धीरे-धीरे बजट की कलई उतर रही है और सारी दुनिया को समझ में आ रहा है कि वो कितना और क्यों बुरा है। बजट में सबसे खतरनाक प्रावधान जीएएआर (जनरल एंटी एवॉयडेंस रूल) का है जो कहीं न कहीं मानकर चलता है कि हर करदाता करचोर है और इसलिए उसे सज़ा दी जानी चाहिए। आयकर विभाग को फिलहाल जिस तरह की अंधाधुंध सत्ता मिली हुई है, उसमें लोगों को खामखां परेशान करने और भ्रष्टाचार के मामले इससेऔरऔर भी

ट्रेडिंग के लिए हम ऐसे स्टॉक्स चुनते हैं जो खरीद-फरोख्त के असर से घट-बढ़ सकते हैं, जबकि निवेश में हम ऐसी कंपनियों को चुनते हैं जिनका धंधा पुख्ता आधार पर खड़ा हो और जिसमें बढ़ने की भरपूर गुंजाइश हो। दिक्कत है कि हममें से 99 फीसदी लोग ट्रेडिंग की मानसिकता रखते हैं। छाया के पीछे भागते हैं और माया गंवाते रहते हैं। यह रुख न तो देश की अर्थव्यवस्था और न ही हमारे दीर्घकालिक आर्थिक स्वास्थ्य केऔरऔर भी

जब सारा बाजार शुक्रवार को लांग सौदे करने में लगा था, तब हमने कहा कि बजट बुरा है और निफ्टी को बेचो। निफ्टी धराशाई हो गया। आज प्री-ओपन सत्र में निफ्टी 5340.70 तक पहुंच गया और शुक्रवार से 0.37 फीसदी ऊपर था। लेकिन बाद में बाजार को बजट के बुरा होने का अहसास हुआ और निफ्टी लगातार गिरने लगा। अंत में 1.14 फीसदी की गिरावट के साथ 5257.05 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी फ्यूचर्स का आखिरीऔरऔर भी

हमें इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि सेल मार्केटिंग की एक बाजीगरी है जिसके चलिए उपभोक्ताओं की मानसिकता को भुनाया जाता है। शेयर बाजार में भी हर साल इस तरह की ‘क्लियरेंस’ सेल तीन बार लगती है, जिसमें बेचनेवाले अपना माल निकालते हैं। पहली बजट के आसपास, दूसरी दीवाली पर और तीसरी नई साल की शुरुआत पर। सेल में लोगबाग टूटकर भाग लेते हैं। जब उन्हें कोई रोक नहीं सकता तो आपको कोईऔरऔर भी

बाजार की चाल निराली है। वित्त मंत्री के बजट भाषण शुरू करने के आधे घंटे में इसकी दशा-दिशा दिखाने वाला सूचकांक निफ्टी 5445.65 की ऊंचाई तक जा पहुंचा। फिर गिरने-उठने लगा और आखिर में कल से 1.16 फीसदी की गिरावट के साथ 5317.90 पर बंद हुआ। मुझे भी लगता है कि बजट में ऐसा कुछ नहीं, जिसे खास माना जाए। निजी आयकर में छूट की सीमा को 20,000 रुपए बढ़ा देने से लोगों की खर्च करने कीऔरऔर भी

मैंने कहा था कि ब्याज दर में कटौती नहीं होगी और कटौती वाकई नहीं हुई। असल में रेपो दर में 0.25 फीसदी और एसएलआर में एक फीसदी कमी की बात जानबूझकर फैलाई जा रही थी। एक विदेशी मीडिया तक ने ऐसी खबर चलाई थी। ब्याज नहीं घटी तो बाजार में स्वाभाविक रूप से निराशा छा गई। और, तब बाजार को गिरना ही था। निफ्टी आखिरकार 1.53 फीसदी की गिरावट के साथ 5380.50 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टीऔरऔर भी

वादों की हकीकत को पहचानता है बाजार। इसीलिए भारतीय रेल के कामकाज से जुड़े तमाम स्टॉक कल, रेल बजट में की गई ठीकठाक घोषणाओं के बावजूद लुढकते चले गए। इसका अपवाद था तो इकलौता बीईएमएल जिसका नाम पहले भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड हुआ करता था। वैसे भी, बीईएमएल का वास्ता रेल मंत्रालय से नहीं, रक्षा मंत्रालय से है। वह रेलवे को माल सप्लाई जरूर करती है। लेकिन ज्यादा नहीं। इसलिए बीईएमएल के शेयर अगर मामूली बढ़त लेकरऔरऔर भी

मेरे तईं रेल बजट बाजार के लिए कोई खास मायने नहीं रखता। हम बखूबी जानते हैं कि चाहे वो रेल बजट हो या आम बजट, सरकार के लिए धन जुटाना बड़ी समस्या है। फिर भी रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने सालों बाद किराया बढ़ाने की जुर्रत की है, जिसके लिए उनकी दाद देनी पड़ेगी। हालांकि मैं तो अर्थव्यवस्था की उस सूक्ष्म तस्वीर को पकड़ने की कोशिश कर रहा हूं जो निश्चित रूप से बजट के छोटे दायरेऔरऔर भी

बाजार इसलिए नहीं बढ़ रहा कि बजट में बहुत कुछ अच्छा होने वाला है, बल्कि उसके बढ़ने की सीधी वजह यह है कि ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू हो चुका है। 15 मार्च को रिजर्व बैंक रेपो दर में 0.25 फीसदी की कमी कर सकता है। इन्हीं उम्मीदों के बीच निफ्टी आज दिन के सर्वोच्च स्तर से एकदम करीब 5429.50 पर बंद हुआ है। यह कल से 1.31 फीसदी ऊपर है। निफ्टी फ्यूचर्स आज 5476औरऔर भी

ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज में निवेश की सलाह हमने सबसे पहले करीब नौ महीने पहले 15 जून 2010 को दी थी। उस वक्त यह शेयर बहुत उछलकूद मचा रहा था। महीने भर में ही 40 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 445 रुपए पर पहुंच चुका था। इस समय भी इसमें तेज हरकत है। 10 फरवरी को इसने दिसंबर तिमाही के नतीजे घोषित किए, तब इसका बंद भाव 493.95 रुपए था। उसके बाद करीब एक महीने में यह 14.44 फीसदी बढ़करऔरऔर भी