अंतःप्रेरणा का सच
2011-08-03
सपनों की तरह हमारी अंतःप्रेरणा भी कहीं आसमान से नहीं टपकती। वह हमारे प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से संचित अनुभवों से निकलती है। इसलिए कोई अदृश्य प्रभाव जान उसे हमेशा सही मानने का कोई तुक नहीं है।और भीऔर भी
सपनों की तरह हमारी अंतःप्रेरणा भी कहीं आसमान से नहीं टपकती। वह हमारे प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से संचित अनुभवों से निकलती है। इसलिए कोई अदृश्य प्रभाव जान उसे हमेशा सही मानने का कोई तुक नहीं है।और भीऔर भी
बंद आंखों के सपने हमें अधूरी चाहतों व वर्जनाओं से मुक्त कराते हैं, जबकि खुली आंखों के सपने दुनिया को जीतने का हौसला देते हैं। इसलिए खुली आंखों से बंद आंखों के सपने देखना अच्छी बात नहीं है।और भीऔर भी
© 2010-2025 Arthkaam ... {Disclaimer} ... क्योंकि जानकारी ही पैसा है! ... Spreading Financial Freedom