मारुति सुजुकी में जून से लेकर अब तक करीब 60 दिन तक चली हड़ताल से हरियाणा सरकार को 350 करोड़ रुपए की एक्साइज ड्यूटी और 35 करोड़ के सेल्स टैक्स का नुकसान हो चुका है। खुद मारुति को करीब 1540 करोड़ रुपए की चपत लगी है। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि मारुति प्रबंधन कमर्चारियों की जिस यूनियन को मान्यता देता है, उसमें पिछले 11 सालों से गुप्त मतदान के जरिए कोई चुनाव नहीं हुए हैं।औरऔर भी

रीको ऑटो इंडस्ट्रीज दोपहिया से लेकर चार-पहिया वाहनों के कंपोनेंट बनानेवाली बड़ी कंपनी है। कितनी बड़ी, इसका अंदाजा कंपनी के धारुहेड़ा, मानेसर व गुड़गांव के संयंत्रों को देखकर लगाया जा सकता है। हीरो मोटोकॉर्प से लेकर मारुति तक की बड़ी सप्लायर है। आज से नहीं, करीब पच्चीस सालों से। लेकिन 2006 से ही उसके सितारे गर्दिश में हैं। पहले मजदूरों की 56 दिन लंबी हड़ताल हुई। फिर दुनिया के वित्तीय संकट ने भारत को आर्थिक सुस्ती मेंऔरऔर भी