बाजार में कदमताल जारी है। उठता है। गिरता है। बढ़ता है। पीछे आता है। फिर बढ़ जाता है। लेकिन एक बात साफ है कि बाजार से जबरदस्ती खेलने का दौर अब खत्म होता दिख रहा है क्योंकि जहां निफ्टी को सायास दबाकर रखा जा रहा है, वहीं इसमें शामिल स्टॉक्स की खरीद शुरू हो गई है। यह इशारा इस बात का है कि बाजार अब अपनी तलहटी पकड़ चुका है। हालांकि ट्रेडरों में इस समय ताजातरीन सोचऔरऔर भी

यह वाकई बहुत बुरी बात है कि बिजनेस चैनल अब दर्शकों की भावनाओं के साथ खेलने लगे हैं। एक बिजनेस चैनल और उससे जुड़ी समाचार एजेंसी ने खबर फ्लैश कर दी कि सरकार पेट्रोलियम तेलों पर फिर से नियंत्रण कायम करने जा रही है। कितनी भयंकर बेवकूफी की बात है? सुधारों को पटलने का सवाल कहां उठता है? यह तो तभी हो सकता है जब सीपीएम केंद्र सरकार की लगाम थाम ले! स्वाभाविक रूप से पेट्रोलियम मंत्रीऔरऔर भी

देश में एक जनवरी 2008 तक की स्थिति के अनुसार पंजीकृत होम्योपैथी डॉक्टरों की संख्या 2,39,285 है। सरकार मानती है कि होम्योपैथी कम खर्चीली और कोई दुष्प्रभाव नहीं होने वाली चिकित्सा पद्धति है। लेकिन होम्योपैथी औषधियों के कारोबार के आकार का पता लगाने के लिए कोई कार्यविधि नहीं है। सरकार ने होम्योपैथी को बढ़ावा देने के लिए होम्योपैथी फार्माकोपिकल प्रयोगशाला, केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान की स्थापना की है।और भीऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने पैसा लेकर रातों-रात चंपत हो जाने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लाखों निवेशकों को बड़ी राहत देते हुए व्यवस्था दी है कि सरकार को इस तरह के धोखाधड़ी करने वाले संगठनों की संपत्ति जब्त करने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि इस तरह का कानून संवैधानिक रूप से वैध है और यह भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों या कंपनी कानून के विरूद्ध नहीं है। कोर्टऔरऔर भी

बीएसई सेंसेक्स 623 अंक उठा था तो हिचकी का आना लाजिमी था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम की चिंता में बाजार 128 अंक गिरकर खुला। फिर 157 अंक ऊपर चढ़ गया। और, फिर चौरस हो गया। इस बीच बाजार के स्वघोषित वित्त मंत्री (एनालिस्ट) बजट की मीनमेख निकालने में जुटे हैं। खासकर राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के बारे में उनका कहना है कि इसे हासिल नहीं किया जा सकता। ऐसी ही गलती सीएलएसए ने 2003औरऔर भी

बामर लॉरी एंड कंपनी (बीएसई – 523319, एनएसई – BALMLAWRIE) बड़ी विचित्र कंपनी है। यह सरकारी कंपनी है, लेकिन प्रवर्तक के रूप में न तो भारत सरकार और न ही किसी राज्य सरकार के पास इसके कोई शेयर हैं। इसके सारे के सारे शेयर, पूरी की पूरी 16.29 करोड़ रुपए की इक्विटी पब्लिक के पास है। सरकार इसमें प्रवर्तक नहीं, बल्कि पब्लिक के खाते से अप्रत्यक्ष रूप से शामिल है। असल में इसकी 61.80 फीसदी इक्विटी बामरऔरऔर भी

जगन्नाधम तुनगुंटला हाल में 3 जी या तीसरी पीढ़ी के स्पेक्ट्रम की नीलामी इतनी कामयाब रही कि सरकार को इससे करीब 67,700 करोड़ रुपए मिल सकते हैं, जबकि बजट अनुमान करीब 35,000 रुपए का ही था। यह तकरीबन दोगुनी रकम है। इसके अलावा सरकार को 2 जी स्पेक्ट्रम से वन-टाइम फीस के रूप में 14,500 करोड़ रुपए मिल सकते हैं हालांकि इस पर अभी विवाद चल रहा है जिसका कोई समाधान नहीं निकला है। इस तरह केवलऔरऔर भी