5700 तक गिर जाए तो फिक्र नहीं!

इनफोसिस ने भारत के बारे में धुरंधरों का नजरिया बदल दिया है। जानीमानी निवेश व ब्रोकिंग फर्म सीएलएसए और कुछ दूसरे विश्लेषकों ने भारतीय बाजार को डाउनग्रेड कर दिया है। लेकिन जान लें कि इनफोसिस में बिकवाली इसलिए नहीं हुई कि उसके नतीजे उम्मीद से कमतर थे, बल्कि इसकी कुछ दूसरी वजहें थीं। इसके फ्यूचर्स में औकात से ज्यादा कर लिए गए सौदे काटे जा रहे हैं। अभी तो हम इनफोसिस में अच्छा-खासा मूल्य देख रहे हैं और इसमें हम जबरदस्त खरीद की सिफारिश करते हैं, भले ही यह 2800 रुपए या उससे भी नीचे चला जाए। भारती, आइडिया, मारुति और हीरो होंडा साबित कर चुके हैं कि स्तरीय स्टॉक्स वापसी करते ही हैं।

बाजार आज पहले तो अनपेक्षित रूप से बढ़ गया और फिर धड़ाम हो गया। निफ्टी 1.60 फीसदी की गिरावट के साथ 5731.60 पर पहुंच गया। इससे ऐसे तमाम ट्रेडर व निवेशक फंस गए जो 5900 पर 5830 का स्टॉप लॉस लगाकर लांग हो गए थे। जब स्टॉप लॉस ट्रिगर हो गया तो वे 5770 का स्टॉप लॉस लगाकर 5800 पर फिर से लांग हो गए। लेकिन इस बार भी स्टॉप लॉस की हालत आ गई। बाजार में एक बार फिर जमकर अफवाह चली कि सिटी ने नोमुरा के 800 करोड़ रुपए के शेयर बेच डाले हैं। हालांकि किसी ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

निफ्टी 6000 के आसपास और वो भी नतीजों के महीने में। मैंने कह रखा था कि बाजार में उथल-पुथल रहेगी। ऐसा ही हो रहा है। मगर बाजार 200 दिनों के मूविंग औसत (डीएमए) 5700 तक भी चला जाए तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। अंदरूनी रुझान तेजी का है और 6000 व 6400 का लक्ष्य अब भी कायम है।

रक्षात्मक रणनीति हमेशा काम करती है। इस समय जी ई शिंपिंग, रैनबैक्सी व जेट एयरवेड जैसे स्टॉक्स खरीद लीजिए जो स्वभाव से ही रक्षात्मक हैं और बाजार जब भी गरजता हुआ उठेगा तो आसानी से अच्छा रिटर्न दे सकते हैं। आज भी हमने देखा कि जेट एयरवेज बहुत कम वोल्यूम के बीच भी 485 रुपए तक ऊपर चला गया। खैर, इसमें 500 रुपए पर तगड़ा अवरोध है। फिर भी इस अवरोध को टूटना ही है। इसके बाद यह अबन ऑफशोर की तरह बढ़ेगा। चर्चाएं हैं कि इस सेक्टर के लिए भारत सरकार की तरफ से काफी सकारात्मक कदम उठाए जानेवाले हैं।

हमने मुथूत फाइनेंस के आईपीओ से दूर रहने की सलाह दी है क्योंकि न केवल इसका मूल्य ज्यादा है, बल्कि यह फंडामेंटल्स के स्तर पर काफी कमजोर है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का लंबित फैसला कंपनी की पूरी नेटवर्थ को स्वाहा कर सकता है। फिर, सत्यम के मामले की तरह यहां ऑडिटर्स से गोल्ड का कोई सर्टिफिकेशन नहीं होता। इसलिए नहीं पता कि बंधक रखे गए सोने का मूल्य क्या है।

तीसरे, अपने देश में आपराधिक मामलों को रफा-दफा करने के लिए भारी-भरकम घूस खिलानी पड़ती है। इसलिए मुथूत फाइनेंस से जुड़े 1700 आपराधिक मामले उसकी बैलेंस शीट के परखचे उड़ा सकते हैं। क्या 23 के पी/ई अनुपात पर जारी इस स्टॉक को सिर्फ इसलिए खरीद लिया जाए कि कुछ निवेश बैंकरों ने प्री-आईपीओ में इसे खरीद लिया है? इसके बजाय विंडसर या विमप्लास्ट जैसे स्टॉक्स पर गौर कीजिए जो क्रमशः 3 और 5 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहे हैं।

दुनिया में ऊंचा उठने की चाहत में लोग किस कदर गिर सकते हैं, इसकी कोई कल्पना तक नहीं कर सकता।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। यह कॉलम मूलत: सीएनआई रिसर्च से लिया जा रहा है)

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