भगवान और धर्म की शुरुआत समाज में सुख-शांति के साधन के रूप में हुई थी। सदियों तक सब कुछ राजी-खुशी चलता रहा। समस्या तब से शुरू हुई जब इन्हें साधन के बजाय साध्य बना दिया गया।और भीऔर भी

हम अगर ताज़िंदगी एक ही जगह कदमताल करते रह जाते हैं तो इसके लिए हालात कम, हम ज्यादा दोषी हैं क्योंकि हालात किसी भगवान से नहीं, हमारे जैसे इंसानों से ही बनाए हैं जिनसे हम लोहा ले सकते हैं।और भीऔर भी

भगवान को क्या खोजते हैं! खोजना ही है तो खुद को खोजिए जो इस भवसागर में कहीं खो गया है। अपनी खोज करेंगे तो खुद को पाने पर तर जाएंगे। भगवान को खोजेंगे तो दूसरों के धंधे का शिकार बन जाएंगे।और भीऔर भी

जो भगवान का जितना बड़ा भक्त है, वो सच्चे दोस्तों से उतना ही महरूम होता है। बेचारा अंदर से निपट अकेला होता है। उसका अकेलापन दूर कीजिए। दोस्त बनिए। भगवान का भ्रम मिटता चला जाएगा।और भीऔर भी

आज भी ब्रह्म सत्यम् जगत मिथ्या की बात बोलते जाना वैसा ही है, जैसा कि यह कहना कि सूरज धरती के चक्कर लगाता है। कितनी उल्टी बात स्थापित की गई है कि आत्मा सत्य है और शरीर मिथ्या है। जबकि हकीकत यह है कि जीवित शरीर ही पहला और अंतिम सत्य है क्योंकि भूत (संस्कार) और वर्तमान (माहौल) के मेल से जो चेतना बनती है, व्यक्तित्व बनता है, वह शरीर के मरते ही विलुप्त हो जाता है।औरऔर भी

करते हम हैं और नाम दूसरों का लगा लेते हैं। इससे हम तो कमजोर के कमजोर रह जाते हैं और दूसरा भगवान और भगवान, सर्व-शक्तिमान बन जाता है। अन्यथा उनकी औकात कंकड़ से ज्यादा नहीं।और भीऔर भी

इंसानों की बस्ती में हम या तो अपने या दूसरों के कर्मों का नतीजा भुगतते हैं। यहां छिपकर कहीं कोई खुदा नहीं बैठा जो हमारी सदिच्छाओं को पूरा करता रहे या बिना किसी बात के हमें दंडित करता रहे।और भीऔर भी

हफ्ते के सातों दिन किसी न किसी देव को समर्पित हैं जो हमारे ही अंतर्निहित तत्वों के नाम हैं। इनमें से सबसे प्रखर देव सूर्य और शनि हैं। लेकिन इन दोनों ही दिनों हम निढाल पड़े जम्हाई ले रहे होते हैं!और भीऔर भी

पत्थर से लेकर नेता व अभिनेता तक में प्राण-प्रतिष्ठा हम्हीं करते हैं। फिर उन्हें भगवान बनाकर खुद पिद्दी बन जाते हैं। अरे! अपनी आस्था को बाहर नहीं, अंदर फेकिए। तब देखिए उसका असर और असली प्रताप।और भीऔर भी

जब तक माया है, तभी तक भगवान है। माया के हटते ही भगवान भी उड़न-छू। तब हमें उस विराट सत्ता की अनुभूति होती है जो अंदर-बाहर हिलोर मार रही है और दुनिया का विराट छल भी तब बेपरदा हो जाता है।  और भीऔर भी