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science (Page 4)

vikas vigyan ka

सतत विकास विज्ञान का

2024-12-24
By: अनिल रघुराज
On: December 24, 2024
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

vigyan ki drishti

विज्ञान की दृष्टि

2024-12-23
By: अनिल रघुराज
On: December 23, 2024
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

ham fissaddi kyon

हम फिसड्डी क्यों?

2024-09-29
By: अनिल रघुराज
On: September 29, 2024
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

janwar aur insan

फर्क जानवर और इंसान का

2024-04-17
By: अनिल रघुराज
On: April 17, 2024
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

tan man dhan ki gati

जानें तन, मन, धन की गति

2024-04-16
By: अनिल रघुराज
On: April 16, 2024
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

aashta ki had

आस्था सही, भोलापन नहीं

2024-03-22
By: अनिल रघुराज
On: March 22, 2024
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

ichcha aur karma

इच्छा और कर्म

2024-03-21
By: अनिल रघुराज
On: March 21, 2024
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

piche mat dekho

मानवता के दुश्मन

2024-02-17
By: अनिल रघुराज
On: February 17, 2024
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

dance of the body and cosmos

डांस व ऑरकेस्ट्रा से बनते हम

2023-11-25
By: अनिल रघुराज
On: November 25, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

changing body

बदलता है खालीपन भी

2023-11-24
By: अनिल रघुराज
On: November 24, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

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निवेश – तथास्तु

  • छोटे हो चले हैं अब लम्बे निवेश के साल!
    18 Oct 2026

    हालात लगातार बदलते हैं। धारणाएं उनका पीछा करती हैं। अगर हम सच्चाई के हिसाब से धारणाएं न बदलें तो समय हमें रौंदकर आगे बढ़ जाता है। इसलिए समय के साथ या उससे आगे चलने के लिए हमें धारणाओं को लगातार अपडेट करते रहना पड़ता है। जैसे, अभी तक माना जाता है कि शेयर बाज़ार में संभावनामय कंपनी चुनकर निवेश करो और 10-15 साल भूल जाओ। इसे ही दीर्घकालिक निवेश माना जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों से […]

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क्या आप जानते हैं?

  • हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

    इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर जितने भी 69,963 किस्म के रीढ़वाले या कशेरुकी (vertebrates) जीव-जन्तु हैं, उन्होंने देखने की क्षमता वाली अपनी आंखें एक बैक्टीरिया के जीन से हासिल की है। यह सच अप्रैल 2023 में पीएनएएस (प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज) की …

अपनों से अपनी बात

  • साल में 41-112%, मिले है सिर्फ यहां!

    भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और आगे भी बढ़ेगी। लेकिन कहा जा रहा है कि इसका लाभ आम आदमी को पूरा नहीं मिलता। अमीर-गरीब की खाईं बढ़ रही है। बाज़ार को आंख मूंदकर गालियां दी जा रही हैं। लेकिन बाज़ार सचेत लोगों के लिए आय और दौलत के सृजन ही नहीं, वितरण का काम भी करता है। हमने तथास्तु सेवा इसीलिए शुरू की है ताकि अर्थव्यवस्था, खासकर कंपनियों के बढ़ने का लाभ निपट गरीबी से ऊपर रहनेवाले लोगों तक पहुंचाया जा सके। वे जिन्हें बैंक बहुत हुआ तो 9 प्रतिशत देता है, जबकि वास्तविक महंगाई की दर 10 प्रतिशत से ऊपर रहती है। वे भागकर जाते हैं सोने और रीयल एस्टेट में चले जाते हैं तो उनकी बचत लॉक हो जाती है। देश के काम नहीं आती। खुद उनके कितने काम आएगी, यह भी पक्का नहीं। जो पिछले साढ़े चार सालों से अर्थकाम से जुड़े हैं, वे हमारी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से भलीभांति वाकिफ हैं। शुरू में हम भी कच्चे थे तो बाज़ार के उस्तादों के जाल में फंस गए। गलतियां कीं। लेकिन जैसे ही समझ में आया, खटाक से उनसे किनारा कस लिया। करीब सवा साल पहले से नए सिरे से शुरू किया तो मजबूत आधार और गहन रिसर्च के साथ। उसी का नतीजा है कि हमारी सलाहें शानदार-जानदार रिटर्न दे रही हैं। पिछली बार हमने अगस्त 2013 से अगस्त 2014 तक का लेखाजोखा रखा था। अब सितंबर 2013 से सितंबर 2014 की बानगी पेश है। सितंबर 2013 में पांच रविवार थे तो पांच कंपनियां। आप नीचे की सारिणी से देख सकते हैं कि पांच में चार ने अपना (तीन से पांच साल का) लक्ष्य साल भर में ही पूरा कर लिया है, जबकि एक कंपनी 84.57 प्रतिशत रिटर्न के साथ लक्ष्य से ज़रा-सा पीछे है। तारीख कंपनी तब का भाव समय लक्ष्य 30/09/14 का भाव रिटर्न (%) 01/09/13 डॉ. रेड्डीज़ लैब 2292.90 3 साल 2815 3229.60 40.85 08/09/13 एचडीएफसी बैंक 616.20 3 साल 850 872.65 41.62 15/09/13 अतुल ऑटो 173.65 5 साल 260 367.90 111.86 22/09/13 कमिन्स इंडिया 409.25 3 साल 474 671.05 63.97 29/09/13 नवनीत एजुकेशन 53.15 3 साल 110 98.10 84.57   यहां यह भी गौर करने की बात है कि हम आमतौर पर हर महीने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉल कैप का संतुलन बनाकर चलते हैं। यह भी बताते हैं कि कहां पर एंट्री करें और आपके पास कुल एक लाख रुपए हों तो उस हफ्ते की कंपनी में कितना लगाना चाहिए, उसके कितने शेयर खरीदने चाहिए। मसलन, सितंबर 2013 में हमने तीन लार्जकैप, एक मिडकैप और एक स्मॉल कैप कंपनी आपके निवेश के लिए पेश की थी। इसमें से लार्ज कैप कंपनियों में डॉ. रेड्डीज़ लैब का शेयर लक्ष्य हासिल कर चुका है और यही नहीं, 24 सितंबर 2014 को 3356.60 रुपए पर 52 हफ्ते का शिखर पकड़ चुका है। एचडीएफसी बैंक भी लक्ष्य हासिल करने के साथ ही 30 सितंबर 2014 को 879.80 रुपए का शिखर हासिल कर चुका है। कमिन्स इंडिया भी लक्ष्य हासिल कर लेने के साथ 4 सितंबर 2014 को 720 रुपए पर 52 हफ्ते का शीर्ष छू चुका है। स्मॉल कैप की श्रेणी वाला स्टॉक अतुल ऑटो साल भर में 111.86 प्रतिशत का रिटर्न देकर लक्ष्य के काफी आगे निकल चुका है। यही नहीं, 12 सितंबर 2014 को वो 446.90 रुपए का शिखर भी चूम चुका है। बाकी बची मिडकैप कंपनी नवनीत एजुकेशन में तीन साल का लक्ष्य 110 रुपए था। उसका शेयर 10 सितंबर 2014 को 104.90 रुपए तक जाने के बाद 30 सितंबर को 2014 को 98.10 रुपए पर था, जो साल का 84.97 रिटर्न दिखाता है। आप ऊपर की सारिणी से देख सकते हैं कि 1 सितंबर 2013 से 30 सितंबर 2014 तक की अवधि में तथास्तु में बताई पांच कंपनियों ने न्यूनतम 40.85 प्रतिशत और अधिकतम 111.86 प्रतिशत रिटर्न दिया है। इसी दौरान एनएसई निफ्टी ने 5550.75 से 7964.80 तक जाकर 43.49 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स ने 18,886.13 से 26,567.99 तक पहुंचकर 40.67 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। दोस्तों! पुरानी बात फिर दोहरा रहा हूं कि मात्र 200 रुपए में अगर कोई सवा आपको बाज़ार से ज्यादा रिटर्न दिला रही है, वो भी आपको आपकी भाषा में अच्छी तरह कंपनी की जानकारी देकर तो क्या इस सेवा को आपका और आपको इस सेवा का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बढ़ रही अर्थव्यवस्था का लाभ उठाइए। यकीन मानिए कि मोदी की सरकार बस एक निमित्त मात्र है। वो रहे या कोई और आए, अगले दस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जबरदस्त प्रगति के साल होने जा रहे हैं। इस दौरान एक साल में दोगुना ही नहीं, दस साल में अपनी बचत से दस गुना दौलत बनाने के मौके बहुत सारे आएंगे। दूसरे आपको बस उल्लू बनाएंगे। केवल हम ही हैं जो पूरी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से आपके लिए निवेश के हर रविवार को शानदार मौके लेकर आते रहेंगे। तुलसीदास की चौपाई याद कीजिए – सकल पदारथ है जन मांही, कर्महीन नर पावत नाहीं। आपके हिस्से का कुछ कर्म हम कर दे रहे हैं। बाकी तो आपको ही करना पड़ेगा। इसलिए…. सोचिए। समझिए। फैसला कीजिए। तथास्तु!!!

