वही लोग, वही रिश्ते, वही राहें, वही मुश्किलें। ये सब भयावह हैं या सहयोगी, यह हमारे नजरिये पर निर्भर है। ऐसे देखो तो हिम्मत तोड़कर वे हमें अवसाद का शिकार बना सकती हैं। वैसे देखो तो वे ललकार कर हमारे सोये बल को जगा सकती हैं।और भीऔर भी

प्राण मरने पर ही शरीर नहीं छोड़ता, बल्कि जीवित रहते हुए भी प्राण तत्व घटता रहता है। पस्तहिम्मती और आत्मबल के डूबने के रूप में सामने आता है यह। हां, इस दौरान मृत्यु के जबड़े से जीवन को खींच लेने का विकल्प हमारे सामने खुला रहता है।और भीऔर भी

कल की शानदार रैली के बाद आज कमजोर शुरूआत होनी ही थी। लेकिन अमेरिका में बेरोजगारी के आंकडों का भी असर होना था जो काफी सकारात्मक रहे। अप्रैल 2008 में वहां बेरोजगारी भत्ते का आवेदन करनेवालों की संख्या में अप्रत्याशित कमी आई है। इसके ऊपर से खाद्य मुद्रास्फीति के आंकड़े आ गए तो हर तरफ ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद दौड़ गई। खाद्य मुद्रास्फीति की दर 1.81 फीसदी पर पहुंच गई है जो करीब चार सालोंऔरऔर भी

महज रस्से के सहारे तीखे पहाड़ को पार करने की हिम्मत बिरले लोग ही जुटा पाते हैं। उनके जैसा बनने का मंसूबा तो हम नहीं पाल सकते। लेकिन उनके जैसा आत्मविश्वास हम जरूर पाल सकते हैं।और भीऔर भी

प्रतिभा को साहस और बहादुरी का साथ न मिले तो वह कभी खिल ही नहीं सकती। डर-डर कर जीनेवाला दुनियादार हो सकता है, प्रतिभाशाली नहीं। प्रतिभा तो हमेशा लीक से हटकर, खांचे को तोड़कर चलती है।और भीऔर भी

तीन साल पुराने लेहमान ब्रदर्स के प्रेत ने हमारे निवेशकों व ट्रेडरों के मन को अभी तक अवांछित नकारात्मकता से भर रखा है। अमेरिका के ऋण संकट को यहां इतनी संजीदगी से देखा जा रहा था जैसे भारत व एशिया के निवेशकों ने ही अमेरिका को सारा उधार दे रखा हो और कोई भी संभावित डिफॉल्ट उनका धन स्वाहा कर देगा। यह निराशावाद की इंतिहा है और मेरी राय में अगर कोई निवेशक जोखिम नहीं उठा सकताऔरऔर भी

चांदी में आखिरकार वही हुआ जिसका अंदेशा था। मामूली दरार अब खाईं बनती जा रही है। जिस चांदी को 165 फीसदी बढ़कर 75,000 रुपए प्रति किलो तक पहुंचने में 12 महीने लग गए थे, वह 12 दिनों में ही 28 फीसदी से ज्यादा गिर कर 53,750 रुपए प्रति किलो पर आ चुकी है। अब तो यही लगता है कि अगले 12 महीनों में हर मामूली बढ़त पर इसमें शॉर्ट सौदों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। अगले 12औरऔर भी