सरकार ने उवर्रकों के लिए पोषक तत्वों पर आधारित सब्सिडी स्कीम (एनबीएस) के तहत चालू वित्त वर्ष 2011 के लिए फॉस्फेटिक और पोटाशिक खाद का बेंचमार्क मूल्य बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनके मूल्य ज्यादा होने और बेंचमार्क मूल्य कम होने के चलते अभी तक उर्वरक कंपनियां इनके आयात के करार नहीं कर पा रही थीं। लेकिन सरकार ने अब यह मुश्किल हल कर दी है। गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठकऔरऔर भी

खाद्य मंत्री के वी थॉमस अड़ गए हैं कि वे देश से गेहूं का निर्यात नहीं होने देंगे। ऐसा तब जबकि 19 जनवरी तक उनके बॉस रहे कृषि मंत्री शरद पवार ने पिछले ही हफ्ते कहा था कि देश में गेहूं का भारी स्टॉक है और हमें इसके निर्यात की इजाजत दे देनी चाहिए। वैसे, थॉमस ने मंगलवार को कहा कि गेहूं निर्यात के बारे में अगले हफ्ते मंत्रियों का समूह विचार करेगा। मंत्रियों के समूह कीऔरऔर भी

खेती की लागत बढ़ने के कारण किसान समुदाय ने अगले साल से सभी अनाजों के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी करने की मांग की है। कृषि मंत्री शरद पवार ने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट से बातचीत के दौरान कहा, ‘‘देश में सभी इलाकों के किसान खेती की बढ़ती लागत के कारण सभी अनाजों और गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि ईंधन व मजदूरी के बढ़े हुए खर्च के कारण खेती कीऔरऔर भी

यूरिया को डिकंट्रोल करने की मुहिम जारी है और उर्वरक कंपनियों के स्टॉक पर जुनून-सा सवार होता दिख रहा है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में बना मंत्रियों की समूह (जीओएम) शुक्रवार 3 दिसंबर को इस मुद्दे पर बैठक करेगा। पहले यह बैठक आज, सोमवार 29 नवंबर को होनी थी। लेकिन उर्वरक व रसायन मंत्री एम के अलागिरी इस बैठक से पहले उर्वरक उद्योग के प्रतिनिधियों से मिलना चाहते थे। यह मुलाकात 1 दिसंबर को होगी,औरऔर भी

भारत सरीखे उतार-चढ़ाव भरे मौसम वाले देश में, जहां के नागरिकों का सबसे पुराना पेशा कृषि है, फसल बीमा खेती-किसानी के लिए बड़ा कारगर है। इसे किसानों का संकटमोचक कहा जा सकता है। भारतीय बीमा कंपनियों ने इसे इतना सरल कर दिया है कि एक खास कंपनी से खाद खरीदने वाला किसान खुद-ब-खुद बीमाधारक बन जाता है। किसानों के लिए उपयोगी: ध्यान रहे कि अगर उचित प्रचार-प्रसार किया जाए तो फसल बीमा से देश के सबसे पुरानेऔरऔर भी

भारत में व्यावसायिक खेती करनेवाले किसानों ने अफ्रीकी देश जाम्बिया में निवेश करने की इच्छा जताई है। जाम्बिया सरकार अपने यहां कॉपर व कोबाल्ट की माइनिंग के विकल्प के रूप में खेती को बढ़ावा देना चाहती है। उसने निर्यात के लिए फसलें उगाने के वास्ते 1.55 लाख हेक्टेयर का विशेष मॉडल ब्लॉक विकसित किया है, जहां उसने खास तौर पर सड़कें और बांध बनाए हैं। इस पर उसने लगभग 2.06 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं। भारतीय किसानोंऔरऔर भी