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निफ्टी की दशा-दिशा: 18 सितंबर 2026 शुक्रवार, शाम 3.30 बजे अंतिम रुख↑

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journey (Page 2)

bachpan se pachpan

बचपन से पचपन

2025-03-21
By: अनिल रघुराज
On: March 21, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

andar ki yatra

बाहर का ज्ञान, अंदर की यात्रा

2025-03-04
By: अनिल रघुराज
On: March 4, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

gyan ki anant yatra

ज्ञान की अनंत यात्रा

2024-07-17
By: अनिल रघुराज
On: July 17, 2024
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

yatra bahar ki safar andar ka

बाहर की यात्रा, अंदर का सफर

2024-05-28
By: अनिल रघुराज
On: May 28, 2024
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

uncertainty welcom

अनिश्चितता है तो यात्रा है

2024-01-03
By: अनिल रघुराज
On: January 3, 2024
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

pravaah flow

प्रवाह हैं विचार

2023-12-21
By: अनिल रघुराज
On: December 21, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

jeevan apratim

हर जीवन अप्रतिम

2023-12-20
By: अनिल रघुराज
On: December 20, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

badale gene

माहौल से बदल जाए जीन

2023-10-16
By: अनिल रघुराज
On: October 16, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

adaptations

ढलना, ढलते जाना

2023-10-15
By: अनिल रघुराज
On: October 15, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

evolution process

कल, आज व कल, सब अलग

2023-10-14
By: अनिल रघुराज
On: October 14, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

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निवेश – तथास्तु

  • पीछे अनिश्चितता, आगे भी अनिश्चितता!
    20 Sep 2026

    अनिश्चितता से भरा समय है और अनिश्चितता से ही भरा है शेयर बाज़ार। इस अनिश्चितता से जूझने के लिए जिसने रिस्क लिया, उसने या तो कमाया या अनुभव से थोड़ी समझ और हौसला हासिल किया। जिसने रिस्क नहीं लिया तो धारा के साथ बह गया या बहते-बहते कहीं किनारे लग गया। करना क्या है, यह हर किसी को रिस्क लेने की अपनी क्षमता के हिसाब से तय करना है। शेयर बाज़ार का कोई भरोसा नहीं। बड़ों को […]

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क्या आप जानते हैं?

  • हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

    इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर जितने भी 69,963 किस्म के रीढ़वाले या कशेरुकी (vertebrates) जीव-जन्तु हैं, उन्होंने देखने की क्षमता वाली अपनी आंखें एक बैक्टीरिया के जीन से हासिल की है। यह सच अप्रैल 2023 में पीएनएएस (प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज) की …

अपनों से अपनी बात

  • साल में 41-112%, मिले है सिर्फ यहां!

    भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और आगे भी बढ़ेगी। लेकिन कहा जा रहा है कि इसका लाभ आम आदमी को पूरा नहीं मिलता। अमीर-गरीब की खाईं बढ़ रही है। बाज़ार को आंख मूंदकर गालियां दी जा रही हैं। लेकिन बाज़ार सचेत लोगों के लिए आय और दौलत के सृजन ही नहीं, वितरण का काम भी करता है। हमने तथास्तु सेवा इसीलिए शुरू की है ताकि अर्थव्यवस्था, खासकर कंपनियों के बढ़ने का लाभ निपट गरीबी से ऊपर रहनेवाले लोगों तक पहुंचाया जा सके। वे जिन्हें बैंक बहुत हुआ तो 9 प्रतिशत देता है, जबकि वास्तविक महंगाई की दर 10 प्रतिशत से ऊपर रहती है। वे भागकर जाते हैं सोने और रीयल एस्टेट में चले जाते हैं तो उनकी बचत लॉक हो जाती है। देश के काम नहीं आती। खुद उनके कितने काम आएगी, यह भी पक्का नहीं। जो पिछले साढ़े चार सालों से अर्थकाम से जुड़े हैं, वे हमारी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से भलीभांति वाकिफ हैं। शुरू में हम भी कच्चे थे तो बाज़ार के उस्तादों के जाल में फंस गए। गलतियां कीं। लेकिन जैसे ही समझ में आया, खटाक से उनसे किनारा कस लिया। करीब सवा साल पहले से नए सिरे से शुरू किया तो मजबूत आधार और गहन रिसर्च के साथ। उसी का नतीजा है कि हमारी सलाहें शानदार-जानदार रिटर्न दे रही हैं। पिछली बार हमने अगस्त 2013 से अगस्त 2014 तक का लेखाजोखा रखा था। अब सितंबर 2013 से सितंबर 2014 की बानगी पेश है। सितंबर 2013 में पांच रविवार थे तो पांच कंपनियां। आप नीचे की सारिणी से देख सकते हैं कि पांच में चार ने अपना (तीन से पांच साल का) लक्ष्य साल भर में ही पूरा कर लिया है, जबकि एक कंपनी 84.57 प्रतिशत रिटर्न के साथ लक्ष्य से ज़रा-सा पीछे है। तारीख कंपनी तब का भाव समय लक्ष्य 30/09/14 का भाव रिटर्न (%) 01/09/13 डॉ. रेड्डीज़ लैब 2292.90 3 साल 2815 3229.60 40.85 08/09/13 एचडीएफसी बैंक 616.20 3 साल 850 872.65 41.62 15/09/13 अतुल ऑटो 173.65 5 साल 260 367.90 111.86 22/09/13 कमिन्स इंडिया 409.25 3 साल 474 671.05 63.97 29/09/13 नवनीत एजुकेशन 53.15 3 साल 110 98.10 84.57   यहां यह भी गौर करने की बात है कि हम आमतौर पर हर महीने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉल कैप का संतुलन बनाकर चलते हैं। यह भी बताते हैं कि कहां पर एंट्री करें और आपके पास कुल एक लाख रुपए हों तो उस हफ्ते की कंपनी में कितना लगाना चाहिए, उसके कितने शेयर खरीदने चाहिए। मसलन, सितंबर 2013 में हमने तीन लार्जकैप, एक मिडकैप और एक स्मॉल कैप कंपनी आपके निवेश के लिए पेश की थी। इसमें से लार्ज कैप कंपनियों में डॉ. रेड्डीज़ लैब का शेयर लक्ष्य हासिल कर चुका है और यही नहीं, 24 सितंबर 2014 को 3356.60 रुपए पर 52 हफ्ते का शिखर पकड़ चुका है। एचडीएफसी बैंक भी लक्ष्य हासिल करने के साथ ही 30 सितंबर 2014 को 879.80 रुपए का शिखर हासिल कर चुका है। कमिन्स इंडिया भी लक्ष्य हासिल कर लेने के साथ 4 सितंबर 2014 को 720 रुपए पर 52 हफ्ते का शीर्ष छू चुका है। स्मॉल कैप की श्रेणी वाला स्टॉक अतुल ऑटो साल भर में 111.86 प्रतिशत का रिटर्न देकर लक्ष्य के काफी आगे निकल चुका है। यही नहीं, 12 सितंबर 2014 को वो 446.90 रुपए का शिखर भी चूम चुका है। बाकी बची मिडकैप कंपनी नवनीत एजुकेशन में तीन साल का लक्ष्य 110 रुपए था। उसका शेयर 10 सितंबर 2014 को 104.90 रुपए तक जाने के बाद 30 सितंबर को 2014 को 98.10 रुपए पर था, जो साल का 84.97 रिटर्न दिखाता है। आप ऊपर की सारिणी से देख सकते हैं कि 1 सितंबर 2013 से 30 सितंबर 2014 तक की अवधि में तथास्तु में बताई पांच कंपनियों ने न्यूनतम 40.85 प्रतिशत और अधिकतम 111.86 प्रतिशत रिटर्न दिया है। इसी दौरान एनएसई निफ्टी ने 5550.75 से 7964.80 तक जाकर 43.49 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स ने 18,886.13 से 26,567.99 तक पहुंचकर 40.67 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। दोस्तों! पुरानी बात फिर दोहरा रहा हूं कि मात्र 200 रुपए में अगर कोई सवा आपको बाज़ार से ज्यादा रिटर्न दिला रही है, वो भी आपको आपकी भाषा में अच्छी तरह कंपनी की जानकारी देकर तो क्या इस सेवा को आपका और आपको इस सेवा का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बढ़ रही अर्थव्यवस्था का लाभ उठाइए। यकीन मानिए कि मोदी की सरकार बस एक निमित्त मात्र है। वो रहे या कोई और आए, अगले दस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जबरदस्त प्रगति के साल होने जा रहे हैं। इस दौरान एक साल में दोगुना ही नहीं, दस साल में अपनी बचत से दस गुना दौलत बनाने के मौके बहुत सारे आएंगे। दूसरे आपको बस उल्लू बनाएंगे। केवल हम ही हैं जो पूरी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से आपके लिए निवेश के हर रविवार को शानदार मौके लेकर आते रहेंगे। तुलसीदास की चौपाई याद कीजिए – सकल पदारथ है जन मांही, कर्महीन नर पावत नाहीं। आपके हिस्से का कुछ कर्म हम कर दे रहे हैं। बाकी तो आपको ही करना पड़ेगा। इसलिए…. सोचिए। समझिए। फैसला कीजिए। तथास्तु!!!

