्य के शेयरों में बंटी है। बाजार पूंजीकरण कोई खास नहीं, 126 करोड़ रुपए है। इसलिए स्मॉल कैप में गिनी जाती है। लेकिन काम जबरदस्त करती है। भारतीय स्वाद की मास्टर है। अचार, चटनी व मसालों से लेकर फ्रोजन फूड तक बनाकर निर्यात करती है। अशोका, कैमल, एयरोप्लेन, खानखामा, ट्रूली इंडियन और सोल इसके ब्रांड हैं। 95 फीसदी कमाई मध्य-पूर्व, अमेरिका, यूरोपऔरऔर भी