आलोचकों की आलोचनाओं को धता बताते हुए बाजार में बजट का उत्साह कायम है। मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी साढ़े तीन फीसदी बढ़ गए। वैसे, सच कहूं तो हमें इस बात की कतई परवाह नहीं करनी चाहिए कि कोई बजट के बारे में क्या कह रहा है क्योंकि हकीकत यही है कि इस बार का बजट पिछले साल से बेहतर है और ऐसे सुधारों से भरा हुआ है जो शेयर बाजार को नई ऊंचाई पर ले जाऔरऔर भी

चालू खाते के बढ़ते घाटे से परेशान सरकार देश में विदेशी पूंजी को खींचने की हरचंद कोशिश कर रही है। इसी के तहत 2011-12 के बजट में जहां कॉरपोरेट बांडों को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निवेश सीमा बढ़ाकर 40 अरब डॉलर कर दी गई है, वहीं म्यूचुअल फंडों को अपनी इक्विटी स्कीमों में सीधे विदेशी निवेशकों से अभिदान या सब्सक्रिप्शन लेने की इजाजत दे दी गई है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने यह घोषणा करते हुएऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2011-12 का बजट देश और देश की अर्थव्यवस्था के हित में है। शेयर बाजार अभी इसे अपने हित में मानता है या नहीं, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता क्योंकि आखिरकार अर्थव्यवस्था ही बाजार की भी मजबूती का आधार बनती है। फिर आज अगर बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंक उछला है तो जरूर बाजार ने भी इसका अहसास किया है। हालांकि सेंसेक्स बाद में केवल 122.49 अंकों या 0.69 फीसदी की बढ़त के साथ 17,823.40 परऔरऔर भी

मेरी मानिए तो आज सिर्फ और सिर्फ बजट को देखिए। देखिए कि बाजार उसे कैसे लेता है और सोचते रहिए कि भविष्य के निवेश की प्लानिंग कैसे करेंगे। वैसे तो बजट के सारे दस्तावेज आपको सरकार की खास वेबसाइट पर मिल जाएंगे। लेकिन मेरा कहना है कि 11 बजे से लोकसभा में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के भाषण को ध्यान से सुन लेंगे तो मोटामोटी तस्वीर साफ हो जाएगी। निवेश के लिहाज से बजट में क्या देखा-सुनाऔरऔर भी

यूं तो ममता बनर्जी का रेल बजट सिर्फ राजनीति का झुनझुना भर है। 85 पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) परियोजनाओं की घोषणा भी बहुत बढ़ी-चढ़ी लगती है। लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि भारतीय रेल निजीकरण की दिशा में बढ़ रही है। आज ही आई आर्थिक समीक्षा ने आम बजट को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। राजकोषीय घाटे को जीपीजी के 4.8 फीसदी पर लाना दिखाता है कि सरकार अपने खजाने को चाक-चौबंद करने के प्रतिऔरऔर भी

मुद्रास्फीति ऐसा गंभीर और संवेदनशील मुद्दा है कि इस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और वित्त राज्यमंत्री नमो नारायण मीणा तक बड़ी विनम्रता से बोलते हैं। लेकिन कृषि मंत्री शरद पवार इतने मुंह-फट हो गए हैं कि लगता ही नहीं कि उन्हें जनता या सरकार किसी की भी प्रतिक्रिया की कोई परवाह है। मंगलवार को पवार ने कहा कि सरकार फल और सब्जियों की कीमतों से कोई लेनादेना नहीं है और वहऔरऔर भी

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और बीपी के बीच हुआ करार बाजार का रुख मोड़ देनेवाला विकासक्रम है। लेकिन ट्रेडर और निवेशक अब भी रिलायंस के कंसेट ऑर्डर पर सेबी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यह मसला अगर सुलझ गया तो कम से कम रिलायंस में कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर तमाम एफआईआई की धारणा पटरी पर आ सकती है। अब जाकर आखिरकार मैं वित्त मंत्रालय की तरफ से शेयर बाजार को कुछ घरेलू सहयोग या सहारा देनेऔरऔर भी

अगले हफ्ते सोमवार को पेश होनेवाले आम बजट में बीमा से लेकर रक्षा और मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर कुछ सकारात्मक घोषणाएं हो सकती हैं। इस बात का स्पष्ट संकेत सोमवार को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने बजट सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने कहा, ‘‘हमें निवेश के लिए वातावरण को अनुकूल बनाने की जरूरत है। सार्वजनिक व निजी निवेश के साथऔरऔर भी

देश में कैलेंडर वर्ष 2010 के दौरान में 21 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया जो पिछले वर्ष से 22% कम है। उद्योग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2009 में एफडीआई 27 अरब डॉलर (27,044 करोड़ रुपए) रहा था। वित्त वर्ष की बात करें तो अप्रैल-दिसंबर 2010 में एफडीआई में 23% गिरावट दर्ज की गई और यह 16.03 अरब डॉलर रहा जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 20.86 अरब डॉलर था। रिजर्वऔरऔर भी