जहां हाथ को हाथ सुझाई नहीं देता, वैसे कुहासे व अंधेरे से घिरे भविष्य में विचार हमारे लिए जुगनू का काम करते हैं। वे खटाक से अपनी टॉर्च जलाकर हमें कम से कम कुछ दूर तक का रास्ता दिखा देते हैं।और भीऔर भी

चलने पर चौराहे नहीं, अठराहे भी मिल सकते हैं। लेकिन चलने से ही राहें खुलती हैं। चलिए तो समुद्र भी दोफाड़ होकर आपकी राह संवार देता है। तो, काहे रुके हो भाई! चलो तो सही। मंजिल आपकी बाट जोह रही है।और भीऔर भी