अमेरिका के ऋण-संकट ने पूरी दुनिया के बाजारों की हालत पटरा कर दी है तो भारतीय बाजार कैसे सलामत बच सकता था। निफ्टी एक फीसदी से ज्यादा गिरकर 5500 के नीचे पहुंच गया। फिर भी मुझे लगता है कि अपने यहां असली तकलीफ रोल्स की है। चूंकि यह फिजिकल सेटलमेंट है नहीं, तो ट्रेडरों के पास कैश का अंतर भरने के अलावा कोई चारा नहीं है। यह हमारे बाजार में आई तीखी गिरावट का मूल कारण हैऔरऔर भी

दूर के ढोल ही नहीं, भगवान भी सुहाने लगते हैं। पास आकर भगवान पड़ोस में हमारी तरह रहने लगें तो हम उनकी भी बखिया उधेड़ डालें। इसीलिए सत्ता-लोलुप संत और नेता हम से दो गज दूर ही रहते हैं।और भीऔर भी

मैंने सुना और अखबारों में पढ़ा भी कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) दोनों ही छोटी व मध्यम आकार की कंपनियों के लिए जल्दी ही अलग एसएमई एक्सचेंज शुरू करने जा रहे हैं। इस एक्सचेंज को लेकर बहुत सारे ट्रेडर और निवेशक काफी उत्साहित हैं। छोटी कंपनियों के आईपीओ में अमूमन कॉरपोरेट गवर्नेंस का स्तर अच्छा नहीं होता। ऐसे ज्यादातर आईपीओ खुलने से पहले ही बिक जाते हैं। आईपीओ की लिस्टिंग पर भावऔरऔर भी

हर बिंदु पर भ्रम है, अनिर्णय है, द्वंद्व है। भगवान या संत के नाम पर इन्हें सुलझाने का भ्रम पैदा किया जाता है। लेकिन जो लोग वाकई इन्हें सुलझाने में सिद्ध हो जाते हैं, सत्ता उनकी चेरी बन जाती है।और भीऔर भी

हमारा काम बस इतना है कि हम बीज और मिट्टी को, आग और घी को, सिद्धांत व व्यवहार को, भगवान व इंसान को खींचकर एकदम करीब ले आएं। बाकी काम प्रकृति व समाज के नियम अपने आप कर लेंगे।और भीऔर भी

लौकिक को अलौकिक बता दो। कर्मफल को विधि का विधान बता दो। मूर्तिभंजक की मूर्तियां बना दो। सुधारक को आराध्य बना दो। इंसान को भगवान बना दो। संघर्ष की धार कुंद करने के ये पक्के सूत्र हैं।और भीऔर भी

सभी अपने-अपने काम में लगे हैं। आप भी, मै भी। आप मेरी सुनें, जरूरी नहीं। मैं आपकी मानूं, जरूरी है। लेकिन न जाने किस रूप में नारायण मिल जाएं। इसलिए किसी की भी उपेक्षा करना ठीक नहीं।और भीऔर भी

जो लोग आत्म-मुग्ध होते हैं, भगवान की जरूरत उन्हें पड़ती हैं और जो अपने से मुक्त हैं, उन्हें गुरु की। भगवान तो अपनी छाया है। उससे क्या डरना और क्या पाना? हां, गुरु जरूर हमें बहुत कुछ देता है।और भीऔर भी

यहां से वहां तक सारे फैसले तो लोग ही करते हैं। दूर से सब कुछ धुंधला दिखता हैं। यह धुंधलका और गहरा हो जाए, साफ कुछ न दिखे, इसलिए लोग भगवान व विधान का पाखंड खड़ा कर देते हैं।और भीऔर भी

दुनिया के हर नए-पुराने विचार पर इंसान की छाप है। जिस तरह सुदूर पहाड़ों से धारा के साथ बहता आ रहा पत्थर नीचे पहुंचकर शिव बन जाता है उसी तरह इंसानी विचार भी एक दिन ईश्वरीय बन जाते हैं।और भीऔर भी