जिस पश्चिग बंगाल में ममता बनर्जी मां, माटी, मानुष के नारे पर सत्तासीन हुई हैं, उसी के एक इलाके की माटी हजारों मानुषों के लिए श्राप बन गई है। सुंदरवन के गोसाबा में हजारों किसानों के लिए आने वाला मानसून बारिश की बूंदें भले ही ले आए, लेकिन खारी धरती की फसलें तब भी हरी नहीं होंगी। दो साल पहले आए आइला चक्रवात से खारी हुई मिट्टी का अभिशाप झेलने को विवश हैं ये किसान। एक ओरऔरऔर भी

मानसून की सही व अच्छी शुरूआत, लेकिन आर्थिक विकास दर में कमी, कंपनियों के लाभार्जन का सिकुड़ना और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बैंकों के ऋण-प्रवाह में कमी। यह सब ऐसी बातें हैं जिनके सम्मिलित प्रभाव से हो सकता है कि रिजर्व बैंक अब ब्याज दरों को बढ़ाने का सिलसिला रोक दे। हालांकि चीन सीआरआर (केंद्रीय बैंक के पास बैंकों द्वारा अनिवार्य रूप से रखा जानेवाला कैश) में एक और वृद्धि करनेवाला है। लेकिन भारत में ब्याज दर कीऔरऔर भी

बाजार उठने की पुरजोर कोशिश करता रहा। दो बजे तक मंदड़िए हावी रहे। लेकिन उसके बाद तेजड़िए इसे आगे ले जाने में कामयाब रहे। उन्होंने लांग पोजिशन बना रखी है जबकि दूसरे कारोबारी शॉर्ट हुए पड़े हैं। इसलिए यह बड़ी बात है कि बाजार अंत में बढ़त लेकर बंद हुआ है। निफ्टी में 0.28 फीसदी तो सेंसेक्स में 0.24 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पूरे हफ्ते की दशा-दिशा तय हो सकती है। आज की बढ़तऔरऔर भी

बाजार पलटकर उठा। सुबह-सुबह सेंसेक्स 18,672.65 और निफ्टी 5604.95 तक चला गया। निफ्टी का यूं 5600 के स्तर को पार करना बड़ी बात थी। लेकिन दोपहर बारह बजे के बाद बाजार अपनी बढ़त को बनाए नहीं रख। माना जा रहा था कि निफ्टी के 5580 के ऊपर पहुंचते ही टेक्निकल एनालिस्ट और बाजार के पंटर भाई लोग लांग होने या खरीद की भंगिमा अपनाने जा रहे हैं। लेकिन शर्त यही है कि निफ्टी को इससे ऊपर बंदऔरऔर भी

बाजार में निराशावादी अब भी मंदड़ियों की पताका लहरा रहे हैं। हर बढ़त का इस्तेमाल नए शॉर्ट सौदों के लिए किया जा रहा है। मुझे पक्का नहीं है कि एफआईआई आगे क्या करने जा रहे हैं क्योंकि वे विशुद्ध ट्रेडर बन चुके हैं और ऑप्शन प्रणाली के जरिए ट्रेडिंग के लिए अल्गोरिथम का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि उन्हें आखिरकार इसमें नुकसान ही उठाना पड़ेगा क्योंकि भारतीय बाजार में वो गहराई व विस्तार नहीं है जहां अल्गोरिथमऔरऔर भी

देश के मुख्य सांख्यिकीविद् टी सी ए अनंत के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें देश की आर्थिक विकास दर को प्रभावित कर सकती हैं और चालू वित्त वर्ष में यह 8.5 फीसदी रह सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मानसून सामान्य रहने की स्थिति में अगस्त-सितंबर तक सकल मुद्रास्फीति की दर आठ फीसदी के आंकड़े से नीचे आ जाएगी। प्रमुख उद्योग संगठन फिक्की के एक समारोह के दौरान अनंत ने कहा, ‘‘तेल कीऔरऔर भी

किसी कंपनी के होने का मूल मकसद होता है नोट बनाना और कंपनी को स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट कराने का मकसद होता है, उसके स्वामित्व को जनता में बिखेर कर पूंजी की सुलभता व लाभ सुनिश्चित करना और कमाए गए लाभ को लाभांश या अन्य तरीकों से अपने शेयरधारकों तक पहुंचाना। अगर कोई लिस्टेड कंपनी लाभ नहीं कमा रही है तो उसके शेयरों में मूल्य खोजना खुद को धोखे में रखना या भयंकर रिस्क लेना है। किसीऔरऔर भी

चुनाव गरज-बरस कर चले गए। कंपनियों के नतीजों का मौसम भी बीत चला। अब सारे बाजार की निगाहें मानसून की घटाओं पर लग गई हैं। मौसम विभाग की मानें तो दक्षिणी-पश्चिमी मानसून 31 मई को केरल के तट पर समय से एक दिन पहले दस्तक दे देगा। अभी तक का अनुमान यही है कि मानसून अच्छा रहेगा। मानसून के अच्छे रहने से कृषि उत्पादन अच्छा रहेगा। इससे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के विकास को मदद मिलेगी। लेकिनऔरऔर भी

मौसम विभाग ने इस साल सामान्य मानसून रहने की भविष्यवाणी की है। मानसून की बारिश दीर्घावधि औसत की 98 फीसदी तक रह सकती है। हालांकि मध्य अप्रैल तक मौसम में नमी बने रहना और तापमान का नहीं बढ़ना देश में समय पर मानसून के आने में कुछ बाधा डाल सकता है। एक संवाददाता सम्मेलन में मानसून में बाधा उत्पन्न होने के बारे में पूछे जाने पर मौसम विभाग के महानिदेशक अजीत त्यागी ने कहा, ‘‘अभी इस विषयऔरऔर भी

मानसून की समाप्ति और खरीफ फसलों की आमद शुरू होने के बाद नवंबर के पहले हफ्ते में खाद्य मुद्रास्फीति दो फीसदी घटकर तीन माह के निचले स्तर 10.30 फीसदी पर आ गई। मुद्रास्फीति में आई इस नरमी से यह उम्मीद बन रही है कि जल्दी ही यह दस फीसदी से नीचे आ जाएगी। बारिश खत्म होने के बाद देश भर की मंडियों में खरीफ फसलों की आवक बढ़ने से खाद्य मुद्रास्फीति में लगातार पांचवें सप्ताह नरमी देखनेऔरऔर भी