ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर वही, चार्ट वही, वही सारे इंडीकेडर। पर कामयाब ट्रेडरों के तरीके भिन्न होते हैं। उसी तरह जैसे एक ही परिवार के चार भाई एक-सा भोजन करने के बावजूद अलग अंदाज़ में बढ़ते हैं। हर किसी को अपने व्यक्तित्व के हिसाब से ट्रेडिंग सिस्टम बनाना पड़ता है। एसएमए व ईएमए, आरएसआई, कैंडल का पैटर्न, संस्थाओं की खरीद व बिक्री का संतुलन। कुछ तो बस इन्हीं से बाज़ार पीट डालते हैं। अब नब्ज़ मंगल के बाज़ार की…औरऔर भी

15 सितंबर से लेकर 10 अक्टूबर तक के 17 ट्रेडिंग सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट में 7847.23 करोड़ रुपए (1.28 अरब डॉलर) की शुद्ध बिकवाली की, निफ्टी 2.26% गिर गया। क्या इसका मतलब यह कि मोदी प्रभाव से साल 2014 में अब तक करीब 25% बढ़ा बाज़ार ठंडा होने लगा है और विदेशी निवेशकों में निराशा घर करने लगी है? दरअसल, यह करेक्शन है बस। अब नए हफ्ते की दस्तक…औरऔर भी

मेरे एक जाननेवाले हैं, राजस्थान के। पढ़ाई से इंजीनियर, लेकिन पेशे से स्टॉक ट्रेडर। गजब का धैर्य है। इंट्रा-डे नहीं, स्विंग, मोमेंटम या पोजिशनल ट्रेड करते हैं। महीने में कितना कमाते हैं, साफ नहीं बताते। कमाल यह कि स्टॉप लॉस ही नहीं लगाते। कहते हैं अच्छा चुनो, डटे रहो। ट्रेडिंग में भी लंबा अंदाज़ अपनाते हैं। आईटीसी में 315 पर 365 का लक्ष्य बनाकर घुसे तो वहीं पर निकले। अंदाज़ है अपना-अपना। पकड़ें अब शुक्र की दिशा…औरऔर भी

इंट्रा-डे ट्रेडिंग में सौदे उसी दिन कट जाते हैं और हम अगली सुबह तक की अनिश्चितता से बच जाते हैं। स्विंग ट्रेड में भी यह सुकून पाना संभव है बशर्ते सही योजना बनाकर उसका अनुशासनबद्ध पालन किया जाए। सोचिए कि जो हमारे वश में नहीं है, उसकी चिंता निरर्थक है और जितना वश में है, उसे योजना से बांधा जा सकता है। भाव उलट-पुलटकर तभी देखें जब आपको सौदा करना या काटना हो। अब मंगलवार का दशा-दिशा…औरऔर भी

आप चाहें तो सर्वे करके देख सकते हैं कि जो लोग ट्रेडिंग में टिप्स के पीछे भागते हैं, वे मरीचिका के चक्कर में भागते हिरण की तरह ताज़िंदगी प्यासे रह जाते हैं। लंबे निवेश में यकीनन रिसर्च आधारित सलाह काम करती है। लेकिन ट्रेडिंग में घुसने, निकलने, घाटा खाने और पूंजी बचाने व बढ़ाने का सिस्टम बनाकर अनुशासन का पालन न किया, लालच व डर को हावी होने दिया तो कमाई मुमकिन नहीं। अब बुधवार की ट्रेडिंग…औरऔर भी

ट्रेडिंग का मकसद है खरीदने-बेचने का ऐसा चक्कर चलाना ताकि हमारे खाते में बराबर धन आता रहे। इसके दो खास तरीके हैं। दोनों के तौर-तरीके अलग हैं। स्विंग ट्रेड में पांच-दस दिन के लिहाज से एक-दो सौदे करते हैं और रिस्क रिवॉर्ड अनुपात 1:3 से ज्यादा रखते हैं। वहीं इंट्रा-डे में नियम है कि दिन में कम से कम दस सौदे करने चाहिए और न्यूनतम रिस्क रिवॉर्ड अनुपात 1:2.5 का होना चाहिए। अब नए हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

गिरता स्टॉक थोड़ा उठ जाए तो क्या! बढ़ता स्टॉक थोड़ा गिर जाए तो क्या!! नियम कहता है कि साल-छह महीने से बढ़ते शेयर को शॉर्ट न करें और साल-छह महीने से गिरते शेयर में लांग पोजिशन न पकड़ें। ऐसा नहीं कि गिरते शेयर थोड़े दिन बढ़ नहीं सकते या बढ़ते शेयर कुछ दिन गिर नहीं सकते। लेकिन अपट्रेंडिंग स्टॉक्स में लांग और डाउनट्रेंडिंग स्टॉक्स में शॉर्ट करना ट्रेडिंग में रिस्क को घटाने की रणनीति है। अब आगे…औरऔर भी

हीरो मोटोकॉर्प का शेयर खट-खटाखट बढ़ रहा है। 18 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित किए तो 1984.85 रुपए पर बंद हुआ था। अभी दिवाली के दिन 26 अक्टूबर को मुहूर्त ट्रेडिंग में उसका बंद भाव 2105.65 रुपए रहा है। इस तरह छह कारोबारी सत्रों में वह छह फीसदी से ज्यादा बढ़ चुका है। क्या बनता है इस स्टॉक में लाभ का योग? आइए समझने की कोशिश करते हैं। हीरो मोटोकॉर्प, देश की सबसे बड़ी मोटरसाइकिलऔरऔर भी

बाजार ने कल साबित करने की कोशिश की कि अमेरिकी बाजार से हमारा कोई वास्ता नहीं रह गया है, जबकि ग्लोबल होती जा रही दुनिया का सच यह नहीं है। दरअसल बाजार के महारथियों ने कुछ एफआईआई की मदद से चुनिंदा स्टॉक्स को खरीदकर बनावटी माहौल बनाने की कोशिश की थी। खैर, कल जो हुआ, सो हुआ। आज दोपहर करीब डेढ़ बजे के बाद बाजार ने बढ़त पकड़ ली तो कारोबार के अंत तक सेंसेक्स 0.89% बढ़करऔरऔर भी

रीको ऑटो इंडस्ट्रीज दोपहिया से लेकर चार-पहिया वाहनों के कंपोनेंट बनानेवाली बड़ी कंपनी है। कितनी बड़ी, इसका अंदाजा कंपनी के धारुहेड़ा, मानेसर व गुड़गांव के संयंत्रों को देखकर लगाया जा सकता है। हीरो मोटोकॉर्प से लेकर मारुति तक की बड़ी सप्लायर है। आज से नहीं, करीब पच्चीस सालों से। लेकिन 2006 से ही उसके सितारे गर्दिश में हैं। पहले मजदूरों की 56 दिन लंबी हड़ताल हुई। फिर दुनिया के वित्तीय संकट ने भारत को आर्थिक सुस्ती मेंऔरऔर भी