लंबे समय तक किसी गफलत में जीना न खुद के लिए अच्छा है और न ही औरों के लिए। धीरे-धीरे झलकने लगता है कि हम कितने भ्रम में पड़े हुए थे। लेकिन अपनी जिद और जड़ता के कारण हम सच को स्वीकार करने से भागते रहते हैं।और भीऔर भी

संख्याएं चलाती हैं हमारी जिंदगी। क्या करेंगे, क्या पाएंगे – सारा हिसाब करती हैं संख्याएं। समय तक को बांधती हैं संख्याएं। हम इनसे भाग नहीं सकते। हां, उन्हें उंगलियों के पोरों पर जरूर रख सकते हैं।और भीऔर भी

हर शब्द के साथ कोई न कोई छवि या  पूर्वाग्रह जुड़ा है। शब्दों के परे वह अवस्था है जब हम शुद्ध क्रिस्टल की तरह निर्मल व पारदर्शी बन जाते है। पर वहां शब्दों से भागकर नहीं, मथकर ही पहुंचा जा सकता है।और भीऔर भी