कंपनियां भी इंसान ही चलाते हैं, कोई भगवान नहीं। हर कंपनी के पीछे प्रवर्तक और उनका बनाया प्रबंधन होता है। हमें उसी कंपनी में पूंजी लगानी चाहिए जिसका कामकाज पारदर्शी हो, प्रबंधन ईमानदार हो और उसे पूंजी का सही नियोजन आता हो। जिस कंपनी के प्रवर्तकों ने अपने शेयरों का कुछ हिस्सा गिरवी रख रखा हो, उससे दूर रहना चाहिए क्योंकि गिरते बाज़ार की भंवर इन्हें डुबा देती है। इस हफ्ते बायोफार्मा सेगमेंट की सबसे दबंग कंपनी…औरऔर भी

एनपीपीए (नेशनल फार्मा प्राइसिंग अथॉरिटी) ने घरेलू कंपनियों को राहत देने के मकसद से 62 दवाओं के दाम बढ़ा दिए हैं। जिन दवाओं के दाम बढ़ाए गए हैं, उनमें ज्यादातर देश में निर्मित इंसुलिन हैं। साथ ही एनपीपीए ने पिछले सप्ताह हुई समीक्षा बैठक में 14 दवाओं के दाम घटाए दिए हैं, जबकि 21 दवाओं की कीमत जस की तस रखी गई है। जिन दवाओं के दाम बढ़ाए गए हैं, उनमें से ज्यादातर का उपयोग डायबिटीज औरऔरऔर भी

बायोकॉन लिमिटेड दवा व्यवसाय से ज्यादा अपनी चेयरमैन व प्रबंध निदेशक किरण मजुमदार शॉ के नाम से जानी जाती है। बीते शुक्रवार, 21 जनवरी को उन्होंने बैंगलोर में कंपनी के दिसंबर 2010 तिमाही के नतीजे पेश करते हुए कहा था, “बायोकॉन ने अब तक का सबसे ज्यादा कर-बाद लाभ घोषित किया है और यह 100 करोड़ के पार चला गया है। कंपनी का परिचालन लाभ मार्जिन भी इस तिमाही में 24 फीसदी बढ़ गया है। यह हमारेऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने इस साल फरवरी में ही ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) की सलाह पर छह विशेषज्ञों की एक कमिटी बना दी थी जिसे तय करना था कि भारत में डायबिटीज की दवा रोज़िग्लाइटाज़ोन की बिक्री व इस्तेमाल पर कैसे बैन लगाया जाए। तब तक अमेरिका का खाद्य व औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) ढिढोरा पीट चुका था कि इस दवा के इस्तेमाल से मरीज को दिल की बीमारी हो सकती है और वह मर भी सकता है।औरऔर भी