सुप्रीम कोर्ट ने मशहूर इंजीनियरिंग व कंस्ट्रक्शन कंपनी लार्सन एंड टुब्रो की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उसने 1300 करोड़ रुपए के सरकारी टेंडर में अपनी बोली को खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। सरकार ने यह टेंडर 20 समुद्री गश्ती पोतों (ऑफशोर पैट्रोल वेसेल) बनाने के लिए निकाला था। गुरुवार को सुनाए गए आदेश में न्यायमूर्ति अल्तमास कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया। हाईकोर्ट नेऔरऔर भी

खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति की दर 23 अप्रैल को खत्म हुए सप्ताह में घटकर 8.53 फीसदी पर आ गई। लेकिन ईंधन व बिजली का सूचकांक इसी दौरान 13.53 फीसदी बढ़ गया। नतीजतन प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर दहाई अंक में 12.11 फीसदी पर डटी हुई है। बता दें कि थोक मूल्य सूचकांक में खाद्य वस्तुओं का भार 14.34 फीसदी और ईंघन व बिजली का 14.91 फीसदी है। वैसे, तुलनात्मक रूप से देखें तो प्राथमिक वस्तुओं की महंगाईऔरऔर भी

अपैल खत्म, मई आ गया। अप्रैल में तो शेयर बाजार कंपनियों के नतीजों के हिसाब से डोलता रहा। जिन कंपनियों ने उम्मीद से बेहतर नतीजे घोषित किए, उनके शेयर ठीकठाक चले, जबकि जो कंपनियां बाजार की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं, उनके शेयरों को तोड़ दिया गया। इनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, इनफोसिस व सेल जैसी कंपनियां शामिल हैं। ऐसा होना एकदम स्वाभाविक था। इसलिए इसमें किसी अचंभे की बात नहीं है। वैसे, अभी अगले दो हफ्ते तक मिडऔरऔर भी

राजद्रोह का मतलब राष्ट्रद्रोह नहीं होता। हालांकि हर सरकार यही बताने की कोशिश करती है। लेकिन राष्ट्र किसी भी राज से बहुत-बहुत ऊपर होता है। जो इस बात को समझता है, वही सच्चा देशभक्त है।और भीऔर भी

सतर्कता प्रणाली को दुरुस्त करने और भ्रष्टाचार पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने मुख्य सतर्कता अधिकारियों के काम के आकलन समेत कई उपाय करने का निर्णय किया है। सीवीसी के अधिकारियों ने कहा कि आयोग ने सभी मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक इकाइयों और बैंकों समेत केंद्र सरकार के अन्य प्रतिष्ठानों को सतर्कता संबंधी सभी गतिविधियों को कड़ाई के साथ रिपोर्ट करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा मुख्यऔरऔर भी

अण्णा ने लाखों लोगों के सक्रिय समर्थन से जंग जीत ली है। ऐसा सिर्फ इसलिए मुमकिन हुआ क्योंकि मुद्रास्फीति के बोझ तले दबा आम आदमी भ्रष्टाचार से भयंकर रूप से त्रस्त है। लगता है जैसे, आम आदमी को भ्रष्टाचार के तंदूर में डालकर नेता व अफसर अपनी रोटियां सेंक रहे हों। दरअसल, भ्रष्टाचार मुद्रास्फीति की जड़ है। जितना ज्यादा भ्रष्टाचार, उतना ज्यादा काला धन, उतनी ही ज्यादा सरकारी अफसर की कमाई और इसके चलते आम आदमी परऔरऔर भी

व्यक्ति की नैतिकता हो सकती है। लेकिन सरकारों की कोई नैतिकता नहीं होती। सत्ता की चंडाल चौकड़ी को बचाना ही उसका चरित्र है। हां, वह अवाम की निगाह में जरूर नैतिक दिखना चाहती है।और भीऔर भी

फंडामेंटल जस के तस, फिर भी बाजार खटाखट 1000 अंक ऊपर चला गया! लोगों को अचानक अर्थव्यवस्था व कॉरपोरेट क्षेत्र की मजबूती का इलहाम हो रहा है। लेकिन हम लगातार इस सच से निवेशकों को वाकिफ कराते रहे हैं कि ताकि उनका विश्वास गिरने न पाए। हालांकि हमें यह भी पता है कि निवेशक जो देखते-सुनते हैं, अफवाहों की ताकतवर मशीनरी जैसा उन्हें समझाती है, वे उसी में बह जाते हैं। हर कोई अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और मार्केटऔरऔर भी

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कहा है कि भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) ने गरीबों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए रखी गई रकम का बड़ा हिस्सा मंत्री के लिए हेलीकॉप्टर किराये पर लेने व जनसंपर्क गतिविधियों पर खर्च किया है। कैग द्वारा गुरुवार को संसद में पेश रपट में यह खुलासा किया गया है। इसमें कहा गया है कि सेल ने 2006-10 के दौरान देश भर में अपने संयंत्रों में चिकित्सा शिविर लगाने पर 17.21औरऔर भी

खाद्य वस्तुओं पर आधारित मुद्रास्फीति लगातार दो सप्ताह तक इकाई अंक में रहने के बाद खाद्य मुद्रास्फीति फिर दहाई अंक में पहुंच गई है। सब्जी, फल, अंडा और मछली जैसी चीजों के दाम बढ़ने से 12 मार्च को समाप्त सप्ताह के दौरान खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 10.05 फीसदी हो गई। इससे पिछले सप्ताह में यह 9.42 फीसदी थी और उससे पहले हफ्ते में यह 9.52 फीसदी थी। खाद्य मुद्रास्फीति में इस वृद्धि से सरकार और रिजर्व बैंक कीऔरऔर भी