दुनिया के 20 प्रमुख देशों के समूह जी-20 की बैठक जब शुरू हो रही हो, अमेरिका व यूरोप समेत तमाम विकसित देशों की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई हों, प्रमुख मुद्राओं में युद्ध की स्थिति आ गई हो, तमाम केंद्रीय बैंक व बड़े निवेशक सुरक्षा के लिए सोने की तरफ भाग रहे हों, ठीक उस वक्त विश्व बैंक भी सोने की अहमियत बताने लगे तो किसी का भी चौंकना स्वाभाविक है। लेकिन विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट जॉयलिक नेऔरऔर भी

ग्रीन रिवोल्यूशन सीधे-सीधे भारत में हरित क्रांति के रूप में स्वीकार हो गई और कई दशकों तक उसका असर भी देखा गया, पर एवरग्रीन रिवोल्यूशन को सदाबहार क्रांति कहना शायद मुश्किल होगा। लेकिन भारत दौरे पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने विश्व में खाद्य सुरक्षा हासिल के लिए ग्रीन के बाद अब एवरग्रीन रिवोल्यूशन की पेशकश की है। उन्होंने राजधानी दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधितऔरऔर भी

वैश्विक समृद्धि सूचकांक में भारत दस स्थान फिसलकर 88वें स्थान पर आ गया है। लंदन के लेगाटुम इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार इस सूचकांक में भारत पिछले साल के 78वें स्थान पर था। संस्थान का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा प्रणाली के साथ-साथ उद्यमी बुनियादी ढांचे की कमजोरी से भारत की रैकिंग घटी है। इस सूचकांक में 110 देशों को शामिल किया गया है जिनमें शीर्ष पर नॉर्वे और उसके बाद क्रमशः डेनमार्क, फिनलैंड, आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंडऔरऔर भी

दुनिया की प्रमुख इस्पात कंपनी आर्सेलर मित्तल ने भारत के लिए नई रणनीति तैयार की है। कंपनी अब भारत में बड़े-बड़े संयंत्र लगाने के बजाय छोटी इकाइयां लगाएगी। शुरुआत में कंपनी का इरादा झारखंड, उड़ीसा और कर्नाटक जैसे राज्यों में छोटी इकाइयां लगाने का है। हालांकि कंपनी ने इसके साथ ही स्पष्ट किया है कि वह संबंधित राज्य सरकारों के साथ हुए करार के तहत इन इस्पात संयंत्रों की क्षमता बाद में बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता पूरीऔरऔर भी

ब्रिटेन का बिजनेस दैनिक फाइनेंशियल टाइम्स भारतीय बाजार में उतरना चाहता है, पर इसके लिए उसे अनुमति नहीं मिल पाई है। अखबार के संपादक ने कहा है कि भारत आने की अनुमति नहीं मिलने से उन्हें काफी निराशा है। इस आर्थिक अखबार के संपादक लायनल बार्बर ने कहा, ‘‘हम भारत में सीधे प्रतिस्पर्धा करना चाहते हैं। हम पिछले 20 साल से यहां आने का प्रयास कर रहे हैं। यह निराशाजनक है।’’ बार्बर ने भारत के प्रिंट मीडियाऔरऔर भी

दुनिया में इस समय 500 करोड़ मोबाइल सब्सक्राइबर हैं, जबकि इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 180 करोड़ से ज्यादा है। इंटरनेशनल टेलिकम्युनिकेशंस यूनियन (आईटीयू) का आकलन है कि 2015 तक दुनिया की आधी आबादी तक ब्रॉडबैंड की पहुंच होगी। चीन में अभी 36.40 करोड़ ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं, जबकि भारत में इनकी संख्या केवल 90 लाख है। इंटरनेट भाषाओं के बंधन भी तोड़ रहा है। 1996 में इंटरनेट इस्तेमाल करनेवाले 80 फीसदी लोग अंग्रेजी भाषी थे। 2007 तक यहऔरऔर भी

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का कहना है कि उनका देश अपना प्रतिस्पर्धी स्थान खो रहा है और भविष्य की नौकरियां भारत जैसे देशों के युवाओं के हाथ में होंगी, जहां शिक्षा क्षेत्र में भारी निवेश किया जा रहा है। उन्होंने अमेरिका के लोवा शबर में आयोजित एक सार्वजनिक सभा में कहा, ‘‘आप देखिए चीन, भारत और ब्राजील जैसे देश शिक्षा प्रणाली और बुनियादी ढांचे में जमकर निवेश कर रहे हैं। कहां हम अव्वल होते थे, मसलन कॉलेजऔरऔर भी

चीन और भारत के बीच अभी तक टेलिकॉम के तार समुद्र में बिछी केबलों के जरिए जुड़े हैं। लेकिन भूकंप वगैरह के चलते इनके नष्ट हो जाने का खतरा है। इसलिए दोनों देशों को जमीन के भीतर केबल से जोड़ने की योजना पर काम शुरू किया जा रहा है। इस विशाल परियोजना के लिए चीन की सबसे बड़ी फिक्स्ड लाइन टेलिफोन कंपनी चाइना टेलिकॉम भारत के तमाम टेलिकॉम ऑपरेटरों से बातचीत कर रही है। इस प्रस्तावित केबलऔरऔर भी

कई यूरोपीय देशों द्वारा भारतीय जेनेरिक दवाओं को जब्त किए जाने को लेकर जारी विवाद विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में एक लंबी लड़ाई का रूप लेने लगा है क्योंकि दोनों पक्ष इस संबंध में किसी हल पर नहीं पहुंच सके हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम इस बातचीत से संतुष्ट नहीं हैं। विश्व व्यापार संगठन की पहल पर भारत और यूरोपीय संघ के बीच जिनेवा में पहले ही दो दौर की बातचीत हो चुकी है।औरऔर भी

भारत में 577 विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईज़ेड) को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें से 114 में औद्योगिक गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। इनमें से 90 फीसदी का आकार 3 वर्ग किलोमीटर से कम है। दूसरी तरफ चीन में केवल पांच एसईज़ेड हैं। इसमें से अकेले शेनझेन एसईज़ेड ही 2000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। भारत ने 1965 में ही एशिया का पहला निर्यात संवर्धन ज़ोन कांडला (गुजरात) में बना लिया था। चीन ने हमसे सीखकर 1980 मेंऔरऔर भी