भारतीय बैंकिंग उद्योग अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों के लिए पैंतरेबाजी का अड्डा बन गया लगता है। मूडीज़ ने सितंबर में देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (भारतीय स्टेट बैंक) की रेटिंग डी+ से घटाकर सी- कर दी थी। फिर बुधवार, 9 नवंबर को उसने भारतीय बैंकिंग उद्योग का नजरिया घटाकर स्थिर से नकारात्मक कर दिया। लेकिन दुनिया की दूसरी प्रमुख एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी) की 9 नवंबर को ही जारी उस रिपोर्ट पर किसी काऔरऔर भी

यूरोप के मसले ने उन सभी निवेशकों व ट्रेडरों को चरका दे दिया जो उस बहस और शॉर्ट सेलिंग करते रहे। निफ्टी 4700 से सुधरता हुआ 5350 तक आ चुका है और अब 5500 के पार जाने को तैयार है। इसके आसपास पहुंचते ही टेक्निकल एनालिसिस के हिसाब से एफआईआई खरीद की भंगिमा अपना लेंगे क्योंकि 200 डीएमए (200 दिनों के मूविंग औसत) अभी 5406 है और बाजार के इसके ऊपर जाने पर आप शॉर्ट नहीं रहऔरऔर भी

अमेरिकी बाजार का सूचकांक डाउ जोंस 1.53 फीसदी ऊपर। लेकिन यूरोप के संकट ने एशियाई बाजारों को दबा डाला। भारत भी दबाव में। ऊपर से खाद्य मुद्रास्फीति नौ महीनों के शिखर 12.21 फीसदी पर। इसने निफ्टी पर चोट जरूर की। लेकिन तेजडियों के उत्साह पर आंच नहीं आई और वे निफ्टी को 5500 के ऊपर ले जाने में लगे हुए हैं। यू तो मंदड़ियों का मनोविज्ञान बेचते ही बेचते चले जाने का है। लेकिन अगर समर्थन स्तरऔरऔर भी

बाजार चूंकि निफ्टी में 200 दिनों के मूविंग औसत (डीएमए) 5408 को नहीं पार कर सका, इसलिए थोड़ा दम मारना लाजिमी था। इसी के अनुरूप बाजार सुबह 5310.85 पर पहुंचने के बाद जो गिरना शुरू हुआ तो यह गिरता ही चला गया। अंत में 1.37 फीसदी की गिरावट के साथ 5253.75 पर बंद हुआ है। यह और कुछ नहीं, बल्कि बाजार का खुद को जमाने का उपक्रम है। इस प्रक्रिया में निफ्टी बहुत नीचे गया तो फिरऔरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था या शेयर बाजार की हालत में कोई खास मौलिक बदलाव नहीं आया है। फिर भी बाजार की दशा-दिशा दर्शानेवाला सेंसेक्स 15,900 के निचले स्तर से उठकर 17,805 पर जा पहुंचा। अभी की स्थितियों में यह वाकई कमाल की बात है। यूरोप की हालत पर खूब मगजमारी हो रही है। वहां के ऋण-संकट को वैश्विक बाजार की कमजोरी का खास कारण बताया जा रहा है। इसलिए यूरोप की संकट-मुक्ति की हल्की-सी आभा ने पूरे माहौलऔरऔर भी

भारतीय शेयर बाजार का पूंजीकरण दुनिया के शेयर बाजार का करीब 3% है। हमारे सबसे बड़े बैंक एसबीआई का लाभ चीन के सबसे बड़े बैंक का महज 10% है। निजी क्षेत्र में हमारी तेल व गैस की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज इसी क्षेत्र की फ्रांसीसी कंपनी टोटल के एक तिहाई आकार की है। ऊपर से हमारी 100 सबसे बड़ी कंपनियों के लाभ में 41% हिस्सा सरकारी कंपनियों, 41% हिस्सा परिवार नियंत्रित कंपनियों और बाकी 18% हिस्साऔरऔर भी

इक्कीस साल एक महीने पहले सितंबर 1990 से देश में बैंकों की ब्याज दरों को बाजार शक्तियों या आपसी होड़ के हवाले छोड़ देने का जो सिलसिला हुआ था, वह शुक्रवार 25 अक्टूबर 2011 को रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की दूसरी तिमाही समीक्षा के साथ पूरा हो गया। रिजर्व बैंक के गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव ने ऐलान किया, “अब वक्त आ गया है कि आगे बढ़कर रुपए में ब्याज दर को विनियंत्रित करने की प्रकिया पूरी करऔरऔर भी

इस सेटलमेंट को खत्म होने में बस दो दिन बचे हैं और तेजड़ियों के लिए नए नवंबर के सेटलमेंट की जबरदस्त शुरुआत के लिए शुक्रवार से बेहतर कोई दूसरा दिन हो नहीं सकता। इधर हर बढ़त पर उनका सामना शॉर्ट सौदों से हो रहा है जो उनके लिए दिवाली गिफ्ट साबित हो रहे हैं। अगर सेटलमेंट के अंत में बाजार बढ़कर, मान लीजिए 5250 पर बंद होता है तो सारी कॉल मनी उनकी जेब में चली जाएगीऔरऔर भी

सरकार चालू वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान छह सरकारी बैंकों को 20,000 करोड़ रुपए की पूंजी मुहैया कराएगी। वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवाओं के सचिव डी के मित्तल का कहना है कि, “वित्त सचिव की अध्यक्षता में गठित एक समिति बैंकों को वित्तीय मदद की जरूरत का आकलन कर रही है। यह समिति इस महीने के अंत तक अपनी रिपोर्ट दे देगी। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और रिजर्व बैंक के साथ विचार-विमर्श के बाद हम 15 नवंबरऔरऔर भी

एक दिन में सेंसेक्स के 422 अंक और निफ्टी के 125 अंक बढ़ने के बाद बाजार का थोड़ा गम खाना लाजिमी था। फिर भी खुला तेजी के साथ तो बाजार चलानेवालों को थोड़ी मुनाफावसूली का मौका मिल गया। हालांकि सेंसेक्स 74.47 अंक और निफ्टी 21.55 अंक गिरकर बंद हुआ है। लेकिन इससे यह नहीं मान लेना चाहिए कि बाजार का रुख फिर उलट गया है। कल बाजार के बादशाह रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) का दिन है। वह सितंबरऔरऔर भी