भारत के फार्मर जाम्बिया में निर्यात के लिए खेती करेंगे

भारत में व्यावसायिक खेती करनेवाले किसानों ने अफ्रीकी देश जाम्बिया में निवेश करने की इच्छा जताई है। जाम्बिया सरकार अपने यहां कॉपर व कोबाल्ट की माइनिंग के विकल्प के रूप में खेती को बढ़ावा देना चाहती है। उसने निर्यात के लिए फसलें उगाने के वास्ते 1.55 लाख हेक्टेयर का विशेष मॉडल ब्लॉक विकसित किया है, जहां उसने खास तौर पर सड़कें और बांध बनाए हैं। इस पर उसने लगभग 2.06 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं। भारतीय किसानों ने इसी ब्लॉक में खेती करने में दिलचस्पी दिखाई है।

जाम्बिया के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा है कि भारत के व्यावसायिक फार्मर, खासकर गन्ना किसान, दिसंबर 2010 में ननसंगा मॉडल फार्म में निवेश की संभावनाओं का जायजा लेने के लिए जाम्बिया आनेवाले हैं। इससे पहले मुंबई में ऐसे किसानों के प्रतिनिधियों के साथ जाम्बिया के प्रतिनिधिमंडल की बैठक हो चुकी है।

असल में जाम्बिया अफ्रीका का सबसे बड़ा कॉपर उत्पादक देश है। उसके निर्यात का 90 फीसदी हिस्सा कॉपर से आता रहा है। लेकिन वैश्विक वित्तीय संकट ने इस पर इतना प्रतिकूल असर डाला है कि वहां की सरकार चाहती है कि अर्थव्यवस्था की निर्भरता कॉपर उद्योग पर कम की जाए। इसीलिए वह मक्के जैसी फसलों को बढ़ावा देने में लगी हुई है। उसने 2008-09 में जहां 19 लाख टन मक्का पैदा किया था, वहीं 2009-10 में उसका मक्का उत्पादन 27 लाख टन हो गया है। जाम्बिया इस मक्के का निर्यात नामिबिया, जिम्बाब्वे व कांगो जैसे देशों को करना चाहता है।

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