सरकारी है बामर लॉरी एंड कंपनी

बामर लॉरी एंड कंपनी (बीएसई – 523319, एनएसई – BALMLAWRIE) बड़ी विचित्र कंपनी है। यह सरकारी कंपनी है, लेकिन प्रवर्तक के रूप में न तो भारत सरकार और न ही किसी राज्य सरकार के पास इसके कोई शेयर हैं। इसके सारे के सारे शेयर, पूरी की पूरी 16.29 करोड़ रुपए की इक्विटी पब्लिक के पास है। सरकार इसमें प्रवर्तक नहीं, बल्कि पब्लिक के खाते से अप्रत्यक्ष रूप से शामिल है। असल में इसकी 61.80 फीसदी इक्विटी बामर लॉरी इनवेस्टमेंट्स के पास है और बामर लॉरी इनवेस्टमेंट्स में 59.67 फीसदी इक्विटी भारत सरकार (राष्ट्रपति) की है। इस तरह परोक्ष नियंत्रण के कारण बामर लॉरी एंड कंपनी सरकार की कंपनी हो गई।

कंपनी में जीआईसी, न्यू इंडिया एश्योरेंस, यूटीआई, एलआईसी और नेशनल इंश्योरेंस जैसी सरकारी बीमा कंपनियों के पास 10.82 फीसदी शेयर हैं। इस तरह 72.62 फीसदी शेयरों पर परोक्ष सरकारी नियंत्रण के बाद बाकी बचे 27.38 फीसदी शेयरों में से 1.75 फीसदी शेयर एफआईआई के पास हैं। सीधे-सीधे आम निवेशकों के पास इसके ज्यादा शेयर नहीं हैं। इसलिए इसमें वोल्यूम ज्यादा नहीं होता। बीएसई में बीते दो हफ्ते का औसत कारोबार 2617 शेयरों का रहा है। हां, कल जरूर इसमें अचानक 17,966 शेयरों का कारोबार हो गया है, जबकि एनएसई में हुआ कारोबार 22,039 शेयरों का था।

इसके शेयर कल बीएसई में 1.04 फीसदी गिरकर 597.15 रुपए और एनएसई में 2.48 फीसदी गिरकर 591 रुपए पर बंद हुए हैं। (आर्बिट्राज का क्या मौका है! एनएसई में खरीदो और बीएसई में बेच डालो)। बीएसई के बंद भाव के आधार पर यह शेयर मात्र 7.95 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है क्योंकि इसका ठीक पिछले बारह महीनों का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 75.11 रुपए है। शेयर की बुक वैल्यू 321.32 रुपए है। इस तरह शेयर का बाजार मूल्य उसकी बुक वैल्यू से 1.86 गुना है जिसे निवेश करने का अच्छा आधार माना जा सकता है। जानकार बताते हैं कि यह शेयर साल भर में 650-700 रुपए तक जा सकता है।

कंपनी ने सितंबर 2010 की तिमाही में 500.49 करोड़ रुपए की शुद्ध बिक्री पर 29.53 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है, जबकि साल भर पहले सितंबर 2009 की तिमाही में उसकी बिक्री 393.14 करोड़ और शुद्ध लाभ 26.92 करोड़ रुपए था। कंपनी ने ये अच्छे नतीजे 29 अक्टूबर को घोषित किए थे। लेकिन शेयर उस समय 650 रुपए से ऊपर था और अब 600 रुपए से नीचे आ गया है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2009-10 में 1638.02 करोड़ रुपए की बिक्री पर 117.29 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा कमाया है।

कोलकाता मुख्यालय वाली इस कंपनी का इतिहास बड़ा पुराना है। 1867 में ब्रिटिश शासन में स्टॉकलैंड के दो नागरिकों – जॉर्ज स्टीफन बामर और अलेक्जैंडर लॉरी ने पार्टनरशिप फर्म के रूप में इसे बनाया था। शुरुआती सालों में कंपनी चाय, शिपिंग, बीमा, बैंकिंग, व्यापार व मैन्यूफैक्चरिंग जैसे विविध क्षेत्रों में धंधा करने लगी। भारत सरकार के नियंत्रण में आ जाने के बावजूद उसकी विविधता जारी है। वह औद्योगिक पैकेजिंग, बैरल व ड्रम, एलपीजी सिलिंडर, ग्रीस व लुब्रिकेंट, लेदर केमिकल और मैरीन फ्रेट कंटेनर तक बनाती है। वो टूर-ट्रैवल, चाय का निर्यात व व्यापार और इंजीनियरिंग सेवाएं भी देती है।

मोटे तौर पर उसकी तीन मैन्यूफैक्चरिंग और तीन सेवा क्षेत्र की इकाइयां हैं। उसकी आय का 60 फीसदी हिस्सा सेवाओं और 40 फीसदी हिस्सा मैन्यूफैक्चरिंग से आता है। चालू वित्त वर्ष में उसने 2000 करोड़ रुपए की बिक्री का लक्ष्य रखा है और पांच साल में इसे 3500 करोड़ रुपए पर पहुंचा देने का लक्ष्य है। इसके लिए वह अगले चार सालों में 300 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। कंपनी का चाय का धंधा अभी घाटे में चल रहा है। लेकिन वह चाय के अपने बांड – तरंग और इंडियन समर को जल्दी ही फिर से लांच करनेवाली है। वहीं कंपनी को अपने लुब्रिकेंट व ग्रीस में काफी बेहतर धंधे की उम्मीद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.