लम्बी फेंकने की फांस, गेहूं बना ग्रास
शरद पवार जैसे बहुरंगी कलाकार की जगह मई 2014 में जब राधा मोहन सिंह को केंद्रीय कृषि मंत्री बनाया गया तो आम धारणा यही बनी कि ज़मीन से जुड़े नेता होने के नाते वे देश की कृषि अर्थव्यवस्था ही नहीं, किसानों के व्यापक कल्याण का भी काम करेंगे। संयोग से उससे करीब सवा साल बाद मंत्रालय का नाम भी बदल कर कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय कर दिया गया। लेकिन उसके बमुश्किल महीने भर बाद राधा मोहनऔरऔर भी
खोल से बाहर
बीज अगर फलियों की खोल तोड़कर बाहर न निकलें तो सृजन का सिलसिला ही रुक जाए। इसी तरह मानव समाज को आगे बढ़ाने के लिए कुछ लोगों को सुरक्षा का कवच तोड़कर बाहर निकलना ही पड़ता है।और भीऔर भी
असली नहीं, तकनीकी है यह उछाल
शुक्रवार को डर था कि आज कहीं काला सोमवार न हो जाए। लेकिन आज तो पूरा परिदृश्य ही बदला हुआ था क्योंकि इटली के अखबार में छपी एक खबर के मुताबिक आईएफएम ने कह दिया कि इटली को संकट से निकालने के लिए वो वित्तीय मदद देने को तैयार है। हालांकि बाद में आईएमएफ के प्रवक्ता ने इसका खंडन कर दिया। खैर, इस दरम्यान हमारे उस्ताद लोग इसे यूरोप के संकट में राहत बताकर बाजार को चढ़ानेऔरऔर भी
कितना घट गया है किसानों का लाभ मार्जिन!
सभी लोग कंपनियों के लाभ मार्जिन के कम या ज्यादा होने की बात करते हैं। लेकिन कोई इस बात पर गौर नहीं करता कि देश के अन्नदाता किसानों का लाभ मार्जिन कितना घटता जा रहा है। एक तो वैसे ही 90 फीसदी किसान गुजारे लायक खेती करके जिंदा है, ऊपर से मार्जिन में सुराख ने गरीबी में आटे को और गीला कर दिया है। एक खबर के अनुसार, धान की फसल पर किसानों ने पिछले साल प्रतिऔरऔर भी
विदेशी बीज कंपनियों को अबाध छूट से बढ़ा खतरा
देश में बीज के उत्पादन और विकास के क्षेत्र में विदेशी कंपनियों के लिए बने नियमों में ढील देने के सरकारी फैसले पर विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम तभी फायदेमंद होगा जब सरकार किसानों व पर्यावरण के लिहाज से अनुकूल शोध को बढ़ावा देती रहे। कुछ विशेषज्ञों ने तो इससे बीज बाजार और खाद्य सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया है और कहा है कि हमें इसको लेकर सावधान हो जाना चाहिए। उल्लेखनीय कि सरकार नेऔरऔर भी





