किराने के बगल में किराने की दूसरी दुकान, ज्वैलर के बगल में कई ज्वैलर, हार्डवेयर व पेंट की एक नहीं, अनेक दुकानें। आसपास दवा की दुकानों की भरमार। आखिर इतनी सारी दुकानों को इतने सारे ग्राहक कहां से मिल जाते हैं कि सब का धंधा चौकस चलता रहता है? इस सवाल का ठोस जवाब भले ही न मिल पाए, लेकिन हकीकत यही है कि सभी दुकानदार मजे में धंधे के दम पर घर-परिवार चलाते हैं। यही शांतिऔरऔर भी

अपने यहां खेती के बाद सबसे ज्यादा रोज़गार व्यापार में मिला हुआ है। गांव-गिरांव में तो अब भी बिजनेस का मतलब व्यापार समझा जाता है। बहुत हुआ तो ईंट-भट्ठा लगा लिया। मैन्यूफैक्चरिंग लोगों में जेहन में इससे ज्यादा पैठ नहीं बना पाई है। यकीनन, शहरों से सटे इलाकों और कस्बों में करोड़ों छोटी-छोटी इकाइयां लग गई हैं जो भांति-भांति की औद्योगिक खपत वाली चीजें बनाती हैं। लेकिन खेती से भागते आम लोगों में प्रभावी सोच व्यापार कीऔरऔर भी

दुनिया में निवेश के भांति-भांति के तरीके और शैलियां हैं। लेकिन अच्छी व संभावनामय कंपनियों के शेयर समय रहते कम भाव पर खरीद लेने की शैली ‘वैल्यू इन्वेस्टिंग’ का कोई तोड़ नहीं है। यह बात ‘अर्थकाम’ खुद करीब साढ़े बारह साल के अपने अनुभव से दावे के साथ कह सकता है। मसलन, हमने अपने लॉन्च के करीब साल भर बाद 18 अप्रैल 2011 को इसी कॉलम में (तब यह कॉलम सबके लिए खुला था) एक स्मॉल-कैप कंपनीऔरऔर भी

शेयर बाज़ार से कमाने के लिए रिटेल ट्रेडरों को कुछ खास बातें गांठ बांध लेनी चाहिए। सबसे पहले अच्छे व्यापारी बनो। थोक में खरीदो, रिटेल में बेचो। इसका सलीका सीखना कोई मुश्किल नहीं। केवल निफ्टी-50, निफ्टी नेक्स्ट-50 या बहुत हुआ तो निफ्टी-100 सूचकांक में शामिल स्टॉक्स में ही ट्रेड करें। इनमें से अपने लिए बहुत हुआ 10-15 स्टॉक्स चुन लें। दिन में बहुत हुआ तो 2% और लम्बे स्विंग, मोमेंटम व पोजिशनल ट्रेड में 5-10-12% तक कमानेऔरऔर भी

कभी भी कहीं से उम्मीद न रखें कि कोई सलाहकार शेयरों की चाल की सटीक भविष्यवाणी कर सकता है। आप यह हकीकत चाहें तो सहज बुद्धि से स्वीकार कर सकते हैं। नहीं तो लाखों की सेवा लेकर भी एकाध साल में जान सकते हैं। रिस्क आप ले रहे हो, उफनती धारा में आप छलांग लगे रहो तो तैरना आपको ही पड़ेगा। दूसरा तो केवल थोड़े से सपोर्ट के लिए होता है। इसमें तो बाज़ार से अनजान घरऔरऔर भी

शेयरों की ट्रेडिंग बाज़ार में सक्रिय निवेशकों व ट्रेडरों की मानसिकता व आवेग को जानकर उनके बर्ताव को पहले से भांप लेने का खेल है। लेकिन यह कितना संभव है? आप अपने को समझ सकते हैं, अपने जैसे अन्य ट्रेडरों की चाल को समझ सकते हैं, लेकिन जहां देश के कोने-कोने के लाखों अनजान लोग ही नहीं, विश्व स्तर पर करोड़ों धनवान सक्रिय हों जिनकी नुमाइंदगी फाइनेंस की दुनिया के दिग्गज प्रोफेशनल कर रहे हों, वहां साराऔरऔर भी

रिटेल ट्रेडर को सबसे पहले अपनी मानसिकता व आवेगों को कायदे से जानना चाहिए। इससे वह अपने जैसे लाखों ट्रेडरों की मानसिकता को समझने के साथ ही खुद के आवेगों पर नियंत्रण पा सकता है। लेकिन उसके लिए सबसे बड़ी बात है प्रोफेशनल, एचएनआई और देशी-विदेशी संस्थागत निवेशकों व ट्रेडरों के रुख को समझना। इसमें उसकी सबसे ज्यादा मदद टेक्निकल एनालिसिस करती है। चार्ट असल में इस दमदार श्रेणी के निवेशकों व ट्रेडरों की सारी हरकत काऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग दरअसल कंपनियों के फंडामेंटल नहीं, बल्कि इस बाज़ार में सक्रिय ट्रेडरों के संभावित बर्ताव, उनकी मानसिकता और आवेगों को समझने का खेल है। यह ज़रूर है कि शेयरों के भाव खबरों से भी प्रभावित होते हैं। लेकिन रिटेल ट्रेडरों को खबरों से खेलने का ज़ोन पूरी तरह बड़े उस्तादों के लिए छोड़ देना चाहिए। इसलिए जिन दिन भी कंपनी या अर्थव्यवस्था की बड़ी खबर आनी हो, उस दिन उन्हें ट्रेडिंग नहीं करनी चाहिए।औरऔर भी

ट्रेडिंग में मोमेंटम और निवेश में मूल्य को समय से पहले कम भाव पर पकड़ लेना। शेयर बाज़ार से छोटी और बड़ी अवधि, दोनों में कमाने का सबसे सुंसगत तरीका यही हो सकता है। निवेश को समय से पहले कम भाव पर पकड़ लेने को वैल्यू इन्वेस्टिंग भी कहते हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेश के इसी तरीके से लम्बे समय में कमाते हैं। यह है क्या? मान लीजिए कि आपको परम्परात ज्ञान, बाज़ार व बिजनेस की समझऔरऔर भी

सितंबर तिमाही के जीडीपी आंकड़ों के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा था कि चालू वित्त वर्ष 2022-23 में अर्थव्यवस्था 6.8% से 7% बढ़ सकती है क्योंकि बढ़ती मांग से मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में उछाल आ सकता है। लेकिन जो क्षेत्र सितंबर तिमाही में 4.3% सिकुड़ा हो, उसमें अचानक कैसे उछाल आ सकता है? वह भी तब, जब रिजर्व बैंक बराबर ब्याज दर बढ़ाकर मांग घटाने में लगा है! दो दिन पहले बुधवार को हीऔरऔर भी