अमेरिकी अर्थव्यवस्था साल 2013 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में उम्मीद से ज्यादा रफ्तार से बढ़ी है। खुद अमेरिकी सरकार का अनुमान जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 1.7 फीसदी वृद्धि का था, जबकि अर्थशास्त्री 2.2 फीसदी का अनुमान लगा रहे थे। लेकिन गुरुवार को अमेरिकी वाणिज्य विभाग की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका का जीडीपी अप्रैल-जून 2013 की तिमाही में 2.5 फीसदी बढ़ा है। यह विकास दर साल की पहली तिमाही से लगभग दोगुनी है। इसऔरऔर भी

वजह बाहरी हो या भीतरी, हकीकत यही है कि अपने यहां अभी एक शेयर 52 हफ्ते के शिखर पर है तो आठ तलहटी पर। गिरनेवालों में एसीसी, सेंचुरी प्लाई, ग्रासिम इंडस्ट्रीज़ और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे तमाम दिग्गज शामिल हैं। क्या तलहटी पर पहुंचा हर शेयर खरीदने लायक है? नहीं। बस नाम व दाम के पीछे भागे तो वैल्यू ट्रैप में फंस जाएंगे। हमें चुननी होगी मजबूत आधार और अच्छे प्रबंधन वाली कंपनी। लीजिए, ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

शुक्रवार को सेंसेक्स के 769.41 अंक (3.97%) व निफ्टी के 234.45 अंक (4.08%) गिरने से अफरातफरी मची है हर तरफ। कहा जा रहा है कि अब गिरावट की तगड़ी मार बाज़ार को झेलनी पड़ेगी। लेकिन दुनिया भर के सफलतम निवेशकों का अनुभव बताता है कि हर बड़ी गिरावट अच्छे स्टॉक्स को सस्ते में खरीदने का बेहतरीन मौका है। लेकिन ऐसे स्टॉक्स को पहचानें कैसे? इसके लिए हम लेकर आए हैं सबसे भरोसमंद सेवा, सबसे सस्ते मूल्य पर…औरऔर भी

निवेशकों को उन्हीं कंपनियों में अपनी बचत लगानी चाहिए जिन्हें वे जानते हों। खासकर तब, जब हवा का रुख उल्टा हो, दिग्गज कंपनियों तक के शेयर पिट रहे हों, तब उन्हें ऐसी कंपनियों को चुनना चाहिए जो मजबूत धरातल पर खड़ी हों। आर्थिक दुविधा और गिरावट के दौर में अपना होमवर्क भी बेहद जरूरी है। यह न केवल अपनी संपदा को बढ़ाने, बल्कि उसे बचाने के लिए भी आवश्यक है। पेश है ऐसी ही एक लार्जकैप कंपनी…औरऔर भी

भाव बढ़ते और गिरते हैं। लंबे निवेश के लिए इसका खास मतलब नहीं। मायने-मतलब है तो मूल्य का। भाव के लिए चुकाए गए धन के एवज में हमें मिलता है मूल्य। भाव हमें दिखता है। मूल्य दिखता नहीं, लेकिन हमारे निवेश की सार्थकता का सार है। भाव शरीर है तो मूल्य चरित्र है, आत्मा है। हम ऐसे ही मूल्यवान शेयरों को बराबर यहां पेश करते रहे हैं। मसलन, अतुल लिमिटेड तीन साल में तीन गुना हो गया…औरऔर भी

फैसला हो गया। टेक महिंद्रा अब महिंद्रा सत्यम की बची हुई 61.35 फीसदी इक्विटी भी खरीद लेगी। इसके लिए वह महिंद्रा सत्यम के शेयधारकों को हर 17 शेयर पर अपने (टेक महिंद्रा के) दो शेयर जारी करेगी। धन का कोई लेनदेन नहीं, सारा मामला शेयरों से निपटा लिया जाएगा। ध्यान दें कि महिंद्रा सत्यम के शेयर दो रुपए अंकित मूल्य के हैं, जबकि टेक महिंदा के शेयरों का अंकित मूल्य दस रुपए है। दोनों कंपनियों के निदेशकऔरऔर भी

सरकार को देश के रिटेल व छोटे निवेशकों को शेयर बाजार में खींचकर लाने में भले ही कामयाबी न मिल रही हो, लेकिन हमारा वित्त मंत्रालय विदेश के रिटेल व छोटे निवेशकों को यहां ट्रेड करने की इजाजत देने पर विचार कर रहा है। इससे पहले चालू वित्त वर्ष 2011-12 के बजट में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने विदेशी निवेशकों को म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों में निवेश की अनुमति देने का ऐलान किया था। इस परऔरऔर भी

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इस समय देश के भीतर और दुनिया के वित्तीय बाजारों में जैसी अनिश्चितता चल रही है, उसकी वजह से भारतीयों ने शेयर बाजार में निवेश बेहद घटा दिया है। वैश्विक स्तर की निवेश व सलाहकार फर्म मॉरगन स्टैनले की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक चालू साल 2011 में भारतीय लोगों ने अपनी कुल आस्तियों का बमुश्किल 4 फीसदी इक्विटी बाजार में लगा रखा है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले चालीस सालों में इतना कम निवेश केवल दोऔरऔर भी

अमेरिका की प्राइवेट इक्विटी फर्म कार्लाइल ग्रुप ने प्रमुख ब्रोकरेज व वित्तीय सेवा कंपनी इंडिया इनफोलाइन (आईआईएफएल) की 9 फीसदी इक्विटी खरीद ली है। यह खरीद उसने सीधे शेयर बाजार से की है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को यह जानकारी दी है। लेकिन उसने यह नहीं बताया है कि कार्लाइल ने किस भाव पर उसके शेयर खरीदे हैं। वैसे, बुधवार के बंद भाव 71.20 रुपए पर इंडिया इनफोलाइन की 9 फीसदी इक्विटी का मूल्य करीब 185 करोड़औरऔर भी

पैसे का कोई पेड़ नहीं लगता कि गए और तोड़कर आ गए। यह किसी भी दौर के व्यापकतम सामाजिक अंतर्संबंधों में व्याप्त विनियम मूल्य का मूर्त स्वरूप है। यह सोमनाथ के ऐतिहासिक मंदिर में शिव की मूर्ति की तरह हवा में लटका हुआ दिख सकता है। लेकिन इसका पोर-पोर किसी न किसी ने दांतों से दबा रखा है। अंग्रेजी में कहावत है कि कहीं कोई फ्री लंच नहीं होता। इसलिए शेयर बाजार को पैसा बनाने का आसानऔरऔर भी