खाद्य मुद्रास्फीति की दर बढ़कर दस हफ्तों के शिखर पर जा पहुंची है। 18 दिसंबर को खत्म सप्ताह में यह 14.44 फीसदी दर्ज की गई है। यह वृद्धि इसलिए भी भयंकर हो जाती है क्योंकि साल भर पहले खाद्य मुद्रास्फीति 21.29 फीसदी बढ़ी थी। इसलिए यह महज तकनीकी या सांख्यिकीय मामला नहीं है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को भी यह बात स्वीकार करनी पड़ी जब उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति की ऊंची दर वास्तविक है और कम आधारऔरऔर भी

प्याज, लहसुन और दूसरी सब्जियों के दाम बढने से खाद्य मुद्रास्फीति की दर तीन हफ्ते बाद फिर से दहाई अंक में पहुंच गई है। 11 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति ढाई फीसदी से भी अधिक उछलकर 12.13 फीसदी हो गई है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का कहना है कि प्याज की बढ़ती कीमतें खाद्य मुद्रास्फीति की साप्ताहिक दरों को प्रभावित कर रही हैं। वैसे, प्याज निर्यात पर प्रतिबंध और आयात पर सीमा शुल्क करने काऔरऔर भी

चावल, फल-सब्जियों व दूध के दाम बढ़ने से चार दिसंबर को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति की दर 0.86 फीसदी बढ़कर 9.46 फीसदी पर पहुंच गई। इससे पिछले सप्ताह यह 8.60 फीसदी थी। यह लगातार दूसरा हफ्ता है जब खाने-पीने की वस्तुओं की मुद्रास्फीति बढ़ी है। नोट करने की बात यह है कि गुरुवार को रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक नीति की मध्य-तिमाही समीक्षा से आधे घंटे पहले ही खाद्य मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी किए गए। इन आंकड़ोंऔरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था इस साल पिछले तीन सालों की सबसे ज्यादा 9 फीसदी विकास दर हासिल कर सकती है, लेकिन मुद्रास्फीति की दर साल के अंत में रिजर्व बैंक के अनुमान से काफी ज्यादा रहेगी। यही नहीं, खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति तो 19.95 फीसदी पर पहुंच सकती है। वित्त मंत्रालय ने यह अनुमान अर्थव्यवस्था के छमाही विश्लेषण में पेश किया है। मंगलवार को यह विश्लेषण रिपोर्ट वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने संसद के दोनों सदनों में पेशऔरऔर भी

उत्पादन बढ़ने और खरीफ फसल की आवक से सब्जियों, गेहूं व दालों के दाम में गिरावट से 20 नवंबर को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति की दर घटकर चार माह के निचले स्तर 8.60 फीसदी पर आ गई है। इससे पिछले सप्ताह खाद्य मुद्रास्फीति 10.15 प्रतिशत पर थी। मानसून का मौसम समाप्त होने के साथ ही बाजार में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति में सुधार हुआ है। यह लगातार सातवां सप्ताह है जब खाद्य मुद्रास्फीति की दरऔरऔर भी

सब्जी व दालों का बाजार नरम होने से से 13 नवंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान खाद्य वस्तुओं पर आधारित मुद्रास्फीति की दर थोड़ा और घट कर 10.15 फीसदी पर आ गई। इससे पिछले सप्ताह में खाद्य महंगाई दर 10.3 फीसदी थी। बता दें कि छह सप्ताह से खाद्य मुद्रास्फीति में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। मानसून के बाद सब्जी और दालों की आपूर्ति सुधरने से खाद्य मुद्रास्फीति का दबाव कम हुआ है। सप्ताह केऔरऔर भी

मानसून की समाप्ति और खरीफ फसलों की आमद शुरू होने के बाद नवंबर के पहले हफ्ते में खाद्य मुद्रास्फीति दो फीसदी घटकर तीन माह के निचले स्तर 10.30 फीसदी पर आ गई। मुद्रास्फीति में आई इस नरमी से यह उम्मीद बन रही है कि जल्दी ही यह दस फीसदी से नीचे आ जाएगी। बारिश खत्म होने के बाद देश भर की मंडियों में खरीफ फसलों की आवक बढ़ने से खाद्य मुद्रास्फीति में लगातार पांचवें सप्ताह नरमी देखनेऔरऔर भी

आलू, प्याज और दूसरी सब्जियों की आपूर्ति में सुधार से 23 अक्तूबर को समाप्त सप्ताह में थोक मूल्य पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति की दर करीब फीसदी नीचे खिसककर 12.85 फीसदी रह गई। यह लगातार तीसरा सप्ताह है जब खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट का रुख रहा है। एक सप्ताह पहले यह 13.75 फीसदी दर्ज की गई थी। बुधवार को जारी सरकारी आंकडों के अनुसार सालाना आधार पर आलू के दाम 51.22 फीसदी तक नीचे आ गए जबकि सब्जियोंऔरऔर भी

खाने पीने की वस्तुओं की महंगाई में उतार-चढाव का दौर जारी है। फल, सब्जियों और कुछेक दालों के दाम बढ़ने से 21 अगस्त को समाप्त सप्ताह में थोक मूल्यों पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति एक सप्ताह पहले की तुलना में 81 आधार अंक (0.81 फीसदी) बढकर 10.86 फीसदी हो गई। सात अगस्त से लगातार दो हफ्ते रही गिरावट के बाद खाद्य मुद्रास्फीति में एक बार फिर मजबूती का रुख बना है। देश के विभिन्न भागों में बारिश औरऔरऔर भी

सरकार खुश है कि खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति 17 जुलाई को खत्म हफ्ते में इस साल पहली बार इकाई अंक में आ गई है। इसकी दर 9.67 फीसदी है, जबकि एक हफ्ते पहले यह 12.47 फीसदी है। इस तरह खाद्य पदार्थों के थोक मूल्य सूचकांक में 2.80 फीसदी की कमी आ गई है। इसमें खास योगदान आलू-प्याज का है। आलू साल भर पहले की तुलना में 46 फीसदी और प्याज 10 फीसदी से ज्यादा सस्ता हुआ है।औरऔर भी