सब धान बाइस पसेरी तौलनेवाले पंसारी की दुकान चला सकते हैं, नया नहीं ला सकते। समाज, संस्था या कहीं भी बदलाव लाना हो तो पहले उसके आज को बड़ी बारीकी से गहना-समझना पड़ता है।और भीऔर भी

अवरुद्ध रंध्रों को खुल जाने दो। बंधे हुए बांधों को टूट जाने दो। ठहरे हुए झरनों को गिर जाने दो। आंधी आने को है। अबाध ऊर्जा का धमाका होने को है। सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। अवाम उठने को है। देश जगने को है।और भीऔर भी

हवाई जहाज से झुग्गियां भी ज्यामितीय आकार में सजी हुई दिखती हैं। पास आने पर असलियत खुलती है। दूर से दिखता है बस तमाशा। बदलना हो तो पास जाना पड़ता है, माइक्रोस्कोप तक से देखना पड़ता है।और भीऔर भी