बजट सत्र शुरू हो रहा है। इसमें ऐसे सूत्र आने जा रहे हैं जो कई महीनों से शेयर बाजार को परेशान करनेवाली चिंताओं और समस्याओं का समाधान निकालने का सबब बनेंगे। बाकी क्या कहें? एफआईआई और उनके एजेंटों ने हमेशा की तरह इस बार भी आम निवेशकों को गच्चा दिया। बाजार (निफ्टी) जब 5200 पर पहुंच गया तो उन्होंने हल्ला मचवा दिया कि अभी इसमें 10-15 फीसदी और गिरावट आनी है। निवेशक घबराकर बेचकर निकलने लगे इसऔरऔर भी

बजट में नए आर्थिक सुधारों के बारे में प्रधानमंत्री के दावे ने बाजार पर अपना असर दिखा दिया। यह वो मूलाधार है जिस पर सारे देश और निवेशक समुदाय को पूरा यकीन होना चाहिए। इस हकीकत के मद्देनजर बाजार को पहले तो गिरकर 5200 तक जाना ही नहीं चाहिए था। लेकिन ऐसा हुआ तो उसकी वजह चालबाजी या जोड़तोड़ है और, बाजार में जोड़-तोड़ की कोई काट तो है नहीं। मंदड़ियों का कार्टेल अकेले दम पर बाजारऔरऔर भी

सरकार ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और एंट्रिक्स व निजी फर्म देवास मल्टीमीडिया के बीच हुए एस-बैंड स्पेक्ट्रम के विवादास्पद करार को रद्द कर दिया है। आज, गुरुवार को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक में यह फैसला लिया गया। यह फैसला अंतरिक्ष आयोग की संस्तुति के आधार पर किया गया है। गुरुवार को सीसीएस की बैठक खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई। प्रधानमंत्री ने कल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संपादकों से साथऔरऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दावा किया है कि सरकार ने आर्थिक नीतियों में सुधार का रास्ता नहीं छोड़ा है और 2011-12 के बजट में और सुधारों की घोषणा की जाएगी। हालांकि उन्होंने महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में पेश किए जाने में देरी के लिये विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया। प्रधानमंत्री ने इलेक्ट्रानिक मीडिया के संपादकों के साथ बातचीत में कहा, ‘‘नहीं, हमने सुधार नहीं छोड़ा है। मुझे उम्मीद है कि आगामी बजट में हम सुधार एजेंडे कीऔरऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संपादकों के साथ हुई प्रेसवार्ता में हाल में उठी हर चिंता और मुद्दों पर बेबाक राय दी है। उनकी बातों से संकेत मिलता है कि आनेवाला बजट कठोर होगा, पर लोक-लुभावन उपायों के साथ। बजट कठोर होगा प्रशासन की कमियों, कालेधन और मुद्रास्फीति जैसी समस्याओं पर, जबकि वह नरम होगा टैक्स के मोर्चे पर ताकि आम आदमी के पास मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए ज्यादा आमदनी बचऔरऔर भी

शेयर बाजार और क्रिकेट के मैच ज्यादातर हमेशा फिक्स होते हैं। हालांकि छोटी-मोटी अवधि में अनजाने कारकों के चलते बाजार अक्सर चौंकाता भी है। यह बात मनगढ़ंत नहीं, बल्कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। 2006 और 2007 में देश में मुद्रास्फीति की स्थिति इससे भी खराब थी। फिर भी 2007 में बाजार ने 21,300 का नया शिखर बनाया। इसलिए अगर आज विद्वान लोग मुद्रास्फीति और ब्याज दरें बढ़ने की चिंता को भारतीय इक्विटी बाजार की गिरावट कीऔरऔर भी

मुद्रास्फीति का मुद्दा सुलझ गया। मिस्र का गुबार थमता नजर आ रहा है। अब बचा भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का मसला तो वह भी 31 मार्च 2011 तक किनारे लग जाएगा क्योंकि तब तक इस पर एफआईआर दाखिल हो चुकी होगी। जहां तक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों और संबंधित लोगों की गिरफ्तारी की बात है तो बाजार को इसकी परवाह क्यों करनी चाहिए? यह जानामाना सच है कि कॉरपोरेट क्षेत्र के बहुत से लोगों की मिलीभगत राजनेताओं केऔरऔर भी

शेयर बाजार को सायास गिराने में लगे लोग भले ही यह बात न मानें। लेकिन सच यही है कि अर्थव्यवस्था से सकारात्मक संकेत आने शुरू हो गए हैं। सबसे बड़ा संकेत यह है कि खाद्य वस्तुओं के थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 29 जनवरी को समाप्त सप्ताह में करीब चार फीसदी की भारी गिरावट के साथ 13.07 फीसदी पर आ गयी है। ठीक इससे पहले के सप्ताह यह 17.05 फीसदी थी। सात हफ्ते में खाद्यऔरऔर भी

विभिन्न घोटालों को लेकर सरकार पर चारों ओर से हो रहे हमलों के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भ्रष्टाचार पर जोरदार प्रहार करते हुए कहा है कि यह सुशासन की जड़ों को खोखला करता है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि धूमिल करता है और अपने लोगों के आगे हमें शर्मिंदा करता है। शुक्रवार को दिल्ली में राज्यों के मुख्य सचिवों की वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यह एक चुनौती है जिसका मुकाबला हमेंऔरऔर भी

महंगाई खासकर खाद्य मुद्रास्फीति ने सरकार को परेशान करके रख दिया है। इतना परेशान कि वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी झल्लाकर बोले कि मुद्रास्फीति को वश में करने के उपाय किए गए हैं, लेकिन सरकार के पास कोई जादुई चिराग नहीं है कि वह इसे फौरन नीचे ले आए। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसकी जिम्मेदारी केंद्र से हटाकर राज्यों पर डालने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि महंगाई को काबू में रखने के लिए राज्योंऔरऔर भी