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ट्रेडिंग – बुद्ध

  • बॉन्डों का शिकंजा अब बचतकर्ताओं पर
    22 Oct 2026

    बाज़ार से ₹16-17 लाख करोड़ का उधार लेना कोई मामूली बात नहीं। सरकार मार्च 2027 तक बाज़ार से इसमें से ₹7.86 लाख करोड़ जुटाएगी। पहले सरकार ने कब बाज़ार से लोन उठाया, पता ही नहीं चलता था। वित्त वर्ष 2011-12 तक बैंक सरकारी ऋणों का 44.2% हिस्सा सोख लेते थे जो जीडीपी का 25.1% था। तब रिजर्व बैंक ने सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) 40% बना रखा था। इसके चलते बैंकों को अपनी कुल जमा का कम से कम 40% सरकारी बॉन्डों में लगाना पड़ता था। रिजर्व बैंक ने इसे धीरे-धीरे घटाकर अप्रैल 2020 से 18% कर दिया है। इसके बाद स्थिति यह है कि वित्त वर्ष 2023-24 तक सरकारी बॉन्डों में बैंकों का निवेश घटकर 37.1% और जीडीपी का 23.8% रह गया। सरकारी बॉन्डों में म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों, पेंशन फंड व गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों वगैरह का निवेश इसी दौरान 23.6% और जीडीपी के 13.5% से बढ़कर बैंकों से ज्यादा क्रमशः 40.6% और 26.1% हो गया। वैसे तो बैंक भी जमाकर्ताओं का ही धन सरकारी बॉन्डों में लगाते थे। लेकिन उन्हें तुरत-फुरत इन्हें भुनाना नहीं होता था। अब म्यूचुअल फंड जैसी अन्य वित्तीय संस्थाओं को निवेशकों की मांग पर कभी भी बॉन्ड बेचकर निकलना पड़ता है। महंगाई बढ़ी, ब्याज बढ़ी, यील्ड बढ़ी तो बॉन्डों के दाम घटे, दबाव बढ़ा। अब गुरुवार की दशा-दिशा…

जानिए

  • ज़ीरो-सम गेम नहीं है यह
  • ईटीएफ: चलो बाजार खरीद लें
  • मायने आईपीओ ग्रेडिंग के
  • जवाब कमोडिटी बाजार के

बूझिए

  • ओपन ऑफर, बायबैक, डीलिस्टिंग
  • इश्यू मूल्य और बुक बिल्डिंग
  • गुत्थी ऋण बाजार की
  • यह कासा बला क्या है?

आज़माइए

  • मोटामोटी दस बातें शेयरों की
  • गोल्ड ईटीएफ एक, दाम अनेक
  • न करें कम एनएवी का लालच
  • फायदे म्यूचुअल फंड निवेश के

क्या आप जानते हैं?

हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर

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