जीवन सतत सीखने का नाम है। हम वही, दुनिया भी वही। लेकिन दृष्टि की सीमा है तो बार-बार लगातार खुद को खोजना पड़ता है। बाहर-भीतर गोता लगाना पड़ता है, तभी मिलते हैं मोती। जो ऐसा नहीं करता, वक्त की खाईं में खो जाता है। पहले मोबाइल बाज़ार में नोकिया का हिस्सा 70% था। सैमसंग और एप्पल बढ़ते गए और नोकिया उनसे पार नहीं पा सका तो उसका हिस्सा 40% से नीचे आ चुका है। देखते हैं बीताऔरऔर भी

शेयर बाज़ार दिमागदार शेरों के लिए है, कमज़ोर दिलवालों के लिए नहीं। यहां जो घबराया, समझो गया। जो डरा सो मरा। इसीलिए कहते हैं कि शेयर बाज़ार में अच्छे दिमाग से भी ज्यादा अहम है अच्छा नर्वस सिस्टम। अर्थव्यवस्था में जितना भी नया मूल्य बनता है, उसमें हिस्सेदारी का बाज़ार है यह। यहां लोकतंत्र है बराबर के जानकारों का। पर सूचनाओं और ज्ञान की विषमता इसे भीड़तंत्र बना देती है। देखें, क्या रहेगी आज बाज़ार की दशा-दिशा….औरऔर भी

जिस तरह सियारों के झुंड में पड़ा शेर सियार नहीं बन जाता, कौओं के झुंड में फंसा हंस कौआ नहीं बन जाता, वैसे ही निवेश-निवेश के शोर में आम भारतीय निवेशक ट्रेडर से निवेशक नहीं बन सकता। अभी भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर की जो स्थिति है, उसमें उसे ऐसा बनना भी नहीं चाहिए। पांच साल के ऊपर का निवेश किसी म्यूचुअल फंड की लांग टर्म इक्विटी स्कीम में और उससे पहले शुद्ध ट्रेडिंग। आज क्या हैं ट्रेडिंग केऔरऔर भी

हमारी सरकार मुंह से कहती है कि वो आम या रिटेल निवेशकों को शेयर बाज़ार में लाना चाहती है। लेकिन हकीकत यह है कि वो हम आप जैसे निवेशकों को जिबह करना चाहती है। नहीं तो क्या वजह है कि सेबी से लेकर कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय तक डंके की चोट पर बताता है कि, “भारतीय सिक्यूरिटीज़ बाज़ार में केवल रिटेल निवेशकों को ही डे-ट्रेडिंग (इंट्रा-डे) ट्रेडिंग की इजाज़त है।” वैसे, बाज़ार का हाल भी विचित्र है।और भीऔर भी

ठीक आज की तारीख को साल भर पहले इसी कॉलम में हमने नैटको फार्मा में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 340 रुपए चल रहा था। इसके बाद 20 दिसंबर 2012 को वो 505 रुपए तक चला गया और अभी 430 रुपए चल रहा है। इतना नीचे आने के बाद भी 26.47 फीसदी का रिटर्न। यह है शेयर बाज़ार में अच्छी कंपनियों में निवेश का फायदा। इसे कहते हैं कंपनी के बढ़ने के साथ निवेशऔरऔर भी

आज मार्च के डेरिवेटिव सौदों के सेटलमेंट का दिन है। यानी, जबरदस्त उठापटक का दिन। आज आम ट्रेडरों या निवेशकों की नहीं, ऑपरेटरों की मर्जी चलती है। जो जितना बलवान, वो उतना धनवान। जानकार बताते हैं कि निफ्टी में सेटलमेंट 5665 के आसपास हो सकता है, जबकि नीचे में यह 5610 के ऊपर टिके रखने की हरचंद कोशिश करेगा। इस बीच विदेशी निवेशक संस्थाओं की खरीद और घरेलू निवेशक संस्थाओं की बिक्री का सिलसिला जारी है। मंगलऔरऔर भी

हफ्ते के पहले दिन निफ्टी 5690 का स्तर तोड़कर ऊपर में 5718 तक चला गया। लेकिन बंद हुआ पहले से नीचे 5634 अंक पर। आगे का हाल यह है कि दोपहर दो बजे तक चढ़ा रहा बाज़ार जिस तरह बाद में बिकवाली के दबाव में गिरा है, उससे नहीं लगता कि आज होली के एक दिन पहले कोई खास रंगत आएगी। वो केंद्र सरकार के टिके रहने और जल्दी चुनावों को लेकर डर रहा है। लेकिन यूरोपीयऔरऔर भी

लगातार दो हफ्ते की गिरावट के बाद यह हफ्ता थोड़ा तेज़ी का हो सकता है। निफ्टी शुक्रवार को 5651 पर बंद हुआ था। जानकार बताते हैं कि अगर निफ्टी आज 5690 के ऊपर बंद होता है तो वह जल्दी ही 5825 की मंजिल तक पहुंच सकता है। वैसे, इस हफ्ते बुधवार को होली और शुक्रवार को गुड फ्राइडे के चलते बाज़ार बंद है। इसलिए केवल तीन दिन ही ट्रेडिंग होनी है। इसमें भी गुरुवार को इस महीनेऔरऔर भी

सुप्रीम पेट्रोकेम देश में पॉलिस्टिरीन के धंधे की सबसे बड़ी कंपनी है। घरेलू बाज़ार में उसकी हिस्सेदारी आधे से ज्यादा है। वो पॉलिस्टिरीन की सबसे बड़ी निर्यातक भी है। दुनिया में 80 से ज्यादा देशों को निर्यात करती है। दिसंबर 2012 की तिमाही में उसका धंधा साल भर पहले की अपेक्षा 35.69 फीसदी बढ़कर 1415.49 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इस पर उसका शुद्ध लाभ 33.47 करोड़ रुपए का है जो साल भर पहले से 289.18 फीसदीऔरऔर भी

भारतीय अर्थव्यवस्था पर दुनिया के हाल का कितना असर पड़ता है, यह भले ही बहस का मुद्दा हो। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि भारतीय शेयर बाज़ार पर दुनिया के हाल का सीधा असर पड़ता है। साइप्रस और यूरो ज़ोन के झटके से भारतीय शेयर बाज़ार दोपहर दो बजे के बाद पस्त होने लगा। लेकिन कमाल की बात यह है कि विदेशी घटनाक्रमों से विदेशी निवेशक (एफआईआई) ज्यादा प्रभावित नहीं होते। इसका सबूत है कि कलऔरऔर भी