सरकार, दूसरी छमाही के लिए बजट में जितना तय है, उससे कम उधार बाजार से जुटाएगी। यह कहना है वित्त सचिव अशोक चावला का। उनके मुताबिक अक्टूबर से मार्च के बीच सरकारी बांडों के जरिए 1.70 लाख करोड़ रुपए का कर्ज जुटाया जाना था। लेकिन अब यह रकम 1.63 लाख करोड़ रुपए ही रहेगी। इस तरह अब बाजार पर 7000 करोड़ रुपए के सरकारी बांडों का बोझ कम हो जाएगा। हालांकि यह अपेक्षाकृत इतनी छोटी रकम हैऔरऔर भी

किसी गाड़ी के लिए शॉक एब्जॉर्वर जो काम करता है, वैसी ही भूमिका किसी कर्जदार के लिए मोर्गेज इंश्योरेंस की है। आपने यदि किसी प्रकार का कर्ज लिया है तो मोर्गेज इंश्योरेंस काफी उपयोगी हो सकता है। खास कर उस स्थिति में और ज्यादा, जब कर्ज लेने के बाद आपकी असामयिक मौत हो जाती है। तब मोर्गेज इंश्योरेंस ही आपके परिवार की चिंताएं दूर करता है। कैसे काम करता है: मान लीजिए कि आपने 50 लाख रुपएऔरऔर भी

स्टॉक एक्सचेंजों के स्वामित्व का आधार व्यापक होना चाहिए। उसमें विविधता होनी चाहिए ताकि इन व्यवस्थागत रूप से महत्वपूर्ण संस्थानों को अच्छी तरह चलाया जा सके। यह राय है वित्तीय क्षेत्र की दो शीर्ष नियामक संस्थाओं – भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय प्रतिभूति व विनिमय बोर्ड (सेबी) की। स्टॉक एक्सचेंज पूंजी बाजार का हिस्सा हैं और उन पर सीधा नियंत्रण सेबी का है। इसलिए बैंकिंग नियामक का उनके स्वामित्व पर दो-टूक राय रखना काफी मायने रखता है।औरऔर भी

दुनिया के सबसे बड़े निवेशक जॉर्ज सोरोस का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार में चल रही तेजी में अगर कोई रुकावट है तो वह है मुद्रास्फीति का मंडराता खतरा। रिजर्व बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाकर इसी खतरे का कम करने की कोशिश की है। मौद्रिक नीति की दूसरी त्रैमासिक समीक्षा के बीच में रिजर्व बैंक ने गुरुवार को रेपो दर 0.25 फीसदी बढ़ाकर 6 फीसदी और रिवर्स रेपो दर को 0.50 फीसदी बढ़ाकर तत्काल प्रभाव सेऔरऔर भी

देश के सारे गांवों को साल 2015 तक मोबाइल बैंकों से जोड़ देने की योजना है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के सी चक्रबर्ती के मुताबिक अगले पांच सालों में हर गांववासी को वित्तीय सेवाओं के दायरे में शामिल कर लिया जाएगा। उन्होंने रविवार को वाराणसी में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। बता दें कि अभी देश की वयस्क आबादी के केवल 40 फीसदी हिस्से तक बैंकिंग सेवाएं पहुंच सकी हैं। श्री चक्रबर्ती नेऔरऔर भी

इस समय देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक ओ पी भट्ट का सालाना पैकेज 26.5 लाख रुपए का है। भट्ट का यह पैकेज सरकारी बैंक के प्रमुख होने के नाते है। दूसरी तरफ निजी क्षेत्र के दो बड़े बैंकों में से आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक चंदा कोचर का सालाना पैकेज 2.08 करोड़ रुपए और एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक आदित्य पुरी का सालाना पैकेज 3.40 करोड़ रुपए का है। मजे कीऔरऔर भी

स्विटजरलैंड के बासेल शहर में जब दुनिया भर के बैंकिंग नियामक नए मानक को लेकर माथापच्ची कर रहे हैं तब हमारे बैंकिंग नियामक भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर डॉ. दुव्वरी सुब्बाराव का मानना है कि बासेल-III मानकों को अपनाने में भारतीय बैंकों को खास कोई मुश्किल नहीं होगी क्योंकि 30 जून 2010 तक ही वे 13.4 फीसदी का जोखिम-भारित आस्ति पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीआरएआर) हासिल कर चुके हैं, जिसमें टियर-1 पूंजी का हिस्सा 9.3 फीसदी है। डॉ.औरऔर भी

सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश बढ़ रहा है। वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह लगभग 18 फीसदी बढ़कर 21,71,022 करोड़ रुपए हो गया है। खासकर यह बढ़त सरकारी की दिनांकित प्रतिभूतियों में होनेवाले सौदों के चलते हुई है जिसमें निवेश लगभग 90 फीसदी बढ़ गया है। नोट करने की बात यह है कि सरकारी प्रतिभूतियों में बैंक या म्यूचुअल फंड व बीमा कंपनियों जैसी वित्तीय संस्थाएं हीऔरऔर भी

रुपया शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के शब्द ‘रौप्य’ से हुई है, जिसका अर्थ होता है, चांदी। भारतीय रुपये को हिंदी में रुपया, गुजराती में रुपयो, तेलगू व कन्नड़ में रूपई, तमिल में रुबाई और संस्कृत में रुप्यकम कहा जाता है। लेकिन बंगाली व असमिया में टका/टॉका और ओड़िया में टंका कहा जाता है। भारत की उन गिने-चुने देशों में शुमार है जिसने सबसे पहले सिक्के जारी किए। परिणामत: इसके इतिहास में अनेक मौद्रिक इकाइयों (मुद्राओं) काऔरऔर भी

वित्त मंत्री ने इस साल 26 फरवरी को अपने बजट भाषण में नए बैंकों को लाइसेंस देने की बात कही थी, तभी से बाजार में कयास लगाए जाने लगे थे कि किस-किस कंपनी को बैंकिंग लाइसेंस मिल सकता है। इसके बाद रिजर्व बैंक ने 20 अप्रैल को सालाना मौद्रिक नीति में कहा कि वह जुलाई के अंत तक इस बारे में दिशानिर्देश जारी कर देगा। लेकिन जुलाई के बीत जाने के दस दिन बाद रिजर्व बैंक नेऔरऔर भी