पिछले हफ्ते बाजार के बराबर बढ़ने के बाद हमने अंदेशा जताया था कि रोलओवर के चलते इस हफ्ते बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर चलेगा। सोमवार को बाजार लहरों की तरह उठता-गिरता रहा। मंगलवार को उसके गिरने-उठने का ग्राफ किसी माला के आकार का रहा। हालांकि दोनों ही दिन सुबह की गिरावट शाम तक आते-आते संभल गई। इस उथल-पुथल से खास फर्क नहीं पड़ता। इसकी वजह रोलओवर है और बड़े रोलओवर होने अभी बाकी हैं। निफ्टी 5810-5820 केऔरऔर भी

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) में आई करीब तीन फीसदी की गिरावट ने बाजार को थोड़ा दबाकर रख दिया। फिर भी चुनिंदा स्टॉक्स, खासकर बी ग्रुप के स्टॉक्स में बढ़त जारी है। गौर करने की बात यह है कि पिछले छह महीनों में दो चीजें हुई हैं। एक, जो प्रवर्तक ऊंचे मूल्यों पर भी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने को तैयार नहीं थे, उन्हें अब समझ में आ गया है कि फंड जुटाने का सबसे सस्ता व अच्छा तरीकाऔरऔर भी

बाजार में मिड कैप स्टॉक्स की चर्चा जोरशोर से चल पड़ी है। हर 5 सेकंड पर कोई न कोई सूचना आ जाती है और इनमें से ज्यादातर खबर बन जाती हैं। यह न केवल बाजार के लिए, बल्कि निवेशकों के लिए भी शुभ संकेत है। बी ग्रुप के शेयरों में रैली शुरू हो गई है। उन तमाम रिटेल निवेशकों को अब इनसे निकलने का मौका मिल जाएगा जिन्होंने इन्हें ऊंचे भाव पर खरीदा था। दरअसल, यह एकऔरऔर भी

इनफोसिस ने भारत के बारे में धुरंधरों का नजरिया बदल दिया है। जानीमानी निवेश व ब्रोकिंग फर्म सीएलएसए और कुछ दूसरे विश्लेषकों ने भारतीय बाजार को डाउनग्रेड कर दिया है। लेकिन जान लें कि इनफोसिस में बिकवाली इसलिए नहीं हुई कि उसके नतीजे उम्मीद से कमतर थे, बल्कि इसकी कुछ दूसरी वजहें थीं। इसके फ्यूचर्स में औकात से ज्यादा कर लिए गए सौदे काटे जा रहे हैं। अभी तो हम इनफोसिस में अच्छा-खासा मूल्य देख रहे हैंऔरऔर भी

हम पहले से ही थोड़े करेक्शन के लिए तैयार थे और लांग व शॉर्ट सौदों में संतुलन बनाकर चल रहे थे। यह भी एक कला है जिसे निवेशकों व ट्रेडरों को जरूर जानना-समझना चाहिए। बड़े करेक्शन को होने देने में मूलतः कुछ भी गलत नहीं है। कच्चे तेल के दाम, ब्याज दरों के बढ़ने की आशंका, मुद्रास्फीति और कंपनियों के मुनाफे से जुड़ी चिंताओं के चलते ट्रेडरों ने पहले से शॉर्ट पोजिशन बना रखी है और जबऔरऔर भी

बाजार के लोगों में डर बना हुआ है कि इसमें कभी भी करेक्शन आ सकता है, गिरावट आ सकती है। जब तक लोगों में यह डर कायम है और बहुत सारे शॉर्ट सौदे हुए पड़े हैं, तब तक बड़ा करेक्शन आने की कोई गुंजाइश नहीं है। हां, थोड़ा-बहुत ऊपर नीचे हो ही सकता है। फिर भी सावधानी बरतनी जरूरी है। हेजिंग जरूरी है यानी एक जगह का घाटा दूसरी जगह के भरने का इंतजाम जरूरी है। यकीनऔरऔर भी

नए साल का पहला कारोबारी सत्र। आपके लिए क्या पेश करूं? उलझन में हूं। सोचता हूं निवेश के माध्यमों में सबसे ज्यादा जोखिम शेयरों में है तो क्यों न साल की शुरुआत सुरक्षा के बजाय भरपूर जोखिम से की जाए। पहले ही दिन बहुत बच-बचकर क्यों चला जाए! तो ऐसा शेयर जो 36.53 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। इतने पी/ई का कोई भी शेयर महंगा ही कहा जाएगा। लेकिन जब पूरा सेक्टर तेजी सेऔरऔर भी

एयरलाइन कंपनियों को उड़ान के रद्द होने या यात्रा की अनुमति नहीं दिए जाने के कारण यात्रियों को हुई असुविधा के लिए उन्हें नवंबर महीने में 49.66 करोड़ रुपए का मुआवजा देना पड़ा है। यह जानकारी सरकार की तरफ से उपलब्ध कराई गई है। जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार अंतिम समय में उड़ान रद्द होने के कारण 7500 यात्रियों को 33.46 लाख रुपए दिए गए, वहीं टिकट होने के बावजूद विमान में चढ़ने की अनुमति नहीं देनेऔरऔर भी

गुरुवार को शेयर बाजार खुलने के एकाध घंटे बाद ही अफवाह फैल गई कि सिविल एविएशन सेक्टर में भी सीबीआई किसी घोटाले का पर्दाफाश करनेवाली है। दिन भर यह सनसनी चलती रही। फिर कहा गया कि बाजार बंद होने के बाद ऐसा खुलासा हो सकता है। इस चक्कर में बढ़े बाजार में भी जेट एयरवेज, किंगफिशर और स्पाइसजेट के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। लेकिन देर शाम तक ऐसी कोई खबर नहीं आई है। हां, इसऔरऔर भी