इस बार 15 अगस्त को शनिवार का दिन था। शनि का दिन, दुर्बुद्धि का दिन। पिछली बार 15 अगस्त को गुरुवार का दिन था। गुरु का दिन, बुद्धिमत्ता का दिन। लेकिन तब 15 अगस्त 2019 के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से बड़ी दुर्बुद्धि वाली बात कही थी। उन्होंने ‘बेतहाशा जनसंख्या विस्फोट’ का जिक्र करते हुए कहा था, “जनसंख्‍या विस्‍फोट हमारे लिए, हमारी आनेवाली पीढ़ी के लिए अनेक नए संकट पैदा करता है। देशऔरऔर भी

सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव परिणाम आ चुके हैं। देश में करोड़ों दिलों की रुकी हुई घड़कनें अब चलने लगी हैं और दिमाग काम करने लगा है। इसलिए फेंकने-हांकने या हवाहवाई बातें करने के बजाय उस ठोस कार्यभार को समझने की ज़रूरत है जो देश की नई सरकार के सामने मौजूद है। समय बहुत कम है क्योंकि तीन साल बाद ही 2022 में हम आज़ादी की 75वीं सालगिरह मनाने जा रहे हैं। तीन साल में नया भारत बनाऔरऔर भी

आर्थिक विवेक कहता है कि किसानों की कर्जमाफी गलत है। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल से लेकर देश के सबसे बड़े बैंक, एसबीआई की चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य तक इसका विरोध कर चुकी हैं। लेकिन राजनीतिक विवेक कहता है कि चुनावी वादा फटाफट पूरा कर दिया जाए। इसलिए अगर योगी सरकार ने भाजपा के लोक संकल्प पत्र के वादे को पूरा करते हुए पहली कैबिनेट बैठक में ही पांच एकड़ तक की जोतवाले 94 लाख लघु वऔरऔर भी

छासठ साल कम नहीं होते बंद गांठों को खोलने के लिए। लेकिन नीयत ही न हो, सिर्फ साधना का स्वांग चल रहा हो तो कुंडलिनी मूलाधार में ही कहीं सोई पड़ी रहती है। आज़ादी के बाद देश की उद्यमशीलता को जिस तरह खिलना चाहिए था, वैसा नहीं हुआ। सच कहें तो सायास ऐसा होने नहीं दिया गया। उद्योगों को मंदिर मानने, हाइब्रिड बीजों से आई हरित क्रांति और अर्थव्यवस्था को खोलने के पीछे बराबर एक पराश्रयी सोचऔरऔर भी

कृषि और वाणिज्य मंत्रालय में करीब दो महीने तक चली खींचतान के बाद आखिरकार सरकार ने अब कपास का निर्यात खोल दिया है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष धीरेन शेठ के मुताबिक इससे कपास के दाम 10 से 15 फीसदी बढ़ सकते हैं। लेकिन जानकारों का कहना है कि इसका खास फायदा किसानों को नहीं मिलेगा क्योंकि ज्यादातर किसान अपना 70-80 फीसदी कपास पहले ही बेच चुके हैं। इसका फायदा मूलतः कपास के स्टॉकिस्टों या उनऔरऔर भी