निराशा का कोई अंत नहीं। मंदड़ियों को कभी यकीन ही नहीं आएगा कि तेजी का आगाज हो चुका है और अब निफ्टी के 6300 तक पहुंचने की भड़क खुल चुकी है। निफ्टी आज 5596.60 तक जाने के बाद मामली गिरावट के साथ 5567.05 पर बंद हुआ है। सेंसेक्स भी 0.30 फीसदी गिरकर 18,507.04 पर बंद हुआ है। ट्रेडरों को हमेशा पढ़ाया क्या, चढ़ाया जाता है कि वे बाजार चलानेवाले उस्तादों और एफआईआई से भी बेहतर पारखी हैं।औरऔर भी

हमारा शेयर बाजार या तो किसी योगी और पहुंचे हुए संत-फकीर की तरह बर्ताव करता है जो दीन-दुनिया से एकदम निर्लिप्त है या उस मूढ़ की तरह जिस पर कोई जगतगति नहीं ब्यापती। नहीं तो क्या वजह है कि बुधवार की शाम मुंबई में आतंकवादियों के सीरियल बम धमाकों के बाद गुरुवार को शेयर बाजार ने ऐसा दिखाया जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो। बीएसई सेंसेक्स बुधवार के बंद स्तर 18,596.02 से जरा-सा नीचे 18,563.69 पर खुला।औरऔर भी

टीसीएस ने कल उम्मीद से बेहतर नतीजे घोषित किए और शॉर्ट कवरिंग के चलते इसका शेयर खुला ही काफी ज्याद बढ़कर। लेकिन फिर मुनाफावसली शुरू हो गई तो तेजी फिलहाल आज के लिए थोड़ी थम गई। फिर भी कुल मिलाकर कल से दो फीसदी बढ़त के साथ बंद हुआ है। बाजार भी सुबह 5631.70 तक जाने के बाद नीचे आ गया। असल में यूरोपीय बैंकों के स्ट्रेस टेस्ट से पहले तमाम शॉर्ट सौदे करनेवाले थोड़ा दबाव मेंऔरऔर भी

जैसी कि उम्मीद थी, मुंबई का सीरियल ब्लास्ट शेयर बाजार पर बेअसर रहा। बाजार खुला जरूर थोड़ा गिरावट व घबराहट के साथ। लेकिन यह मंदड़ियों को घात लगाकर पकड़ने जैसा था क्योंकि परसों निफ्टी 5500 तक गिर गया था और तमाम ट्रेडर व देशी-विदेशी फंड शॉर्ट सौदों में फंस गए थे। यह मजबूत इरादों वाले तेजड़ियों के लिए सुनहरा मौका था और वे मंदड़ियों के साथ जारी शीत-युद्ध के बीच निफ्टी को 5620 के ऊपर ले गए।औरऔर भी

बाजार सुधर कर वापस 5500 के ऊपर के प्रतिरोध स्तर पर आ चुका है। निफ्टी 1.07 फीसदी की बढ़त के साथ 5585.45 पर बंद हुआ है। दरअसल मुद्दा टेक्निकल रैली का नहीं, बल्कि यह तथ्य है कि 22 जून 2011 के बाद कल पहली बार एफआईआई का निवेश ऋणात्मक रहा। उन्होंने कल 969.44 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की है। लेकिन ऐसा इनफोसिस के अपेक्षा से कमतर नतीजों, आईआईपी के कमजोर आंकड़ों व यूरोप में छाई कमजोरीऔरऔर भी

इनफोसिस के खराब नतीजे, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का कम रहना और दुनिया के बाजारों की खराब हालत, खासकर इटली पर घहराता ऋण संकट। इन सब नकारात्मक कारकों ने पूंजी बाजार के लिए आज के दिन को निराशा में डुबो डाला। इसका भरपूर असर निफ्टी पर दिखा। खुला ही करीब 60 अंक गिरकर। दिन के दौरान हालत बिगड़ती गई। नतीजतन बाजार में बड़े पैमाने पर बिकवाली हुई। निफ्टी कुल 89.95 अंक या 1.60 फीसदी की गिरावट के साथऔरऔर भी

दुनिया के बाजारों की पस्ती हमारे बाजार में भी पस्ती का सबब बन गई। इटली में बांडों मूल्यों का अचानक गिर जाना और ऑस्ट्रेलिया में कोयला खनन पर टैक्स लगाने जैसी बातों ने माहौल को और बिगाड़ दिया। फिर भी भारतीय बाजार अपेक्षाकृत संभले रहे। मिड-कैप स्टॉक्स में देशी-विदेशी फंडों की खरीद जारी है। एप्टेक, एलएमएल, एसीसी और टाटा मोटर्स के नॉन वोटिंग शेयरों वगैरह को तवज्जो मिल रही है। निफ्टी गिरा जरूर, लेकिन 5600 के नीचेऔरऔर भी

कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं जिनमें लंबे समय के निवेश को लेकर ज्यादा कुछ आगा-पीछा सोचने की जरूरत नहीं होती। बस यही देखना पड़ता है कि उन्हें सस्ते में पकड़ने का वक्त है कि नहीं। एचडीएफसी ऐसी ही कंपनी है। हाउसिंग फाइनेंस की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी कंपनी। हमारे यहां 30-32 साल के नए-नए नौकरी करनेवाले लोग भी जो लोन लेकर खटाक से घर के मालिक बन जा रहे हैं, वो पूरी सहूलियत और इस धंधेऔरऔर भी

हमने इसी जगह एक बार नहीं, कई बार कहा था कि चाहे कुछ हो जाए, बाजार 5735 तक जाएगा। यह हो गया। महज दो हफ्तों में एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) ने 10,000 करोड़ रुपए की खरीद कर डाली। अहम सवाल है कि आगे क्या होगा? क्या यह क्षणिक आवेग है या बाजार नई छलांग की तैयारी में है? मंदी और तेजी के खेमे की राय स्वाभाविक तौर पर अलग-अलग है। कुछ कहते हैं कि यह महज फुलझड़ीऔरऔर भी

भगवान ने इंसान को बनाया या इंसान ने भगवान को – यह बात मैं दावे के साथ नहीं कह सकता। लेकिन इतना दावे के साथ जरूर कह सकता हूं कि दस के चक्र/क्रम में चलनेवाली गिनतियों को इंसान ने ही बनाया है। इंसान की दस उंगलियां है तो यह चक्र दस का है। उन्नीस होतीं तो यह चक्र उन्नीस का होता। ज्योतिष और अंकों में दिलचस्पी रखनेवाले इस पर सोचें। हम तो फिलहाल यह देखते हैं किऔरऔर भी