सत्यम के शेयरधारक टेक महिंद्रा में होंगे बलवान

फैसला हो गया। टेक महिंद्रा अब महिंद्रा सत्यम की बची हुई 61.35 फीसदी इक्विटी भी खरीद लेगी। इसके लिए वह महिंद्रा सत्यम के शेयधारकों को हर 17 शेयर पर अपने (टेक महिंद्रा के) दो शेयर जारी करेगी। धन का कोई लेनदेन नहीं, सारा मामला शेयरों से निपटा लिया जाएगा। ध्यान दें कि महिंद्रा सत्यम के शेयर दो रुपए अंकित मूल्य के हैं, जबकि टेक महिंदा के शेयरों का अंकित मूल्य दस रुपए है।

दोनों कंपनियों के निदेशक बोर्ड ने बुधवार को अपनी अलग-अलग बैठकों में विलय पर मोहर लगा दी। अभी महिंद्रा समूह ने महिंद्रा सत्यम की 42.65 फीसदी इक्विटी वेंचरबे कंसल्टेंट प्रा. लिमिटेड के जरिए ले रखी है। लेकिन बोर्ड ने वेंचरबे कंसल्टेंट को टेक महिंद्रा में मिला लिया है तो महिंद्रा सत्यम की इक्विटी टेक महिंद्रा के खाते में चली गई। टेक महिंद्रा अब महिंद्रा सत्यम के शेयरों के बदले अपने कुल 10.34 करोड़ नए शेयर जारी करेगी। इसके बाद टेक महिंद्रा की इक्विटी शेयरों की संख्या बढ़कर 23.08 करोड़ और इक्विटी पूंजी 230.8 करोड़ रुपए हो जाएगी।

विलय के बाद टेक महिंद्रा में महिंद्रा समूह की इक्विटी हिस्सेदारी 26.3 फीसदी, ब्रिटिश टेलिकॉम की 12.8 फीसदी, महिंद्रा सत्यम के पब्लिक शेयरधारकों की 34.4 फीसदी और टेक महिंद्रा के पब्लिक शेयरधारकों की 16.1 फीसदी रहेगी। ध्यान दें, महिद्रा सत्यम के आम शेयरधारक अब टेक महिंद्रा में बलशाली हो जाएंगे। बाकी बचे 10.4 फीसदी शेयर ट्रेजरी स्टॉक के रूप में खुद टेक महिंद्रा के नाम में रहेंगे।

बुधवार में शेयर बाजार के बंद भाव के लिहाज से देखें तो भी महिंद्रा सत्यम के शेयधारकों को फायदा हो रहा है। बीएसई में महिंद्रा सत्यम का बंद भाव 77.55 रुपए रहा है, जबकि टेक महिंद्रा का बंद भाव 683.90 रुपए है। मान लीजिए किसी के पास महिंद्रा सत्यम के 102 शेयर हैं तो इन्हें बेचकर उसे 7910.10 रुपए मिलेंगे। वहीं, इनके एवज में मिले टेक महिंद्रा के 12 शेयरों को वो बेचे तो उसे 8206.80 रुपए मिलेंगे। दूसरे, उसे दो रुपए अंकित मूल्य के बदले दस रुपए अंकित मूल्य के शेयर मिल रहे हैं। विलय को अगले छह से नौ महीनों में अमली जामा पहनाया जाना है।

विलय के बाद टेक महिंद्रा देश की पांचवीं सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी बन जाएगी। साथ ही कंपनी के पास दुनिया भर में 350 से ज्यादा ग्राहक हो जाएंगे, जबकि कुल कमर्चारियों की संख्या 75,000 से ज्यादा होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इस विलय से भारतीय कॉरपोरेट जगत के इतिहास में गवर्नेंस को लेकर लगा सबसे बदनुमा दाग अब मिट गया है। जेल में बंद मूल कंपनी सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज के प्रवर्तक रामलिंगा राजू को अपने फ्रॉड के लिए कायदे की सज़ा मिल जाए तो रही-सही कसर भी पूरी हो जाएगी।

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