पूर्व वित्त सचिव ने खोला सरकार का भेद, पूंजी व्यय बढ़ाने का दावा है पूरा का पूरा झूठा
केंद्रीय वित्त मंत्रालय में जुलाई 2017 से लेकर जुलाई 2019 तक आर्थिक मामलात के सचिव से लेकर वित्त सचिव तक रह चुके सुभाष चंद्र गर्ग ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले ही महीने उनकी किताब, ‘वी आलसो मेक पॉलिसी’ का एक अंश अखबारों में सुर्खियां बन गया था जिसमें खुलासा किया गया था कि 14 सितंबर 2018 को एक बैठक में रिजर्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार को धन देने से मना करने परऔरऔर भी
पूरा चुनावी बजट, गरीब मतदाता खींचे, मशीनरी चुस्त, ग्रीस भरपूर
हर तरफ हल्ला है। अखबारों से लेकर टीवी चैनलों और कॉरपोरेट क्षेत्र में तारीफ-दर-तारीफ हो रही है कि एनडीए सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट होने के बावजूद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नए वित्त वर्ष 2023-24 के बजट को लोकलुभावन होने से बचा लिया। विकास पर ही पूरा ध्यान रखा। साथ ही राजकोषीय अनुशासन का पूरा पालन किया। सरकार की उधारी नहीं बढ़ने दी और राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.9% तक सीमित रखा।औरऔर भी
थमने का मतलब रुक जाना नहीं होता!
अर्थकाम के अब तक के सफर के हमसफर दोस्तों! अब तक मैंने ट्रेडिंग बुद्ध और तथास्तु की सेवा थोड़े-बहुत व्यवधान के बावजूद बराबर जारी रखी। लेकिन इधर स्वास्थ्य संबंधी कुछ जटिल समस्याएं आ गई हैं। सच बताऊं तो मेरे हार्ट की बाईपास सर्जरी ज़रूरी हो गई है। कल 4 फरवरी को सीना खोलकर यह ऑपरेशन किया जाएगा। उसके बाद हील होने में अमूमन पांच-छह हफ्ते लग ही जाते हैं। उसके बाद ही काम करने लायक हो पाऊंगा।औरऔर भी
दम तोड़ चुका है जनसंख्या विस्फोट का सिद्धांत
स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त 2020 को शनिवार का दिन था। शनि का दिन यानी मानें तो दुर्बुद्धि का दिन। पिछली बार 15 अगस्त को गुरुवार का दिन था। गुरु का दिन, बुद्धिमत्ता का दिन। लेकिन तब 15 अगस्त 2019 के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से बड़ी दुर्बुद्धि वाली बात कही थी। उन्होंने ‘बेतहाशा जनसंख्या विस्फोट’ का जिक्र करते हुए कहा था, “जनसंख्या विस्फोट हमारे लिए, हमारी आनेवाली पीढ़ी के लिए अनेक नए संकटऔरऔर भी








