प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट किया है कि सूचना अधिकार कानून में कोई ढील नहीं दी जाएगी। सरकार पारदर्शिता के लिए सूचना के अधिकार को और अधिक कारगर हथियार बनाना चाहती है लेकिन वह कुछ चिंताओं पर ध्यान देने के लिहाज से उसकी गहन समीक्षा भी करना चाहती है। गौरतलब है कि सरकारी महकमे के कुछ लोग और केंद्रीय मंत्री तक इस पारदर्शिता कानून में संशोधन की मांग करते आ रहे हैं। उनका मानना है कि यहऔरऔर भी

अर्थव्यवस्था के बढ़ने की दर के अनुमानों पर लगता है, जैसे कोई जंग छिड़ी हुई है। उधर अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स की भारतीय सब्सिडियरी क्रिसिल ने इस साल देश के आर्थिक विकास दर का अनुमान 8 फीसदी से घटाकर 7.6 फीसदी कर दिया, इधर सीधे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आश्वस्त करना पड़ा कि दुनिया में आर्थिक सुस्ती के बावजूद हम इस साल करीब आठ फीसदी आर्थिक विकास दर हासिल कर लेंगे। बता दें कि अगस्तऔरऔर भी

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो वे सिर्फ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात के बाद ही 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मुद्दे पर वित्त मंत्रालय के नोट पर कुछ बोलेंगे। वित्त मंत्री कल बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलनेवाले हैं। प्रणब ने मंगलवार को कोलकाता में अपने आवास पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं वही दोहरा रहा हूं जो मैंने न्यूयॉर्क और दिल्ली में कहा। यदि आरटीआई आवेदन के जरिए हासिल किएऔरऔर भी

तिहाड़ जेल में बंद पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने सोमवार को दिल्ली की एक अदालत में मांग की कि पूर्व वित्त मंत्री और वर्तमान गृह मंत्री पी चिदंबरम को 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में बुलाया जाना चाहिए और उनसे गवाह के तौर पर पूछताछ की जानी चाहिए। राजा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील कुमार ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश न्यायमूर्ति ओ पी सैनी से कहा कि एजेंसी को कैबिनेट की एक बैठक के संदर्भऔरऔर भी

टीम अण्णा देश में जन आंदोलन की नई तैयारी में जुट गई है। इस सिलसिले में अण्णा हज़ारे के गांव रालेगण सिद्धि में उनका दो दिन का जमावड़ा शनिवार से शुरू हो गया। पहले दिन की बैठक में तय हुआ है कि भूमि अधिग्रहण, चुनाव सुधार, जन प्रतिनिधियों को वापस बुलाने और उन्हें खारिज करने के अधिकार समेत सांसदों के प्रदर्शन का लेखा-जोखा कराने के संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखेंगे। भूमि अधिग्रहण जैसे संवेदनशीलऔरऔर भी

अण्णा हज़ारे के नौ दिनों के अनशन ने कांग्रेस ही नहीं, सभी राजनीतिक पार्टियों की नींद हराम कर दी है। उन्होंने बुधवार को हुई सर्वदलीय बैठक में अण्णा से अनशन खत्म करने की अपील तो की है। लेकिन उन्हें न तो टीम अण्णा की शर्तें मंजूर हैं और न ही जन लोकपाल बिल। यही वजह है कि राजधानी दिल्ली में सात रेस कोर्स स्थित प्रधानमंत्री आवास पर हुई सभी दलों की बैठक बेनतीजा साबित हुई। असल मेंऔरऔर भी

सरकार आखिरकार अण्णा हज़ारे के नेतृत्व में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन के आगे झुक गई लगती है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चिट्ठी के बाद टीम अण्णा के साथ सरकार की बातचीत की राह खुल गई। लेकिन सरकार यहां भी अपनी चालाकी से बाज नहीं आई है। वह जन लोकपाल विधेयक को भी संसद की स्थाई समिति को सौपने को तैयार है। लेकिन स्थाई समिति के लिए अन्य तमाम सुझावों की तरह यह भी एक सुझावऔरऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश में हर तरफ फैले भ्रष्टाचार को आर्थिक उदारीकरण व सुधारों का नतीजा मानने के बजाय नैतिक ताने-बाने से जुड़ी समस्या करार दिया है। लेकिन आईआईटी खड़गपुर के छात्रों ने उनके हाथ से डिग्री लेने से इनकार कर खुद उनकी नैतिकता पर सवालिया निशान लगा दिया है। प्रधानमंत्री ने सोमवार को कोलकाता में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार आम आदमी के रोजमर्रा केऔरऔर भी

भारत का लोक करवट बदल रहा है। लोकतंत्र नई शक्ल में ढलने को बेताब है। उत्तर से लेकर दक्षिण और पूरब से लेकर पश्चिम तक लोग एक भाषा में बोल रहे हैं – अण्णा तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं। सच्चे लोकतंत्र की ख्वाहिश इंडिया गेट से लेकर आजाद मैदान और सड़कों व गली-कूचों तक नारे बनकर निकल रही है। नौजवान शेर की तरह दहाड़ रहे हैं, जबकि सरकार भीगी बिल्ली या बकरी बनी मिमियाती नजरऔरऔर भी

बाजार में पहले से छाए पस्ती के आलम को और हवा तब मिल गई, जब अमेरिकी ऋण संकट के समाधान के बावजूद एशिया के बाजार गिर गए। मंदड़ियों का खेमा मान बैठा है कि अमेरिका में हुआ राजनीतिक समझौता तात्कालिक समाधान है। इसलिए इस पर चहकने की कोई जरूरत नहीं है। बाजार फिर से 5500 के नीचे चला गया तो उन्होंने फिर से बिक्री का बटन दबा दिया है। फिर वही बात उठा ली है कि अबऔरऔर भी