अगर हम किसी चीज को नहीं जानते तो यह हमारी अपनी सीमा है। लेकिन हर चीज को कोई न कोई तो जानता ही है और इनमें से हर अच्छी चीज वाजिब भाव भी मिलता है। कंपनियां हमारी आंखों से ओछल रहकर काम करती रहती हैं। हम अनजान रहने के कारण उनकी विकास यात्रा का फल नहीं चख पाते। लेकिन हमारे जानने या न जानने से उनकी विकास यात्रा पर कोई फर्क नहीं पड़ता। वह यात्रा सतत जारीऔरऔर भी

तमाम बुरी खबरें पचा गया बाजार। इसमें इनफोसिस के खराब नतीजे, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की कमतर वृद्धि और इन सबके ऊपर मुंबई के झावेरी बाजार, ओपेरा हाउस और दादर में हुए सीरियल बम धमाके। बाजार ने साबित कर दिया कि निफ्टी में 5500 का स्तर बहुत मजबूत स्तर है जहां बाजार ने पर्याप्त पकड़ दिखाई है। कुल मिलाकर बाजार थोड़ा गिरकर बंद हुआ क्योंकि सबको इंतजार था कि यूरोप में बैंकों के स्ट्रेस टेस्ट का नतीजाऔरऔर भी

टीसीएस ने कल उम्मीद से बेहतर नतीजे घोषित किए और शॉर्ट कवरिंग के चलते इसका शेयर खुला ही काफी ज्याद बढ़कर। लेकिन फिर मुनाफावसली शुरू हो गई तो तेजी फिलहाल आज के लिए थोड़ी थम गई। फिर भी कुल मिलाकर कल से दो फीसदी बढ़त के साथ बंद हुआ है। बाजार भी सुबह 5631.70 तक जाने के बाद नीचे आ गया। असल में यूरोपीय बैंकों के स्ट्रेस टेस्ट से पहले तमाम शॉर्ट सौदे करनेवाले थोड़ा दबाव मेंऔरऔर भी

जैसी कि उम्मीद थी, मुंबई का सीरियल ब्लास्ट शेयर बाजार पर बेअसर रहा। बाजार खुला जरूर थोड़ा गिरावट व घबराहट के साथ। लेकिन यह मंदड़ियों को घात लगाकर पकड़ने जैसा था क्योंकि परसों निफ्टी 5500 तक गिर गया था और तमाम ट्रेडर व देशी-विदेशी फंड शॉर्ट सौदों में फंस गए थे। यह मजबूत इरादों वाले तेजड़ियों के लिए सुनहरा मौका था और वे मंदड़ियों के साथ जारी शीत-युद्ध के बीच निफ्टी को 5620 के ऊपर ले गए।औरऔर भी

21 की मौत, 150 से ज्यादा घायल। आज इनसे जुड़े हजार-दो हजार लोगों की ज़िंदगी यकीनन ठहर गई होगी। लेकिन मुंबई के बाकी करीब 205 लाख लोंगों की ज़िंदगी की जंग चलती रहेगी। आतंकवाद की यही सीमा है। यह हमारे जीवन में इतना खलल भी इसीलिए डाल पाता है क्योंकि इसके पीछे खास किस्म की राजनीति काम करती है। इसे सिर्फ खुफिया व सुरक्षा तंत्र की कमजोरी मानना गलत होगा। खैर, इस तरह के पत्थर फेंकने सेऔरऔर भी

बाजार सुधर कर वापस 5500 के ऊपर के प्रतिरोध स्तर पर आ चुका है। निफ्टी 1.07 फीसदी की बढ़त के साथ 5585.45 पर बंद हुआ है। दरअसल मुद्दा टेक्निकल रैली का नहीं, बल्कि यह तथ्य है कि 22 जून 2011 के बाद कल पहली बार एफआईआई का निवेश ऋणात्मक रहा। उन्होंने कल 969.44 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की है। लेकिन ऐसा इनफोसिस के अपेक्षा से कमतर नतीजों, आईआईपी के कमजोर आंकड़ों व यूरोप में छाई कमजोरीऔरऔर भी

इनफोसिस को भाईलोग धुने पड़े हैं। मौका मिला नहीं कि पीट डाला। पिछले महीने 20 जून 2011 को 2660.55 रुपए पर इसने 52 हफ्ते की तलहटी पकड़ी थी। कल नतीजों की घोषणा के बाद इसका पांच रुपए अंकित मूल्य का शेयर बीएसई (कोड – 500209) में 4.27% गिरकर 2794.25 रुपए पर और एनएसई (कोड – INFY) में 4.44% गिरकर 2791.55 रुपए पर बंद हुआ है। लगता है अभी और गिरेगा। [आगे बढ़ूं, इससे पहले एक छोटी-सी बात।औरऔर भी

इनफोसिस के खराब नतीजे, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का कम रहना और दुनिया के बाजारों की खराब हालत, खासकर इटली पर घहराता ऋण संकट। इन सब नकारात्मक कारकों ने पूंजी बाजार के लिए आज के दिन को निराशा में डुबो डाला। इसका भरपूर असर निफ्टी पर दिखा। खुला ही करीब 60 अंक गिरकर। दिन के दौरान हालत बिगड़ती गई। नतीजतन बाजार में बड़े पैमाने पर बिकवाली हुई। निफ्टी कुल 89.95 अंक या 1.60 फीसदी की गिरावट के साथऔरऔर भी

दुनिया के बाजारों की पस्ती हमारे बाजार में भी पस्ती का सबब बन गई। इटली में बांडों मूल्यों का अचानक गिर जाना और ऑस्ट्रेलिया में कोयला खनन पर टैक्स लगाने जैसी बातों ने माहौल को और बिगाड़ दिया। फिर भी भारतीय बाजार अपेक्षाकृत संभले रहे। मिड-कैप स्टॉक्स में देशी-विदेशी फंडों की खरीद जारी है। एप्टेक, एलएमएल, एसीसी और टाटा मोटर्स के नॉन वोटिंग शेयरों वगैरह को तवज्जो मिल रही है। निफ्टी गिरा जरूर, लेकिन 5600 के नीचेऔरऔर भी

कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं जिनमें लंबे समय के निवेश को लेकर ज्यादा कुछ आगा-पीछा सोचने की जरूरत नहीं होती। बस यही देखना पड़ता है कि उन्हें सस्ते में पकड़ने का वक्त है कि नहीं। एचडीएफसी ऐसी ही कंपनी है। हाउसिंग फाइनेंस की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी कंपनी। हमारे यहां 30-32 साल के नए-नए नौकरी करनेवाले लोग भी जो लोन लेकर खटाक से घर के मालिक बन जा रहे हैं, वो पूरी सहूलियत और इस धंधेऔरऔर भी