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ट्रेडिंग – बुद्ध

  • विशाल खपत की गाथा उड़ा दी हवा में!
    18 Sep 2026

    मोदी सरकार की जीडीपी चमत्कार गाथा में जितना गहरे उतरते जाइए, आपका माथा उतना ही चकराता जाता है। ऊपर-ऊपर 7.8% या 2.6% की विकास दर और डबल डिफ्लेटर के खेल को किनारे रख दें तो एक नया चौंकानेवाला रहस्य कूदकर सामने आ खड़ा होता है। नई सीराज की गणना में 2022-23 से लेकर 2025-26 तक का जीडीपी पुरानी सीरीज़ से पूरे ₹42.1 लाख करोड़ घटा दिया गया है। मतलब उक्त तीन सालों में पहले बताया गया जीडीपी असल में 96.6% कम रहा था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि नई सीरीज़ में दिया गया निजी अंतिम खपत खर्च (पीएफसीई) ₹689.21 लाख करोड़ है। यह पुरानी सीरीज़ के निजी अंतिम खपत खर्च ₹769.91 लाख करोड़ से ₹80.70 लाख करोड़ या 10.48% कम है। आखिर पुरानी और नई सीरीज़ के बीच देश के आमजन की इतनी खपत कैसे और कहां हवा में उड़ गई? क्या यह खपत कभी थी ही नहीं और इसे जबरन दिखाया गया था? यह सवाल ज़मीन से जुड़े अध्येता और अर्थशास्त्री विवेक कौल ने बड़ी शिद्दत से उठाया है। हम सबकी जो खपत देश के जीडीपी का 55-60% बनाती रही है, उसमें इतना बड़ा झोल कैसे आ गया? सवाल उठता है कि क्या दशकों से भारत के विशाल बाज़ार व खपत की जो कहानी देश-दुनिया में बेची जा रही है, वो खोखली हो चुकी है और इसीलिए निजी क्षेत्र देश में निवेश नहीं कर रहा? अब शुक्रवार का अभ्यास…

जानिए

  • ज़ीरो-सम गेम नहीं है यह
  • ईटीएफ: चलो बाजार खरीद लें
  • मायने आईपीओ ग्रेडिंग के
  • जवाब कमोडिटी बाजार के

बूझिए

  • ओपन ऑफर, बायबैक, डीलिस्टिंग
  • इश्यू मूल्य और बुक बिल्डिंग
  • गुत्थी ऋण बाजार की
  • यह कासा बला क्या है?

आज़माइए

  • मोटामोटी दस बातें शेयरों की
  • गोल्ड ईटीएफ एक, दाम अनेक
  • न करें कम एनएवी का लालच
  • फायदे म्यूचुअल फंड निवेश के

क्या आप जानते हैं?

हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर

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