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journey

agyan se vigyan

अज्ञान की खोज से विज्ञान

2025-12-24
By: अनिल रघुराज
On: December 24, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

data power

हम बने डेटा, वो मालिक

2025-11-24
By: अनिल रघुराज
On: November 24, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

notions gone

अनंत ऊंचाइयों का सफर

2025-10-26
By: अनिल रघुराज
On: October 26, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

safar ho suhana

सफर हो सुहाना

2025-08-21
By: अनिल रघुराज
On: August 21, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

na risk na faisla

रिस्क नहीं तो फैसला नहीं

2025-07-03
By: अनिल रघुराज
On: July 3, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

choti choti jeet

छोटी-छोटी जीत

2025-07-02
By: अनिल रघुराज
On: July 2, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

jwala jeevan ki

ज्वाला जीवन की

2025-07-01
By: अनिल रघुराज
On: July 1, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

tan se badalana man ko

तन से बदलना मन को

2025-05-23
By: अनिल रघुराज
On: May 23, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

khilna samay par

खिलना अपने समय पर

2025-05-22
By: अनिल रघुराज
On: May 22, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

achhi hai chunauti

अच्छी है चुनौती

2025-03-22
By: अनिल रघुराज
On: March 22, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

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निवेश – तथास्तु

  • हवाबाज़ी नहीं, संभावनाओं पर निवेश!
    13 Sep 2026

    ब्रिक्स का 18वां शिखर सम्मेलन। भारत ने चौथी बार इसकी अध्यक्षता की। इसके पांच मूल सदस्यों – ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन व दक्षिण अफ्रीका में भारत सबसे गरीब है। हमारी प्रति व्यक्ति आय 2550 डॉलर है, जबकि दक्षिण अफ्रीका की 6110 डॉलर, ब्राज़ील की 9930 डॉलर, चीन की 13,660 डॉलर और रूस की 15,160 डॉलर है। विश्व बैंक के जुलाई 2026 के ताजा मानक के मुताबिक 14,375 डॉलर या अधिक प्रति व्यक्ति वाला देश विकसित है, जबकि […]

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क्या आप जानते हैं?

  • हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

    इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर जितने भी 69,963 किस्म के रीढ़वाले या कशेरुकी (vertebrates) जीव-जन्तु हैं, उन्होंने देखने की क्षमता वाली अपनी आंखें एक बैक्टीरिया के जीन से हासिल की है। यह सच अप्रैल 2023 में पीएनएएस (प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज) की …

अपनों से अपनी बात

  • साल में 41-112%, मिले है सिर्फ यहां!

    भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और आगे भी बढ़ेगी। लेकिन कहा जा रहा है कि इसका लाभ आम आदमी को पूरा नहीं मिलता। अमीर-गरीब की खाईं बढ़ रही है। बाज़ार को आंख मूंदकर गालियां दी जा रही हैं। लेकिन बाज़ार सचेत लोगों के लिए आय और दौलत के सृजन ही नहीं, वितरण का काम भी करता है। हमने तथास्तु सेवा इसीलिए शुरू की है ताकि अर्थव्यवस्था, खासकर कंपनियों के बढ़ने का लाभ निपट गरीबी से ऊपर रहनेवाले लोगों तक पहुंचाया जा सके। वे जिन्हें बैंक बहुत हुआ तो 9 प्रतिशत देता है, जबकि वास्तविक महंगाई की दर 10 प्रतिशत से ऊपर रहती है। वे भागकर जाते हैं सोने और रीयल एस्टेट में चले जाते हैं तो उनकी बचत लॉक हो जाती है। देश के काम नहीं आती। खुद उनके कितने काम आएगी, यह भी पक्का नहीं। जो पिछले साढ़े चार सालों से अर्थकाम से जुड़े हैं, वे हमारी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से भलीभांति वाकिफ हैं। शुरू में हम भी कच्चे थे तो बाज़ार के उस्तादों के जाल में फंस गए। गलतियां कीं। लेकिन जैसे ही समझ में आया, खटाक से उनसे किनारा कस लिया। करीब सवा साल पहले से नए सिरे से शुरू किया तो मजबूत आधार और गहन रिसर्च के साथ। उसी का नतीजा है कि हमारी सलाहें शानदार-जानदार रिटर्न दे रही हैं। पिछली बार हमने अगस्त 2013 से अगस्त 2014 तक का लेखाजोखा रखा था। अब सितंबर 2013 से सितंबर 2014 की बानगी पेश है। सितंबर 2013 में पांच रविवार थे तो पांच कंपनियां। आप नीचे की सारिणी से देख सकते हैं कि पांच में चार ने अपना (तीन से पांच साल का) लक्ष्य साल भर में ही पूरा कर लिया है, जबकि एक कंपनी 84.57 प्रतिशत रिटर्न के साथ लक्ष्य से ज़रा-सा पीछे है। तारीख कंपनी तब का भाव समय लक्ष्य 30/09/14 का भाव रिटर्न (%) 01/09/13 डॉ. रेड्डीज़ लैब 2292.90 3 साल 2815 3229.60 40.85 08/09/13 एचडीएफसी बैंक 616.20 3 साल 850 872.65 41.62 15/09/13 अतुल ऑटो 173.65 5 साल 260 367.90 111.86 22/09/13 कमिन्स इंडिया 409.25 3 साल 474 671.05 63.97 29/09/13 नवनीत एजुकेशन 53.15 3 साल 110 98.10 84.57   यहां यह भी गौर करने की बात है कि हम आमतौर पर हर महीने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉल कैप का संतुलन बनाकर चलते हैं। यह भी बताते हैं कि कहां पर एंट्री करें और आपके पास कुल एक लाख रुपए हों तो उस हफ्ते की कंपनी में कितना लगाना चाहिए, उसके कितने शेयर खरीदने चाहिए। मसलन, सितंबर 2013 में हमने तीन लार्जकैप, एक मिडकैप और एक स्मॉल कैप कंपनी आपके निवेश के लिए पेश की थी। इसमें से लार्ज कैप कंपनियों में डॉ. रेड्डीज़ लैब का शेयर लक्ष्य हासिल कर चुका है और यही नहीं, 24 सितंबर 2014 को 3356.60 रुपए पर 52 हफ्ते का शिखर पकड़ चुका है। एचडीएफसी बैंक भी लक्ष्य हासिल करने के साथ ही 30 सितंबर 2014 को 879.80 रुपए का शिखर हासिल कर चुका है। कमिन्स इंडिया भी लक्ष्य हासिल कर लेने के साथ 4 सितंबर 2014 को 720 रुपए पर 52 हफ्ते का शीर्ष छू चुका है। स्मॉल कैप की श्रेणी वाला स्टॉक अतुल ऑटो साल भर में 111.86 प्रतिशत का रिटर्न देकर लक्ष्य के काफी आगे निकल चुका है। यही नहीं, 12 सितंबर 2014 को वो 446.90 रुपए का शिखर भी चूम चुका है। बाकी बची मिडकैप कंपनी नवनीत एजुकेशन में तीन साल का लक्ष्य 110 रुपए था। उसका शेयर 10 सितंबर 2014 को 104.90 रुपए तक जाने के बाद 30 सितंबर को 2014 को 98.10 रुपए पर था, जो साल का 84.97 रिटर्न दिखाता है। आप ऊपर की सारिणी से देख सकते हैं कि 1 सितंबर 2013 से 30 सितंबर 2014 तक की अवधि में तथास्तु में बताई पांच कंपनियों ने न्यूनतम 40.85 प्रतिशत और अधिकतम 111.86 प्रतिशत रिटर्न दिया है। इसी दौरान एनएसई निफ्टी ने 5550.75 से 7964.80 तक जाकर 43.49 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स ने 18,886.13 से 26,567.99 तक पहुंचकर 40.67 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। दोस्तों! पुरानी बात फिर दोहरा रहा हूं कि मात्र 200 रुपए में अगर कोई सवा आपको बाज़ार से ज्यादा रिटर्न दिला रही है, वो भी आपको आपकी भाषा में अच्छी तरह कंपनी की जानकारी देकर तो क्या इस सेवा को आपका और आपको इस सेवा का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बढ़ रही अर्थव्यवस्था का लाभ उठाइए। यकीन मानिए कि मोदी की सरकार बस एक निमित्त मात्र है। वो रहे या कोई और आए, अगले दस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जबरदस्त प्रगति के साल होने जा रहे हैं। इस दौरान एक साल में दोगुना ही नहीं, दस साल में अपनी बचत से दस गुना दौलत बनाने के मौके बहुत सारे आएंगे। दूसरे आपको बस उल्लू बनाएंगे। केवल हम ही हैं जो पूरी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से आपके लिए निवेश के हर रविवार को शानदार मौके लेकर आते रहेंगे। तुलसीदास की चौपाई याद कीजिए – सकल पदारथ है जन मांही, कर्महीन नर पावत नाहीं। आपके हिस्से का कुछ कर्म हम कर दे रहे हैं। बाकी तो आपको ही करना पड़ेगा। इसलिए…. सोचिए। समझिए। फैसला कीजिए। तथास्तु!!!

