लोकसभा नतीजों से साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सारा तिलिस्म टूट गया है और केंद्र में बैसाखी पर टिकी सरकार बनने जा रही है। भाजपा को अपने दम 240 सीट ही मिली है। टीडीपी के 16 और जेडी-यू के 12 सांसदों को साथ लेकर ही नरेंद्र मोदी फिर से सरकार बना पाएंगे। अगर ये दोनों दल अपने 28 सांसदों को लेकर 234 सीटों वाले इंडिया गठबंधन के पाले में चले गए तो वो भी जोड़तोड़औरऔर भी

सोमवार को निफ्टी 3.25% उछला तो मंगलवार को 5.93% टूट गया। एक्जिट-पोल और हवाबाज़ी से बनाई गई बनावटी तेज़ी अंत में फायदे से कहीं ज्यादा नुकसान करा गई। सोमवार को जो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) घबराकर शॉर्ट-कवरिग को मज़बूर हुए थे, हो सकता है कि उन्होंने मंगलवार को शॉर्ट-सेलिंग से सारे नुकसान की भरपाई कर ली हो। लेकिन जो रिटेल ट्रेडर व निवेशक हवाबाज़ी में फंस गए, वे अपने नुकसान की भरपाई नहीं कर सकते। इसीलिए कहाऔरऔर भी

लोकसभा चुनावों के नतीजे दोपहर बाद तक साफ हो जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह दोनों ने दावा किया है कि आज हमारा शेयर बाज़ार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाएगा। लेकिन अगर मोदीराज वापस नहीं आया और इंडिया गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिल गया तो बाज़ार धड़ाम भी हो सकता है। याद कीजिए, बीस साल पहले 2004 में कमोबेश ऐसी ही स्थिति थी। जीडीपी लगभग 8% बढ़ा था। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की लोकप्रियता चरमऔरऔर भी

एक्ज़िट पोल को सही मानें तो मोदी सरकार फिर सत्ता में आने जा रही है। वैसे, असली नतीजे कल मतगणना के बाद ही सामने आएंगे। जो भी हो, मोदी सरकार रहे या इंडिया गठबंधन की सरकार आ जाए, देश की अर्थव्यवस्था को कोई फर्क नहीं पड़नेवाला। आर्थिक उदारवाद का जो सिलसिला 33 साल पहले 1991 में शुरू हुआ था, वह बदस्तूर जारी रहेगा। हां, इतना ज़रूर होगा कि मोदी सरकार अर्थव्यवस्था को लेकर जो झांकी बनाती रहीऔरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था हो, चुनाव हों या शेयर बाज़ार, सत्ता और धंधे के सूत्र ने इन सबको जोड़ रखा है। सत्ता की आहट से ये सभी हिल जाते हैं। कल 18वीं लोकसभा के अंतिम चरण का मतदान है। फिर शाम को एक्जिट-पोल और मंगलवार को अंतिम नतीजे। इससे पहले आज आखिरी ट्रेडिंग दिन है तो शेयर बाज़ार में सनसनी मची हुई है। अभी दो दिन पहले अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी एस एंड पी ग्लोबल ने दस साल बादऔरऔर भी

साल 2009 के आम चुनावों में कांग्रेस को 206 और भाजपा को 116 सीटे मिली थीं। शनिवार, 16 मई को नतीजों की घोषणा के बाद सोमवार, 18 मई को शेयर बाजार खुला तो मनमोहन सरकार के दोबारा सत्ता में आने की खुशी में बल्लियों उछल गया। उस दिन निफ्टी 17.74% और सेंसेक्स 17.34% बढ़कर बंद हुआ। क्या इस बार मंगलवार, 4 जून को नतीजों की घोषणा के बाद मोदी सरकार तीसरी बार सत्ता में आई तो बाज़ारऔरऔर भी

देश में जब भी लोकसभा चुनाव होते हैं तो उनके नतीजों को लेकर शेयर बाज़ार की धुकधुकी बढ़ जाती है। पिछले चार चुनावों पर नज़र डालें तो इस दौरान बाज़ार में उतार-चढ़ाव का आना बड़ा स्वाभाविक है। इस बार 19 अप्रैल से 1 जून तक सात चरणों में मतदान हो रहा है। इस दौरान 18 अप्रैल से कल 28 मई तक निफ्टी 4.06% और सेंसेक्स 3.70% बढ़ा है। 4 जून को नतीजे घोषित तक अगले पांच दिनोंऔरऔर भी

शेयर बाज़ार को न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बार-बार किए जा रहे 400 पार के दावे पर यकीन है और न ही गृहमंत्री अमित शाह की इस गणना पर कि भाजपा छह चरण में 300-310 सीटें जीत चुकी है, जबकि सातवे व अंतिम चरण में 57 सीटों पर वोटिंग अभी होनी है। बाज़ार में छाई अनिश्चितता 1 जून को अंतिम चरण के मतदान और शाम को एक्जिट पोल के नतीजों से साथ शायद खत्म या थोड़ीऔरऔर भी

सेंसेक्स व निफ्टी ऐतिहासिक शिखर पर। सीधा मतलब कि शेयर बाज़ार में लालच चरम पर है। लेकिन खास मतलब टेढ़ा है। चालू वित्त वर्ष 2024-25 के पहले दिन से ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) बेचे जा रहे हैं। उन्होंने कैश सेगमेंट से 1 अप्रैल से 24 मई के बीच स्टॉक एक्सचेंज द्वारा जारी अनंतिम आंकडों के मुताबिक शुद्ध रूप से 70,152 करोड़ रुपए निकाले हैं। बीते हफ्ते उन्होंने 1165.54 करोड़ रुपए की जो शुद्ध खरीद की, वोऔरऔर भी

सरकार में बैठे लोग साफ जानते है कि किसे लूटना और किसे छोड़ना है। हालांकि वे व्यापक अवाम के वोटों से चुनकर ही सरकार में आ सकते हैं तो खुद को हमेशा जनता का सबसे बड़ा हितैषी दिखाते रहते हैं। कितनी विचित्र बात है कि देश और जनता की बात करनेवाली मोदी सरकार सबसे ज्यादा धन देश की संस्थाओं और टैक्स जनता से वसूल रही है। रिजर्व बैंक ने 2017-18 से 2022-23 तक के छह साल मेंऔरऔर भी