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ट्रेडिंग – बुद्ध

  • किसने खाई 14 साल की 80% महंगाई!
    11 Sep 2026

    देश का जीडीपी महज संख्याओं का खेल नहीं। हर देशवासी के साथ उद्योग-धंधों, व्यापार और सरकारों तक की हरकतों से इसका वास्ता है। इसके सारे घटकों को डेटा सर्वसुलभ और पारदर्शी हो तो इसका हिसाब निकालना कोई रॉकेट साइंस नहीं। किसी अवधि में घरों से लेकर बिजनेस तक जो भी माल व सेवाएं सृजित हुई हैं, उसमें सरकार को मिला टैक्स जोड़कर उसके द्वारा दी गई सब्सिडी घटा दें तो जीडीपी निकल आता है। इसका एक स्वरूप उस समय के बाज़ार मूल्य पर निकालते हैं जिसे नॉमिनल जीडीपी कहते हैं। दूसरे स्वरूप में आधार वर्ष के स्थिर मूल्य पर मात्रा के अंतर को मापा जाता है जिसे रीयल जीडीपी कहते हैं जो मुद्रास्फीति को हटाकर अर्थव्यवस्था का आकार बताता है। दिक्कत यह है कि मोदी सरकार जीडीपी का हिसाब बताने में पारदर्शिता नहीं बरतती। जैसे, पुरानी सीरीज में आधार वर्ष 2011-12 के स्थिर मूल्य पर वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में रीयल जीडीपी ₹47,88,623 करोड़ और तब के बाज़ार मूल्य पर नॉमिनल जीडीपी ₹86,05,365 करोड़ था तो सरकार को साफ बताना चाहिए था कि ऐसा इसलिए क्योंकि दरमियानी 14 सालों में महंगाई 79.70% बढ़ गई। लेकिन वह ऐसा करती तो थोक मुद्रास्फीति को डिफ्लेटर बनाकर चलने के उसके शातिराना खेल का भंडाफोड़ हो जाता। क्या है डिफ्लेटर का पुराना और नया खेल? अब शुक्रवार का अभ्यास…

जानिए

  • ज़ीरो-सम गेम नहीं है यह
  • ईटीएफ: चलो बाजार खरीद लें
  • मायने आईपीओ ग्रेडिंग के
  • जवाब कमोडिटी बाजार के

बूझिए

  • ओपन ऑफर, बायबैक, डीलिस्टिंग
  • इश्यू मूल्य और बुक बिल्डिंग
  • गुत्थी ऋण बाजार की
  • यह कासा बला क्या है?

आज़माइए

  • मोटामोटी दस बातें शेयरों की
  • गोल्ड ईटीएफ एक, दाम अनेक
  • न करें कम एनएवी का लालच
  • फायदे म्यूचुअल फंड निवेश के

क्या आप जानते हैं?

हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर

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